पंजाब की टेंशन से हरीश रावत का नहीं छूट रहा पीछा, अब इस नए 'झमेले' में फंसे

पंजाब की टेंशन से हरीश रावत का नहीं छूट रहा पीछा, अब हरदा ने रखे तथ्‍य

देहरादून, 5 अक्टूबर। पंजाब प्रभारी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने कैप्टन अमरिंदर के कांग्रेस हाईकमान और बतौर प्रभारी उन पर लगे सभी आरोपों का जबाव देते हुए अमरिंदर के शासनकाल में हुई गलतियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हरीश रावत ने पंजाब प्रभारी के नाते खुद की इमेज को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। हरीश रावत पंजाब प्रकरण को लेकर खुद पर लगे आरोपों को प्रभारी पद से मुक्त होने से पहले सभी विवादों को खत्म करना चाहते हैं। ऐसे में हरीश रावत ने एक बार फिर पंजाब प्रकरण पर सारे तथ्यों को सामने रखा है।

अमरिंदर को पार्टी ने दिए स्थिति सुधारने के मौके

अमरिंदर को पार्टी ने दिए स्थिति सुधारने के मौके

हरीश रावत ने कैप्टन के आरोपों पर जबाव देते हुए कहा है कि यह कहना अन्यायपूर्ण है कि पार्टी नेतृत्व अमरिंदर सिंह के विरुद्ध था। उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह को स्थिति सुधारने के लिए बहुत बार कहा गया, मैंने खुद उनसे 6 बार विस्तृत चर्चा की और उत्पन्न हो रहे हालात से अवगत कराया। मैंने उनको मंत्री और विधायकों में व्याप्त बेचैनी से भी अवगत कराया, उन्हें संबंधित लोगों से बात कर समाधान ढूंढने का आग्रह भी किया। हरीश रावत ने कहा है कि पार्टी द्वारा अपमानित किए जाने की बात, अमरेंद्र सिंह की अमित शाह से हुई भेंट के बाद उठी है। हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए अमरिंदर के आरोपों को जबाव दिया है, हरीश रावत ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा बार-बार मुझे अपमा​नित किया गया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस विधानमंडल दल के सदस्यों द्वारा सशक्त तरीके से बहुमत सदस्यों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र के माध्यम से सीएलपी मीटिंग बुलाए जाने की मांग के बाद हमारे पास बैठक बुलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। बैठक बुलाने के निर्णय लेने से पहले विधायकों की मांग के विषय में मैंने कई बार बात करने का प्रयास किया। बैठक बुलाने का निर्णय करने के बाद भी मैंने माननीय मुख्यमंत्री से बात करने का प्रयास किया। बैठक के लिए चंडीगढ़ पहुंचने वाले दिन भी मैंने सीधे मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा जो मुझे नहीं मिला।

​हरीश रावत ने बताया अमरिंदर ने क्यों दिया इस्तीफा

​हरीश रावत ने बताया अमरिंदर ने क्यों दिया इस्तीफा

हरीश रावत ने अमरिंदर के इस्तीफे को लेकर कहा कि उन्हें इस तथ्य की जानकारी हो चुकी थी कि मुख्यमंत्री 4 बजे, गवर्नर से मिलने जा रहे हैं। हरीश रावत ने कहा कि अमरिंदर सिंह ने अपने निश्चय के संबंध में कांग्रेस अध्यक्षा को भी बता चुके थे। ऐसा निर्णय लेने के लिए उनको कोई सुझाव भी नहीं दिया गया था। हरीश रावत ने कहा कि अमरिंदर सिंह जानते थे कि बैठक में विधायकगण उनसे गुरुग्रंथ साहब की बेअदबी के प्रसंगों, सफेद पोश ड्रग्स, माफिया के खिलाफ कार्यवाही न किए जाने, पंजाब के हित के विरुद्ध किये गये पावर परचेज एग्रीमेंट व बादलों के बस परमिटों के कैंसिलेशन, कैप्टन प्रशासन व बादलों के मध्य सांठ-गांठ से जुड़े सवालों को उठा सकते हैं। उन्होंने इन सवालों से बचने के लिए विधायकों की बैठक में न जाने और बैठक से पहले त्यागपत्र देने का फैसला किया।

हाईकमान ने भी की थी कोशिश

हाईकमान ने भी की थी कोशिश

हरीश रावत ने हाईकमान की और से की गई कोशिशों का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर हो रही उथल-पुथल को देखते हुए पार्टी ने मलिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में 3 सदस्यीय पैनल का गठन किया। पैनल द्वारा 150 से ज्यादा विधायकों, सांसदों, पूर्व विधायकों व पूर्व सांसदों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से बात की गई, जिनमें पीसीसी अध्यक्ष और कैप्टन अमरेंद्र सिंह भी सम्मिलित थे। पैनल के सम्मुख अधिकांश विधायकों ने प्रशासन पर अकाली दल प्रस्त होने और उनकी उपेक्षा करने की बात कही गई। बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह के बदले जाने की बात भी कही गई। पैनल व पार्टी ने 18 सूत्र कैप्टन अमरिंदर सिंह से वार्ता कर तय किये और स्थिति को सुधारने व उन पर अमल करने के लिए अमरिंदर सिंह को कहा गया। लंबे समय तक कार्रवाई की सूचना न मिलने पर पार्टी नेतृत्व द्वारा पैनल से पुनः कैप्टन अमरिंदर सिंह से बात करने के लिए कहा गया। एक समयबद्ध क्रियान्वयन का आश्वासन देने के बाद भी कैप्टन साहब ने सुझावों के ऊपर कोई अमल नहीं किया।

अमरिंदर को हटाने के लिए बन रहा था दबाव

अमरिंदर को हटाने के लिए बन रहा था दबाव

हरीश रावत ने एक बार फिर अमरिंदर सिंंह पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। हरीश रावत ने कहा कि चुनाव नजदीक आने से विधायकों व मंत्रियों द्वारा लगातार परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अंतिम प्रयास के रूप में मैं स्वयं चंडीगढ़ गया और मुख्यमंत्री से 18 में से 5 मुद्दों पर समयबद्ध कार्यवाही का आश्वासन लिया। समयावधि बीतने के काफी समय बाद विधायकों के एक बड़े हिस्से द्वारा विधानमंडल दल की बैठक बुलाने की मांग की गई। इन विधायकों का स्पष्ट मानना था कि कैप्टन पार्टी की जीत नहीं चाहते? उन्हें शंका थी कि कैप्टन, अकाली नेताओं से मिले हैं और भाजपा के दबाव में हैं। हमारे सम्मुख विधायकों के आग्रह को मानने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं था।

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