पूर्व सीएम हरीश रावत ने क्यों हाईकमान से की विनती और किस बात के लिए मांगी आज्ञा,जानिए पूरा मामला

पूर्व सीएम हरीश रावत ने पंजाब प्रभारी से मुक्‍त करने की करी मांग

देहरादून, 20 अक्टूबर। उत्तराखंड में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक बार फिर हाईकमान से पंजाब प्रभारी पद से मुक्त करने की मांग की है। हरीश रावत ने चुनाव को देखते हुए पूरा समय उत्तराखंड में देने के लिए पंजाब प्रभारी से मुक्त होने की बात की है। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिरकार कांग्रेस हाईकमान हरीश रावत के कई बार अपील करने के बाद भी पंजाब में नए प्रभारी की नियुक्ति क्यों नहीं कर पा रहे हैं।

बदलते समीकरणों से हरदा परेशान

बदलते समीकरणों से हरदा परेशान

कांग्रेस पार्टी में पंजाब से लेकर उत्तराखंड तक आए दिन समीकरण बदलते जा रहे हैं। जिसमें दोनों जगह हरीश रावत ही केन्द्र बने हुए हैं। पंजाब में बतौर प्रदेश प्रभारी और उत्तराखंड में चुनाव अभियान की कमान संभालने की हरीश रावत के सामने लगातार चुनौती बनी हुई है। इस बीच बागियों और पूर्व कांग्रेसियों की घर वापसी को लेकर भी आए दिन कयास लगाए जा रहे हैं।​ जिसमें हरीश रावत की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में पंजाब और उत्तराखंड दोनों राज्यों में समय दे पाना हरीश रावत के लिए आसान नहीं है। हरीश रावत इसी वजह से कई बार हाईकमान से विनती कर चुके हैं। लेकिन हाईकमान हरीश रावत को जिम्मेदारी से मु​क्त नहीं कर रही है। इसके पीछे हरीश रावत का अब तक के प्रकरण में अपनी अहम भूमिका निभाना और पंजाब के मुद्दों पर पार्टी की किरकिरी से बचाना भी माना जा रहा है।

हाईकमान नहीं ले पा रहा निर्णय

हाईकमान नहीं ले पा रहा निर्णय

पूर्व सीएम हरीश रावत के पंजाब प्रभारी से मुक्त करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। कांग्रेसी सूत्र हरीश रावत की जगह हरीश चौधरी को जिम्मेदारी देने का दावा भी कर रहे हैं। लेकिन पार्टी हाईकमान की और से अब तक कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जा सका है। बार-बार विनती करने के बाद भी हाईकमान हरीश रावत को उत्तराखंड की राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय नहीं होने दे रहे हैं। हरीश रावत को इससे अपने उत्तराखंड की राजनीति में सक्रियता के नुकसान की भी आशंका है। ऐसे में हरीश रावत लगातार हाईकमान से पंजाब प्रभारी से मुक्त करने की अपील कर रहे हैं। इधर हरीश रावत को उत्तराखंड की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह की सक्रियता से भी राजनीतिक नुकसान होने का डर सता रहा है। जिस वजह से हरीश रावत उत्तराखंड पर ही फोकस करना चाहते हैं।

हरदा ने सोशल मीडिया में रखा अपना पक्ष

हरदा ने सोशल मीडिया में रखा अपना पक्ष

हरीश रावत ने फेसबुक पर पोस्ट किया है कि मैं आज एक बड़ी उपापोह से उबर पाया हूं। एक तरफ जन्मभूमि के लिए मेरा कर्तव्य है और दूसरी तरफ कर्म भूमि पंजाब के लिए मेरी सेवाएं हैं, स्थितियां जटिलत्तर होती जा रही हैं। क्योंकि ज्यौं-ज्यौं चुनाव आएंगे, दोनों जगह व्यक्ति को पूर्ण समय देना पड़ेगा। कल उत्तराखंड में बेमौसम बारिश ने जो कहर ढाया है, मैं कुछ स्थानों पर जा पाया लेकिन आंसू पोछने मैं सब जगह जाना चाहता था। मगर कर्तव्य पुकार, मुझसे कुछ और अपेक्षाएं लेकर के खड़ी हुई। रावत ने कहा है कि मैं जन्मभूमि के साथ न्याय करूं तभी कर्मभूमि के साथ भी न्याय कर पाऊंगा। वे आगे लिखते हैं कि पंजाब कांग्रेस और पंजाब के लोगों का बहुत आभारी हूंं कि उन्होंने मुझे निरंतर आशीर्वाद और नैतिक समर्थन दिया। संतों, गुरुओं की भूमि, नानक देव जी व गुरु गोविंद सिंह जी की भूमि से मेरा गहरा भावात्मक लगाव है। मैंने निश्चय किया है कि, लीडरशिप से प्रार्थना करूं कि अगले कुछ महीने में उत्तराखंड को पूर्ण रूप से समर्पित रह सकूं। इसलिए पंजाब में जो मेरा वर्तमान दायित्व है, उस दायित्व से मुझे अवमुक्त कर दिया जाय। आज्ञा पार्टी नेतृत्व की, विनती हरीश रावत की।

https://hindi.oneindia.com/news/uttarakhand/pressure-politics-of-pritam-harak-and-kau-in-uttarakhand-this-is-the-reason-644668.html
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