उत्तराखंड में दलबदल से 5 विधानसभा सीटों पर कैसे बदले समीकरण, जानिए पूरी गणित
उत्तराखंड में दलबदल से भाजपा कांग्रेस के समीकरण भी बदले
देहरादून, 13 अक्टूबर। उत्तराखंड में चुनावी साल में दलबदल को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा कांग्रेस दोनों अपने दल को मजबूत करने में जुटे हैं। जिसके लिए सियासी दांव भी खेले जा रहे हैं। लेकिन दलों के सियासी दांव से विधानसभाओं के समीकरण भी बदलते जा रहे हैं। बीते दिनों में 5 विधायकों ने पाला बदला है। जिससे क्षेत्रीय समीकरणों पर असर दिखने लगा है।

3 विधायक 6 सीटों पर असर
दलबदल की शुरूआत भाजपा खेमे से हुई। भाजपा ने धनोल्टी से निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार को अपने पाले में लाकर कांग्रेस को चुनौती दे डाली। प्रीतम पंवार कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं। प्रीतम धनोल्टी विधानसभा से पहले यमुनोत्री का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इस सीट पर भाजपा के विधायक हैं। अब भाजपा के स्थानीय नेताओं को धनोल्टी और यमुनोत्री दोनों सीटों पर अपनी जमीन खिसकती हुई नजर आने लगी है। जिसका असर चुनाव से पहले भी दिख सकता है। प्रीतम के बाद कांग्रेस के विधायक राजकुमार ने भाजपा ज्वाइन की। जो कि पुरोला सुरक्षित सीट से विधायक थे। इससे पहले राजकुमार सहसपुर से चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन अब वे देहरादून की राजपुर से भी कोशिश कर रहे हैं। इस तरह से राजकुमार के आने से भाजपा की 3 विधानसभा सीटों पर असर पड़ता हुआ नजर आ रहा है। पहली पुरोला, दूसरी सहसपुर और तीसरी राजपुर। सहसपुर और राजपुर सीट पर भाजपा के सिटिंग विधायक और पुरोला सीट पर पूर्व प्रत्याशी भी अब अपने टिकट को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। राजकुमार के बाद भीमताल से निर्दलीय विधायक राम सिंह कैड़ा भाजपा में आए। जिनका लंबे समय से भाजपा में आने का विरोध हो रहा है। और पार्टी ज्वाइन करने के बाद भी लगातार क्षेत्र में विरोध की खबरें आ रही है। 5 साल तक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जो तैयारी की, उसको लेकर अब पार्टी उम्मीदवारों में नाराजगी है।
कांग्रेस में अंदरूनी कलह
अब बात कांग्रेस की। कांग्रेस ने एक साथ 2 विधायक यशपाल आर्य और संजीव आर्य को अपने पाले में लाया। यशपाल बाजपुर और संजीव नैनीताल सीट से विधायक हैं। दोनों सीटों पर कांग्रेस का गणित गड़बडाया गया है। सबसे ज्यादा विरोध नैनीताल सीट पर है। नैनीताल से कांग्रेस की महिला मोर्चा अध्यक्ष सरिता आर्य चुनाव लड़ चुकी है। अब चुनाव से पहले संजीव के आने से सरिता को टिकट कटने का डर सताने लगा है। सरिता ने इसको लेकर जमकर विरोध भी शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं कांग्रेस के कई बड़े नेता पिता पुत्र की घर वापसी को भी पचा नहीं पा रहे हैं। जिसका नुकसान आने वाले दिनों में कांग्रेस को हो सकता है। फिलहाल तो पिता पुत्र के कांग्रेस में आने से 2 सीटों पर समीकरण बदल गए हैं।
नई संभावना तलाश रहे विधायक
भाजपा हो या कांग्रेस दलबदल कराने वाले दलों ने विधायकों को अपने पाले में लाने के लिए टिकट का भरोसा दिलाया होगा। साफ है कि चुनाव से पहले पाला बदलने वाले विधायक खुद की नए सिरे से संभावना तलाश रहे होंगे। इसमें अपने समर्थकों के अलावा पार्टी के कैडर वोट भी हैं। जिनका चुनाव में साथ मिलना जरुरी है। हालांकि पार्टी अपने कार्यकर्ताओ को किस तरह से समझाती है। या यूं कहें कि डेमेज कंट्रोल कैसे करती है। यह देखना दिलचस्प होगा।












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