हरक सिंह ने त्रिवेंद्र सिंह के राजनीतिक अनुभव को बताया खुद से कम, कहीं असली वजह ये तो नहीं

हरक बोले,त्रिवेंद्र सिंह रावत का राजनीतिक अनुभव उनसे कम

देहरादून, 12 जनवरी। उत्तराखंड भाजपा में जैसे-जैसे टिकटों को लेकर काउंडाउन शुरू हो रहा है। वैसे-वैसे दिग्गज नेता हाईकमान पर अपना दवाब बनाने में जुटे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा हरक सिंह रावत को लेकर है। जो कि कोटद्वार की जगह दूसरी सीट तलाश रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हरक सिंह ने जिन 3 सीटों का विकल्प दिया है, उनमें डोईवाला उनकी पहली पसंद है। ऐसे में वे इस सीट पर वर्तमान विधायक और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को लगातार टारगेट कर रहे हैं। अब उन्होंने त्रिवेंद्र सिंह रावत के राजनीतिक अनुभव को खुद से कम बताया है।

बयानवीरों में सबसे आगे हैं हरक सिंह

बयानवीरों में सबसे आगे हैं हरक सिंह

उत्तराखंड में बयानवीरों की पंक्ति में अग्रणी नंबर पर आने वाले हरक सिंह रावत हमेशा अपने बयानों से सुर्खियां बटारते रहते हैं। इस बार उन्होंने पूर्व ​मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर एक नया बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उम्र में भले त्रिवेंद्र सिंह रावत मुझसे बड़े हों लेकिन राजनीतिक अनुभव में वे मुझसे बहुत पीछे हैं और संघ की पृष्ठभूमि में भी त्रिवेंद्र का कोई ज्यादा बड़ा नाम नहीं है। इतना ही नहीं हरक सिंह ने कहा कि 1981 में प्रदर्शन के दौरान त्रिवेंद्र से मुलाकात हुई उनके साथ केवल 4 लोग थे। ये पहली बार नहीं जब हरक सिंह ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर बयान दिया है। इससे पहले कई बार वे त्रिवेंद्र सिंह पर सीधे हमले भी कर चुके हैं। जिससे कई बार पार्टी को भी असहज होना पड़ा है। लेकिन इस बार हरक सिंह के त्रिवेंद्र को निशाना बनाने के पीछे डोईवाला सीट कारण मानी जा रही है।

डोईवाला से चुनाव लड़ना चाहते हैं हरक

डोईवाला से चुनाव लड़ना चाहते हैं हरक

​हरक सिंह रावत ने इस बार कोटद्वार सीट से चुनाव न लड़ने को हाईकमान को इच्छा बता दी है। जिसके विकल्प के तौर पर हरक सिंह ने लैंसडाउन, डोईवाला और केदारनाथ सीट का विकल्प दिया है। लैंसडाउन से हरक सिंह अपनी बहू अनुकृति गुसांई को टिकट दिलाना चाहते हैं। ऐसे में उनका पूरा जोर डोईवाला सीट पर आकर टिक रहा है। लेकिन इस सीट पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिहं रावत सिटिंग विधायक है। जिनका टिकट काटना भाजपा के लिए आसान नहीं है। ऐसे में हरक सिंह त्रिवेंद्र को किसी न किसी कारण से टारगेट कर रहे हैं।

जब सीएम थे त्रिवेंद्र तब हुआ था हरक का विवाद

जब सीएम थे त्रिवेंद्र तब हुआ था हरक का विवाद

हरक सिंह और त्रिवेंद्र सिंह के बीच विवाद कर्मकार बोर्ड में नियुक्तियों और कामकाज की शैली को लेकर शुरू हुआ। मुख्यमंत्री से हटने के बाद त्रिवेंद्र को हरक सिंह ने कई बार निशाने पर लिया। हरक सिंह ने ढैंचा बीज मामले को लेकर त्रिवेंद्र को घेरने की कोशिश कर चुके हैं। हरक ने कहा कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की बात मानते तो त्रिवेंद्र सिंह रावत पर मुकदमा दर्ज हो जाता, तब वह मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। हरक ने कहा कि उन्होंने त्रिवेंद्र सिंह रावत का हमेशा साथ दिया, लेकिन हरीश रावत को समझना बहुत मुश्किल है, हरीश रावत आज त्रिवेंद्र की तारीफ कर रहे हैं। हरक सिंह के इस खुलासे पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सभी जानते हैं कि हरक सिंह ने हमारा कैसा हित किया। वह हमारे परम हितैषी हैं। वह जो भी कह रहे होंगे, सही कह रहे होंगे। ये मामला यहीं नहीं रुका पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बगैर नाम लिए हरक पर तंज कसते हुए कहा कि गधा ढैंचा-ढैंचा करता है। एक अन्य बयान में त्रिवेंद्र ने और ज्यादा तीखा हमला बोला। उन्होंने कटाक्ष किया कि उनका (हरक सिंह रावत) चरित्र बहुत उज्ज्वल रहा है, सारी दुनिया जानती है। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरक सिंह रावत के रिश्तों में तल्खी बढ़ती चली गई। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुलाकात पर हरक सिंह रावत ने दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की भेंट पर तंज किया कि इस्तेमाल बारूद से धमाके की उम्मीद नहीं की जा सकती।

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