पूर्व सीएम हरीश रावत ने 2017 की हार का बदला लेने को चला ये दांव, भाजपा की बढ़ सकती है मुश्किलें
बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ चुके मुकर्रम अंसारी ने कांग्रेस ज्वाइन की
देहरादून, 7 जनवरी। उत्तराखंड में कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराने के लिए पूर्व सीएम हरीश रावत लगातार दांव पेंच में जुटे हैं। इस बार हरीश रावत ने बहुजन समाज पार्टी में सेंधमारी की है। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर हरिद्वार ग्रामीण सीट से 2017 में चुनाव लड़ चुके मुकर्रम अंसारी ने कांग्रेस ज्वाइन की कर ली है। बता दें कि मुकर्रम अंसारी हरिद्वार ग्रामीण से पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम हरीश रावत के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे थे। हरिद्वार ग्रामीण सीट पिछले चुनाव में हॉट सीट रह चुकी है।

हरीश रावत को मिली थी शिकस्त
पूर्व सीएम हरीश रावत ने वर्तमान में कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद के खिलाफ चुनाव लड़ा था। जिसमें हरीश रावत को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम हरीश रावत को 32 हजार वोट पड़े, जबकि भाजपा के यतीश्वरानंद को 44 हजार से ज्यादा मत पड़े थे, बसपा के मुकर्रम को 18 हजार से ज्यादा वोट मिले। इस तरह से भाजपा को 45.78%,कांग्रेस को 33.28% और बसपा 18.72% वोट मिले थे। ऐसे में कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि हरीश रावत पिछली हार का बदला लेने के लिए उत्सकु हैं। हालांकि वे खुद चुनाव लड़ते हैं या अपनी बेटी अनुपमा रावत को हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ाते हैं। इसको लेकर अभी संशय बना हुआ है। हरीश रावत के इस नए दांव को चुनावी गणित का नया हिस्सा माना जा रहा है।

बसपा को लगा झटका
हरिद्वार सीट पर अपना वजूद बचाने में जुटी बहुजन समाज पार्टी के लिए मुकर्रम का कांग्रेस ज्वाइन करना बड़ा झटका माना जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी ने इस बार विधानसभा चुनाव में हरिद्वार ग्रामीण सीट पर डॉ. दर्शन शर्मा पर दांव खेला है। इसके बाद से बसपा में बगावत खुलकर सामने आ चुकी है। हाल ही में बसपा के हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा प्रभारी के कार्यालय और कार पर पत्थरबाजी कर तोड़फोड़ की गई। जिसकी जांच पुलिस कर रही है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हरिद्वार जिले से अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है। बसपा ने अभी सात प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इनमें खानपुर से चौधरी रविंद्र पनियाला, मंगलौर से सरबत करीम अंसारी, झबरेडा से आदित्य ब्रजवाल, भगवानपुर से सुबोध राकेश, लक्सर से मोहम्मद शहजाद, कलियर से सुरेंद्र सैनी व हरिद्वार ग्रामीण से डा. दर्शन लाल शर्मा शामिल है।

बसपा के सहारे भाजपा पर नजर
उत्तराखंड में बसपा का मजबूत जनाधार रहा है। इस बार पार्टी ने यहां की सभी 70 सीटों पर अपने बूते चुनाव लड़ने की घोषणा की है। अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय और अल्पसंख्यक बसपा का मजबूत वोट बैंक रहा है। यही कारण रहा कि राज्य गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में बसपा, कांग्रेस व भाजपा के बाद आठ सीटें जीत कर प्रदेश में तीसरी ताकत के रूप में उभर कर सामने आई थी। हालांकि पहले चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने के बाद बसपा का वोट प्रतिशत लगातार गिर रहा है। वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में बसपा ने 10.93 मत प्रतिशत लेकर सात सीटों पर कब्जा जमाया था। इसके बाद वर्ष 2007 में हुए दूसरे विधानसभा चुनाव में बसपा ने 11.76 प्रतिशत मत के साथ आठ सीटें कब्जाईं। वर्ष 2012 में बसपा को तीन सीटें मिलीं, लेकिन 2017 में बसपा खाता भी नहीं खोल पाई। बसपा की सुप्रीमो मायावती भी इस बार चुनाव में कहीं नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में कांग्रेस बसपा के वोट बैंक को अपनी तरफ खींचकर भाजपा को शिकस्त देने की रणनीति पर काम कर रही है।












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