उत्तराखंड के भूजल भंडार में सुधार, सेमी क्रिटिकल जोन से बाहर हुआ खटीमा
देहरादून। उत्तराखंड के कई जिले भूजल संकट से गुजर रहे हैं, लेकिन इसी बीच एक अच्छी खबर सामने आ रही है। जल स्तर के लिहाज से चिंताजनक श्रेणी यानि सेमीक्रिटिकल केटेगैरी में शामिल खटीमा अब सुरक्षित जोन में आ गया है। इसके अलावा प्रदेश के तीन अन्य ब्लाकों में भी वर्ष 2017 के मुकाबले काफी सुधार हुआ है। हालांकि अभी भी उत्तराखंड के कई जिले जल स्तर संकट से गुजर रहे हैं।

सरकार ने वर्ष 2017 में केंद्रीय जल आयोग से सर्वे कराया तो पांच ब्लाक ऐसे पाए गए, जहां भूजल संकट सबसे अधिक है। इनमें बहादराबाद, भगवानपुर (हरिद्वार), हल्द्वानी (नैनीताल), खटीमा, काशीपुर (ऊधमसिंहनगर) शामिल थे। ये ब्लाक भूजल दोहन के लिहाज से सेमी क्रिटिकल जोन में थे। यानी वहां 75 से 86 फीसद तक भूजल का दोहन हो रहा था। जिसके बाद सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए इस पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी।
सचिव सिंचाई नितेश झा के मुताबिक इस कड़ी में जहां इन क्षेत्रों में भूजल उपयोग एक्ट के तहत कर बढ़ाए गए। साथ ही वर्षा जल संरक्षण समेत अन्य उपाय किए गए। जिसका असर अब इन ब्लॉक में भी दिखने लगा है। ऊधमसिंहनगर का खटीमा ब्लाक सेमी क्रिटिकल जोन से बाहर आ गया है। वर्ष 2017 में वहां भूजल दोहन की दर 82.11 फीसद थी, जो अब घटकर 66.19 फीसद पर आ गई है।
बहादराबाद, काशीपुर और भगवानपुर में भी स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है। माना जा रहा है कि जल्द ही ये भी सुरक्षित जोन में आ जाएंगे। लेकिन हल्द्वानी की स्थिति अभी भी सही नहीं है। भूजल स्तर में गिरावट के कारण उत्तराखंड क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल जोन में हैं। हरिद्वार जिले के भगवानपुर और बहादराबाद क्षेत्र क्रिटिकल जोन हैं। इसके चलते सरकार ने यहां नये ट्यूबवेल पर रोक लगा रखी है। हरिद्वार के ही रोशनाबाद में भूजल स्तर तीन साल में 15 मीटर से 42 मीटर तक गिरा है।












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