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केदारनाथ के गर्भगृह की दीवारों पर चढ़ेगी सोने की परत, तीर्थ पुरोहितों ने दी आंदोलन की चेतावनी

केदारनाथ के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाई जाएगी

देहरादून, 15 सितंबर। केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाई जाएगी। बदरीनाथ.केदारनाथ मंदिर समिति ने इसको लेकर कार्य शुरू करवा दिया है। लेकिन तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया है। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि मंदिर की दीवारों पर जगह.जगह ड्रील से छेद किए जा रहे हैं जो धार्मिक रूप से अनुचित है। उन्होंने जल्द कार्य बंद नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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2017 में गर्भगृह की दीवारों पर चांदी की परत चढ़ाई

केदारनाथ मंदिर को भव्य बनाने की दिशा में मंदिर समिति ने पहल की है। इसके लिए एक दानदाता ने मंदिर में सोने की परत का काम कराने का अनुरोध किया था। जिस पर बद्री केदार मंदिर समिति ने शासन से इसकी परमिशन ली। अब परमिशन मिलने के बाद काम शुरू कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 2017 में एक दानीदाता के सहयोग से बीकेटीसी ने गर्भगृह की दीवारों पर चांदी की परत चढ़ाई थी। दो क्विंटल और तीस किलोग्राम से अधिक चांदी से गर्भगृह की जलेरी, छत्र को भी चांदी से सजाया गया था। लगभग तीन वर्ष पूर्व केदारनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर भी अलग से चांदी का दरवाजा लगाया गया है। अब केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की दीवारों से चांदी की परतें निकाल दी गई है। अब गर्भगृह की दीवारों, जलेरी और खंभों में सोने की परत लगाई जाएगी। यह कार्य अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा। सोने की जो परतें लगाई जाएंगी वह लेमिनेट होंगी जिनकी चमक कम नहीं होगी और इन्हें आसानी से पानी से भी धोया जा सकेगा।

परंपराओं और मान्यताओं को दरकिनार कर कई कार्य किए जा रहे

तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया है। केदारनाथ के तीर्थपुरोहितों का कहना है कि केदारनाथ में परंपराओं और मान्यताओं को दरकिनार कर वहां कई कार्य किए जा रहे हैं जो गलत है। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि केदारनाथ मंदिर पांडवकालीन है जिसका पुनरोद्धार आदिगुरु शंकराचार्य ने किया था लेकिन अब पुनर्निर्माण के नाम पर परंपराओं को दरकिनार किया जा रहा है। पहले गर्भगृह की दीवारों को चांदी से मढ़ा गया और अब सोने की परत चढ़ाई जा रही है। इसके लिए मंदिर की दीवारों पर जगह-जगह मशीनों से छेद किया जा रहा है। मंदिर में मनमर्जी के कार्य किए जा रहे हैं जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इधर मंदिर समिति नाराज तीर्थ पुरोहितों को मनाने में जुटी है।

केदारनाथ धाम में ही यात्रियों को गर्भ गृह के दर्शन करने की अनु​मति

चारों धाम में केदारनाथ धाम में ही यात्रियों को गर्भ गृह के दर्शन करने की अनु​मति होती है। जबकि बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में श्रद्धालु बाहर से ही दर्शन करते हैं। केदारनाथ मन्दिर उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में है। केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया। यह मन्दिर एक छह फीट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मन्दिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नन्दी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मन्दिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है, कहा जाता है कि इस मन्दिर का जीर्णोद्धार आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था।

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