Harish rawat की हार के बाद कांग्रेस को नसीहत, मोदी-योगी-धामी नरेटिव को लेकर कह दी बड़ी बात,जानिए सियासी मायने
Harish rawat news: केदारनाथ उपचुनाव में कांग्रेस की हार के बाद अब पूर्व सीएम हरीश रावत अपनी ही पार्टी को नसीहत दे रहे हैं। हरीश रावत का कहना है कि मोदी योगी धामी नरेटिव के खिलाफ अपना नरेटिव खड़ा करना होगा। हरीश रावत ने केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में हार की वजह का जिक्र करते हुए पहले भी मीडिया में मोदी,योगी और धामी समीकरण का जिक्र किया। जिसके बाद से कांग्रेस खुद बेकफुट में है।
हरीश रावत ने कहा कि मेरी विफलता यह रही है कि शायद मैं उत्तराखंड वालों को तो समझा पा रहा हूं, मगर अपनी पार्टी के लोगों को नहीं समझ पा रहा हूं कि जो मोदी, धामी, योगी नरेटिव है, उसके खिलाफ यही नरेटिव है जिस नरेटिव को आगे बढ़ाकर के हम अपने को बचा सकते हैं।

हरीश रावत का कहना है कि उन्होंने इस खतरे को 2016 में महसूस किया। जब उनकी सरकार को गिराने की कोशिश की गई। इसीलिए उसके विकल्प के रूप में उत्तराखंडियत स्लोगन विकसित किया गया। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा है कि हिंदुत्व की प्रचंड आंधी के खिलाफ 34% उत्तराखंड का मतदाता हमारे साथ खड़ा रहा, हमारी उस सोच के साथ खड़ा रहा और 2022 तक खड़ा रहा। लेकिन दिक्कत यह है हम अपनी सोच के साथ हम खुद खड़े हैं या नहीं हैं, यह कांग्रेस को सोचना पड़ेगा।
हरीश रावत ने कांग्रेस को नसीहत देते हुआ कहा है कि नरेटिव के खिलाफ अपना नरेटिव खड़ा करना पड़ेगा। यहां पर हरीश रावत ने मीडिया से बातचीत में बंटोगे तो कटोगे के नारे और हिंदुत्व को लेकर भाजपा की कार्यशैली को लेकर जबाव भी दिया है। हरदा का मानना है कि जब आप धर्म और राम को एक साथ खड़ा कर देंगे, तो आप दिक्कत में आएंगे। मैं तो रोज सुबह राम का जाप करता हूं, मेरी योगा की क्रिया का हिस्सा है राम। लेकिन उन्होंने राम को धार्मिक उन्माद के साथ जोड़ दिया है तो हमको कहीं न कहीं अपनी धार्मिकता को उत्तराखंडयित के चारों तरफ जोड़कर के लाना पड़ेगा, उसके लिए हमारे गोलज्यू हैं और हमारे दूसरे देवता हैं, हमें अपनी संस्कृति को उत्तराखंडियत के साथ जोड़ना पड़ेगा।
कहा कि यदि हम 2017 में ही बिल्कुल सफाया हो जाता हमारे वोटों का, जिस तरीके से यूकेडी और अन्य पार्टियों का वोट सारा भाजपा के साथ चला गया, लेकिन हम अपने वोट को रिटेन कर पाए क्योंकि हमने उत्तराखंड के अपने सरोकारों का एक पैरेलल नरेटिव क्रिएट किया, 2022 तक मैंने उस नरेटिव को जिंदा रखने का प्रयास किया। अब जिनके हाथ में बागडोर सौंप रखी है चतुर्भुज नेतृत्व के या तो वह मिलकर के कोई अपना नरेटिव तैयार करें।
कहना है कि "बटोगे तो कटोगे नरेटिव" से संविधान को भी डर है और भारत को भी डर है। यह नारा बड़ा विस्फोटक और घातक हो सकता है। यदि उसके खिलाफ कोई खड़ा हो सकता है तो वह है हमारी संस्कृति, हमारे सरोकार, हमारी परंपराएं, हमारी धरती, हमारी मिट्टी आदि से बना हुआ जो है हमारा उत्तराखण्डियत नरेटिव हो सकता है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि मेरा नरेटिव मानो। मैं अपने कांग्रेस के मित्रों से कह रहा हूं कि यदि कोई दूसरा नरेटिव है तो आप उसको गढ़ो, क्योंकि उनके नरेटिव का जवाब आपको खड़ा करना पड़ेगा।












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