HOLI 2024: एक दिन का नहीं एक महिनें का होल्यार और मस्ती, कुमाऊं में होली है खास त्यौ​हार, जानिए कैसे

होली का नाम सामने आते ही रंग, ​होल्यार, मस्ती और गुजिया के साथ ही खाने पीने की चीजों का ख्याल आने लगता है। उत्तराखंड में होली सिर्फ एक दिन का त्यौहार नहीं है। ये एक माह तक चलने वाला पूरा त्यौहार है।

HOLI 2024 Holi fun for one day but one month Holi is a special festival in Kumaon know how

तीन तरीके की होली
उत्तराखंड के कुमाऊं में होली का त्यौहार एक माह तक मनाया जाता है। कुमाऊं में होली तीन तरीके से मनाई जाती है। बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली। जो कि सिर्फ रंगों के साथ ही नहीं खेली जाती।

बसंत ऋतु के साथ ही शुरू
कुमाऊं में होली गायन, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए खेली जाती है। जो कि रंग के अलावा प्रकृति के बदलाव का भी स्वागत करती है। होली आते ही मौसम में गरमी का एहसास होने लगता है। जो कि बसंत ऋतु के साथ ही शुरू हो जाती है।

बैठकी,खड़ी और महिला होली
कुमाऊंनी होली का अपना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व है। होली का त्यौहार कुमाऊं में बसंत पंचमी के दिन से ही शुरू हो जाता है। कुमाऊंनी बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली के रुप में मनाते हैं।​ रंग के अलावा गीत, संगीत, नृत्य के साथ घर-घर जाकर एक दूसरे को बधाई देते हैं।

अंग्रेजों के जमाने में भी कुमाऊं में होली
वरिष्ठ पत्रकार डॉ अजय ढ़ोडियाल बताते हैं कि अंग्रेजों के जमाने में भी कुमाऊं में होली का गायन होता रहा। 1850 से होली की बैठकें नियमित होने लगीं और 1870 से इसे वार्षिक समारोह के रूप में मनाया जाने लगा। राजा कल्याण चंद्र के समय दरबारी गायकों के भी संकेत मिलते हैं। डॉ अजय बताते हैं कि होली में फाग यहां की विशेषता है।

गीत सबसे ज्यादा गुनगुनाए जाते
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में अल्मोड़ा, नैनीताल,पिथौरागढ़, चम्पावत और बागेश्वर जिले आते हैं। जहां होली खास तरह से मनाई जाती है। खासकर भगवान को याद भी करते हुए एक दूसरे को बधाई दी जाती है। डॉ अजय ने बताया कि होली पर जो गीत सबसे ज्यादा गुनगुनाए जाते हैं। ठाडी भरूं राजा राम जी देखें बैठी भरूं भीजे चुनरी जल कैसे...जैसे गीत गाए जाते हैं।

बैठकी होली- मुख्य रूप से अल्मोड़ा और नैनीताल में ही मनाई जाती रही है। बैठकी होली बसंत पंचमी के दिन से शुरू हो जाती है, और इस में होली पर आधारित गीत घर की बैठक में राग रागनियों के साथ हारमोनियम और तबले पर गाए जाते हैं। कुमाऊं के प्रसिद्द जनकवि गिरीश गिर्दा ने बैठकी होली के सामाजिक शास्त्रीय संदर्भों के बारे में गहराई से अध्ययन किया है, और इस पर इस्लामी संस्कृति और उर्दू का असर भी माना है।

खड़ी होली-बैठकी होली के कुछ दिनों बाद खड़ी होली शुरू होती है। जो कि कुमाऊं के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है। खड़ी होली में गांव के लोग टोपी, कुर्ता और चूड़ीदार पायजामा पहन कर एक जगह एकत्रित होकर होली गीत गाते हैं, और साथ साथ ही ढोल-दमाऊ तथा हुड़के की धुनों पर नाचते भी हैं। खड़ी होली के गीत कुमाऊंनी भाषा में होते हैं। होली गाने वाले लोगों को होल्यार कहते हैं, जो कि बारी बारी गांव के प्रत्येक व्यक्ति के घर जाकर होली गाते हैं, और उसकी समृद्धि की कामना करते हैं।

महिला होली-महिला होली में प्रत्येक शाम बैठकी होली जैसी ही बैठकें लगती हैं, जिसमें​सिर्फ महिलाएं ही भाग लेती हैं। इसके गीत भी महिलाओं पर ही आधारित होते हैं।

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