उत्तराखंड में कैसे हुई एक दलित महिला भोजनमाता रूढ़िवादिता का शिकार, जानिए क्या है पूरा मामला
उत्तराखंड के चंपावत जिले में सूखीढांग जीआईसी में एक दलित महिला के भोजनमाता नियुक्त होने के बाद स्कूल में सामान्य वर्ग के छात्रों ने भोजन करने से किया इनकार
देहरादून, 1 जनवरीा एक तरफ जहां समाज में महिलाओं और पिछड़ों को समानता का अधिकार दिलाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ आज के आधुनिक युग में भी कई महिलाओं और पिछड़ों को सामाजिक रुढ़ीवादी का शिकार होना पड़ रहा है। इसी तरह की एक घटना हाल ही में उत्तराखंड के चंपावत जिले में सूखीढांग जीआईसी में सामने आया है। जिसमें एक दलित महिला के भोजनमाता नियुक्त होने के बाद स्कूल में सामान्य वर्ग के छात्रों ने भोजन करने से इनकार कर दिया था। हालांकि अब मामले को सुलझाने का दावा किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि एससी वर्ग की सुनीता देवी ही अब भोजन माता होंगी।

सर्वसम्मति से सुनीता भोजन माता के रूप में नियुक्त
स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावक-शिक्षक संघ की बैठक में सर्वसम्मति से सुनीता को भोजन माता के रूप में नियुक्त कर दिया गया। दावा है कि शीतकालीन अवकाश के बाद 15 जनवरी से विद्यालय खुलने पर वह काम शुरू कर देंगी। नियुक्ति प्रक्रिया विवाद खत्म होने के बाद चल्थी पुलिस ने पूर्व में दी गई सुनीता की तहरीर पर बीडीसी दीपा जोशी व पीटीए अध्यक्ष नरेंद्र जोशी सहित छह के खिलाफ जातिसूचक शब्द कहने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है विवाद
स्कूल में 28 अक्टूबर को प्रधानाचार्य ने नई भोजनमाता की नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की। 25 नवंबर को सामान्य वर्ग के अभिभावकों ने पुष्पा भट्ट के नाम का प्रस्ताव किया। लेकिन एससी अभिभावक सुनीता के पक्ष में खड़े हो गए। चार दिसंबर को प्रधानाचार्य ने फिर बैठक बुलाई, जिसमें सामान्य वर्ग के अभिभावक शामिल नहीं हुए। इसपर सुनीता को भोजन माता के रूप में नियुक्त कर लिया गया। सुनीता ने भोजन बनाना शुरू किया तो सामान्य वर्ग के बच्चों ने उसे खाने से ही इन्कार कर दिया। सभी घर से टिफिन लेकर आने लगे। भोजनमाता सुनीता देवी ने भोजनमाता विवाद के दौरान अभद्रता और जातीय भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए चल्थी चौकी में तहरीर दी थी। जिसके बाद क्षेत्र पंचायत सदस्य और स्कूल प्रबंध समिति सदस्य सहित छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इधर सीईओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति ने डीएम को मामले की जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक भोजनमाता नियुक्ति प्रक्रिया में खामी नहीं पाई गई, सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
दिल्ली तक पहुंचा मामला
सूखीढांग जीआईसी में दूसरी भोजनमाता की नियुक्ति के लिए दो बार बैठक हुई। 15 नवंबर को हुई पहली बैठक में 11 आवेदन आए। पुष्पा भट्ट और सुनीता देवी के नाम में खींचतान रही। नियुक्ति के लिए चार दिसंबर को हुई दूसरी बैठक में चयन समिति ने सुनीता देवी का चयन किया। इसके विरोध में एक जाति विशेष के छात्र-छात्राओं ने भोजन नहीं खाया। विरोधस्वरूप 24 दिसंबर को दूसरी जाति के छात्रों ने पहले से तैनात सवर्ण भोजनमाता का बनाया खाना खाने से इंकार कर दिया। इधर चुनावी साल में इस मुद्दे पर जमकर राजनीति शुरू हो गई। उत्तराखंड के सियासी दल ने भले ही इस मामले को तूल न दिया हो लेकिन दिल्ली सरकार ने भोजनमाता को नौकरी देने का वादा कर दिया। जिसके बाद उत्तराखंड में भी सियासत गर्मा गई। राइंका सूखीढांग में भोजनमाता नियुक्ति के विवाद का संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीआईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने स्कूल में जाकर विवाद की जानकारी भी जुटाई।












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