Pakistan Bakra Eid: बकरे पर बवाल, इधर-उधर बेची खाल तो पीछे पड़ेगी मरियम की पुलिस, क्या है वजह?
Pakistan Bakra Eid: पाकिस्तान में बकरा ईद से ज्यादा बकरे की खाल पर क्लेश होता दिख रहा है। जिसको लेकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के पंजाब गृह विभाग ने ईद-उल-अज़हा से पहले बैन और निगरानी वाले संगठनों की सूची जारी कर दी है। साथ ही जनता को प्यार से नहीं, बल्कि साफ चेतावनी के साथ कहा गया है कि कुर्बानी के जानवरों की खाल किसी भी ऐसे समूह या उससे जुड़े संगठनों को न दी जाए जो प्रतिबंधित या निगरानी में हैं।
"मदद की तो एंटी टेररिस्ट एक्ट में होगा एक्शन"
विभाग के प्रवक्ता ने बिल्कुल साफ कर दिया कि "प्रतिबंधित संगठनों को किसी भी तरह की सहायता देना आतंकवाद-विरोधी अधिनियम 1997 के तहत दंडनीय अपराध है। यानि अब ईद पर सिर्फ कुर्बानी नहीं, "कानूनी कुर्बानी" से भी बचना पड़ेगा। साथ ही चेतावनी भी दी गई कि ऐसे किसी भी संगठन का समर्थन करने वालों पर सीधी कानूनी कार्रवाई होगी। गजब बात ये है कि पाकिस्तान में भी एंटी टेररिस्ट एक्ट है।

लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा भी लिस्ट में
गृह विभाग की सूची में कई नाम शामिल हैं जैसे- लश्कर-ए-झांगवी, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, अल कायदा, दाएश, जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन समेत कई अन्य आतंकी संगठन हैं। यानि मरियम सरकार ने साफ कर दिया है कि "ईद पर दान दो, लेकिन आतंकियों को नहीं।"
OTP वेरिफाइ कर दान होगी बकरे की खाल
नागरिकों को सलाह दी गई है कि खाल सिर्फ पंजाब चैरिटी कमीशन (PCC) में रजिस्टर्ड संस्थाओं को ही दें, और हां, अब सिर्फ भरोसे से काम नहीं चलेगा, हर संस्था की वैधता उनके सर्टिफिकेट पर लगे QR कोड से चेक करनी होगी। मतलब खाल दान करने से पहले भी अब स्कैनिंग जरूरी है।
NGO भी अब लाइसेंस लेकर आएं वरना एंट्री बंद
प्रवक्ता ने बताया कि सभी चैरिटेबल संगठनों के लिए PCC में पंजीकरण अनिवार्य है। और जिला आयुक्तों (DCs) को पूरा अधिकार है कि वे मदरसों और कल्याणकारी संगठनों को खाल इकट्ठा करने के परमिट दें। यानि अब खाल कलेक्शन भी "सरकारी परमिशन ड्रामा" के बिना संभव नहीं।
"जहां ढोल मढ़ रहे वहां मत दे देना"
नागरिकों से साफ कहा गया है कि खाल सिर्फ PCC या संबंधित DC द्वारा जारी वैध सर्टिफिकेट वाले संगठनों को ही दें। सरल भाषा में कहें तो जहां भी ड्रम बज रहा हो, वहां खाल मत दे देना।सरकार ने हेल्पलाइन (0800-11111, 042-99330399, 042-99330162) भी जारी कर दिए हैं ताकि कोई "गुपचुप" शिकायत कर सके। बस बकरे की खाल को जेड प्लस सुरक्षा मिलना बाकी है।
खैबर पख्तूनख्वा में तो पहले से full lockdown मोड
पिछले हफ्ते खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने भी ईद-उल-अज़हा के दौरान पूरे जिले में प्रतिबंधित और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा खाल इकठ्ठा करने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। यहां तक कि कमिश्नर मियां बेहज़ाद आदिल ने आदेश में कहा- "लाउडस्पीकर और कलेक्शन सेंटर दोनों ही बैन हैं।" यानि ईद पर सिर्फ कुर्बानी allowed है, campaigning नहीं।
आतंकी संगठन क्यों खरीदते हैं बकरे की खाल?
ईद-उल-अज़हा जैसे मौके पर बड़ी मात्रा में खाल निकलती है। कई जगहों पर ये खाल चैरिटी, मदरसों या NGOs को दी जाती है। कुछ प्रतिबंधित या निगरानी वाले समूह इस सिस्टम का गलत फायदा उठाकर इसे पैसे जुटाने के साधन की तरह इस्तेमाल करते हैं। कुर्बानी की खाल चमड़ा उद्योग (leather industry) में इस्तेमाल होती है। इससे बैग, जूते, बेल्ट और अन्य लेदर प्रोडक्ट बनते हैं। यानि यह बेकार चीज नहीं है बल्कि इसकी अच्छी कमर्शियल वैल्यू होती है।
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