हरीश, हरक और रणजीत, जानिए कैसे ये तीन रावत चेहरे हुए कांग्रेस के लिए जरुरी, जिनकी वजह से फंसे हैं टिकट

हरीश, हरक और रणजीत रावत के टिकटों पर चल रहा मंथन

देहरादून, 24 जनवरी। उत्तराखंड में कांग्रेस ने अब तक 53 सीटों पर ही प्रत्याशियों का ऐलान किया ​है। अब 17 सीटों पर कांग्रेस के लिए प्रत्याशियों का चयन कर सबसे बड़ी महाभारत हो रही है। जिन सीटों पर कांग्रेस अब तक प्रत्याशियों के नाम पर मुहर नहीं लगा पाई हैं, उन सीटों पर कांग्रेस के 3 सबसे बड़े रावत चेहरे शामिल हैं। कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत के चुनाव लड़ने को लेकर कांग्रेस हाईकमान फैसला नहीं ले पा रही है।

हरीश और रणजीत में सबसे ज्यादा परेशानी

हरीश और रणजीत में सबसे ज्यादा परेशानी

सबसे ज्यादा परेशानी कांग्रेस के लिए हरीश रावत और रणजीत रावत के बीच के ठकराव को रोकना है। हरीश रावत और रणजीत रावत दोनों रामनगर सीट से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए किसी एक को टिकट देना दूसरे खेमे के लिए बगावती सुर तेज करने का मौका देना है। हरीश रावत और रणजीत रावत के लिए टिकट का फाइनल न होने की वजह से कांग्रेस ने अब तक रामनगर और सल्ट सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है। कांग्रेसी सूत्रों का दावा है कि हाईकमान हरीश रावत को रामनगर और रणजीत रावत को सल्ट से चुनाव मैदान में उतारना चाहता है। लेकिन रणजीत रावत समर्थक रामनगर से ही चुनाव लड़वाना चाहते हैं। जिस वजह से मुहर नहीं लग पा रही है।

हरक को महाराज के खिलाफ उतार सकती है कांग्रेस

हरक को महाराज के खिलाफ उतार सकती है कांग्रेस

अब बात कांग्रेस के तीसरे और सबसे कद्दावर हरक सिंह रावत की। हरक सिंह रावत के इस बार चौबट्टाखाल सीट से चुनाव मैदान में आने की चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेसी सूत्रों का दावा है कि हरक सिंह को चौबट्टाखाल सीट से चुनाव लड़ाने के लिए हाईकमान तैयार है। जिसके बाद इस सीट पर चुनाव सबसे रोमांचक होने की उम्मीद है। चौबट्टाखाल सीट से भाजपा के टिकट पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज दावेदार हैं। जो कि सिटिंग विधायक हैं। अगर हाईकमान ने हरक सिंह रावत को चौबट्टाखाल से चुनाव मैदान में उतार दिया तो महाराज का चुनाव सबसे मुश्किल में हो सकता है।

परिवारवाद पर भी फंसा पेंच

परिवारवाद पर भी फंसा पेंच

हरक सिंह के चुनाव लड़ने के बाद कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किल हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति गुंसाई को टिकट देना होगा। अनुकृति गुसांई को चुनाव लड़वाना ही हरक सिंह का भाजपा से विदाई का कारण बना। ऐसे में हरक सिंह रावत के लिए खुद से ज्यादा अनुकृति गुंसाई का टिकट पक्का होना जरुरी है। अनुकृति गुंसाई के लिए हरक सिंह ​ने लैंसडाउन सीट से दावेदारी की हुई है। कांग्रेस अनुृ​कृति को लैंसडाउन से उतारने पर विचार भी कर रही है। लेकिन अगर हाईकमान अनुकृति गुंसाई को भी टिकट देती है। तो फिर एक परिवार एक टिकट का फॉर्मूला किसी भी दावेदार पर नहीं लगेगा। इस स्थिति में कांग्रेस को पूर्व सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत को हरिद्वार की एक सीट और हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत को खानपुर सीट टिकट देने पर विचार करना होगा। ऐसे में अनुपमा रावत को कांग्रेस हरिद्वार की एक सीट दे सकती है। जो कि कांग्रेस के लिए सभी समीकरण साधने में आसानी हो सकती है। ये बात अलग है कि कांग्रेस को इस चुनाव में भी परिवारवाद के आरोपों का जवाब तैयार रखना होगा।

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