Haridwar Makar Sankranti Snan 2026 आस्था का अभूतपूर्व सैलाब, रात से ही श्रद्धालु लगा रहे गंगा में डुबकी
Haridwar Makar Sankranti Snan 2026 मकर संक्रांति स्नान पर्व को लेकर हरिद्वार समेत पूरे उत्तराखंड में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब देखने को मिल रहा है। आधी रात से ही हरिद्वार, उत्तरकाशी, ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर समेत कई पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ स्नान के लिए जुटनी शुरू हो गई थी।
ब्रह्ममुहूर्त से पहले ही गंगा घाटों पर स्नान का सिलसिला लगातार जारी रहा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज रात्रि संक्रांति का संक्रमण काल है, जबकि पुण्य काल कल पूरे दिन रहेगा, इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु 15 जनवरी को भी मकर संक्रांति का पर्व मनाएंगे।

करीब 23 वर्षों बाद बने दुर्लभ संयोग में इस बार मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही तिथि पर पड़ रही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में विशेष पुण्य फल देने वाला बताया जा रहा है। स्नान पर्व को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है, मेला क्षेत्र को 8 जोन और 22 सेक्टर में विभाजित कर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। हरकी पैड़ी सहित सभी प्रमुख घाटों पर भारी पुलिस बल तैनात है, वहीं सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की पल-पल की निगरानी की जा रही है।
देवप्रयाग में श्रद्धालुओं ने गंगा और अलकनंदा के पवित्र संगम पर तड़के सुबह से ही स्नान के लिए पहुंचने लगे। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन संगम में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इसी आस्था के चलते उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवप्रयाग आते हैं।
श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर संगम में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा, मंदिरों में भजन-कीर्तन होते रहे और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।
सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते ही कुमाऊँ की काशी बागेश्वर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने सरयू-गोमती के संगम तट पर माघी स्नान कर बाबा बागनाथ के दर्शन किए। स्नान के लिए सैकड़ों श्रद्धालु मंगलवार की रात्रि में ही बागेश्वर पहुँच गए थे। रातभर श्रद्धालुओं ने झोड़ा-चांचरी गाकर और अलाव तापकर समय बिताया। भोर होते ही संगम तट पर स्नान कर श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया, सरयू पूजन किया और बागनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की।












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