हरीश रावत के लिए सीट छोड़ने वाले हरीश धामी क्या अब सीएम धामी के लिए छोड़ेंगे सीट?
हरीश धामी के तेवर से इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
देहरादून, 13 अप्रैल। उत्तराखंड में भाजपा के लिए राह आसान और कांग्रेस के लिए मुश्किल होती जा रही है। कांग्रेस के धारचूला से विधायक हरीश धामी के तेवर से पार्टी को बड़ा झटका लगने के संकेत मिल रहे हैं। इतना ही नहीं हरीश धामी ने मुख्यमंत्री के लिए सीट छोड़ने से लेकर नई पार्टी के गठन का विकल्प रखकर कांग्रेस हाईकमान के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। जिससे आने वाले दिनों में कांग्रेस में टूट तय मानी जा रही है।

2014 में हरीश रावत के लिए छोड़ी थी सीट
2014 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए सीट छोड़ने वाले विधायक हरीश धामी अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सीट छोड़ सकते हैं। देहरादून पहुंचे हरीश धामी के तेवर से इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि वे अपनी जनता से राय मांगेंगे जनता का जो भी आदेश होगा उसी हिसाब से वे फैसला लेंगे। हरीश धामी के इस बयान से कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है। हरीश धामी ने खुलकर मीडिया के सामने हाईकमान के फैसले पर नाराजगी जताई है। धामी धारचूला सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

हाईकमान पर लगाए गंभीर आरोप
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ही उनके साथ उपेक्षा की है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की ओर से प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और विधायक दल के उपनेता की मेरिट के आधार पर नियुक्ति के बयान पर धामी ने कहा कि मेरिट के आधार पर यदि इन पदों पर नियुक्ति करनी थी तो वह सबसे उपयुक्त थे। उन्होंने कहा कि विधायक मयूख महर,मनोज तिवारी,राजेंद्र भंडारी, ममता राकेश सभी सीनियर हैं। धामी ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। धामी ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है कि उनके साथ उपेक्षा की गई हो। उन्होंने कहा कि 2017 के संगठन के चुनावों में उनकी उपेक्षा की जा चुकी है जबकि वह उस समय लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। वह सैनिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से हैं। उनके पिता ने 1971 की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने सवाल किया कि एक सैनिक का बेटा होने के बावजूद उनके साथ हर बार इस तरह का व्यवहार क्यों किया जाता है।

तो सीएम धामी की राह होगी आसान
नाराज धामी ने हालांकि अभी कोई पत्ते नहीं खोले लेकिन उन्होंने सभी विधायकों के साथ मिलकर बातचीत के बाद ही निर्णय लेने की बात की है। धामी ने अभी भाजपा में जाने की खबरों का भी खंडन किया और कहा कि वे नई पार्टी बनाकर भी जनता के लिए काम कर सकते हैं। धामी के तेवर से साफ है कि वे बड़ा फैसला लेने वाले हैं। इधर हरीश धामी के तेवर को लेकर नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि जो भी विधायक चुनकर आए हैं, वे कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव जीतकर आए हैंं, ऐसे में सभी विधायकों को पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करना चाहिए। इतना ही नहीं करन माहरा ने ऐसे विधायकों को सख्त तेवर भी दिखाए हैं। जिसके बाद साफ है कि कोई भी पक्ष झुकने वाला नहीं है। जिससे आने वाले दिनों में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ रही हैं। कांग्रेस के अंदर मचे घमासान पर भाजपा की पूरी निगाहें लगी हुई हैं। हरीश धामी और नाराज विधायकों की बैठक में जो भी फैसला होगा उससे भाजपा को फायदा होना तय है, साथ ही किसी तरह की टूट होने पर एक सीट मुख्यमंत्री के लिए भी खाली हो सकती है। जिससे भाजपा को अपने विधायकों को सीट छुड़वाने की जरुरत नहीं होगी।












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