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उत्तराखंड चुनाव में पंजाबी तड़का लगा रहे पूर्व सीएम हरीश रावत, समझिए इसके पीछे की रणनीति

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देहरादून, 23 अक्टूबर। पूर्व सीएम हरीश रावत की हाईकमान ने मांग पूरी करते हुए पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है। जिसके बाद अब हरीश रावत पूरी तरह से उत्तराखंड पर फोकस करने में जुट गए हैं। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में रहकर हरीश रावत अपनी पूरी ताकत जनता से मिलने में लगा रहे हैं। इधर हरीश रावत ने पंजाब प्रभारी से मुक्त होने के बाद ​सोशल मीडिया पर अपनी भावनाओं को व्य​क्त किया है। जिसमें हरीश रावत पंजाब के अनुभवों और सीएम समेत कांग्रेसियों से उत्तराखंड में आकर उनका हौंसला बढ़ाने की बात कर रहे हैं।

 Former CM Harish Rawat, who is adding Punjabi tadka in Uttarakhand elections, understand the strategy behind it

विधानसभा चुनाव तय करेंगे लोकसभा का भविष्य
कांग्रेस के लिए 2022 का विधानसभा चुनाव 2025 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिहाज से भी अहम हैं। इसके साथ ही पंजाब में दोबारा सत्ता में वापसी करना और उत्तराखंड में सत्ता में लौटने की कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती हैं। इन सभी समीकरणों से पूर्व सीएम हरीश रावत भी जुड़े हुए हैं। केन्द्र में महासचिव और उत्तराखंड में हरीश रावत चुनाव अभियान की कमान संभाले हुए हैं। साथ ही लंबे समय तक पंजाब में प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाली है। ऐसे में हरीश रावत के लिए पार्टी की जिम्मेदारियों को लेकर खुद को प्रुफ करना भी बड़ा चेलेंज ​है। इसी के चलते हरीश रावत ने एक जिम्मेदारी से खुद को मुक्त करवाया है। लेकिन हरीश रावत के लिए पंजाब पॉलिटिक्स से अलग होना आसान नहीं है। हरीश रावत जानते हैं कि उत्तराखंड में भी सिख समुदाय का वोटबैंक के खास मायने हैं। जो कि तराई सीटों पर अच्छा वोटबैंक है। इसके साथ ही किसान आंदोलन का फायदा उन्हें सिख समुदाय से जुड़कर ही मिल सकता है। ऐसे में हरीश रावत खुद को पंजाब से जोड़कर चल रहे हैं। हरीश रावत ने पंजाब में प्रचार करने और पंजाब के सीएम समेत पंजाब कांग्रेसियों को उत्तराखंड चुनाव में आने का न्यौता देकर सिख समुदाय को रिझाने की कोशिश की है।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने पोस्ट करते हुए कहा कि-

मैं, माननीया कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी, राहुल गांधी जी और कांग्रेस के नेतृत्व को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने पंजाब के दायित्व से मुझे मुक्त करने का जो मेरा अनुरोध था उसे स्वीकार किया और मैं, पंजाब कांग्रेस के सभी अपने साथी, सहयोगियों को उनके द्वारा मेरे कार्यकाल में प्रदत सहयोग के लिए भी बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं और पंजाब कांग्रेस व पंजाब के साथ हमारा प्रेम, स्नेह, समर्थन हमेशा यथावत बना रहेगा। बल्कि मेरा प्रयास रहेगा कि चुनाव के दौरान मैं, पंजाब कांग्रेस के साथ खड़ा होने के लिए वहां पहुंचू और मैं, पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व से भी विशेष तौर पर मुख्यमंत्री जी और अपने कुछ मंत्रीगणों, कांग्रेस अध्यक्ष से प्रार्थना करना चाहूंगा कि वो उत्तराखंड के चुनाव में भी रुचि लें और यहां आकर हमारी पीठ ठोकने का काम करें।

पंजाब को लेकर भावना, राजनीति का ही दूसरा पहलू
हरीश रावत के पंजाब को लेकर दिखाई गई भावना के पीछे हरीश रावत की राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जहां हरीश रावत के लिए उत्तराखंड पर फोकस करना जरुरी था, वहीं हरीश रावत किसी भी ऐसे कदम को नहीं उठाना चाहते थे, जिससे उनकी फिर से पंजाब से लेकर उत्तराखंड में किरकिरी हो। साथ ​ही हरीश रावत ये मैसेज भी नहीं देना चाहते कि वे हाईकमान पर बार-बार पंजाब से मुक्त होने का दबाव बना रहे थे। इससे पंजाब के वोटर भी नाराज हो सकते हैं। हरीश रावत को पहले ही उत्तराखंड में विपक्ष पंजाब को लेकर घेर रही है। पंजाब से मुक्त होने के बाद उत्तराखंड भाजपा ने एक पोस्टर सोशल मीडिया में वायरल किया है जिसमें हरीश रावत को उज्याडु बल्द बताया गया जो कि पंजाब की खेती बर्बाद कर अब उत्तराखंड में आया है। इस तरह से भाजपा किसी भी तरह से हरीश रावत को घेरने में जुटी है।

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English summary
Former CM Harish Rawat, who is adding Punjabi tadka in Uttarakhand elections, understand the strategy behind it
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