फ्लैशबैक 2021: देवस्थानम बोर्ड, भाजपा सरकार के एक सीएम ने पेश किया बिल, तीसरे सीएम ने लिया वापस
देवस्थानम बोर्ड 2 साल में ही सरकार को करना पडा भंग
देहरादून, 21 दिसंबर। उत्तराखंड के इतिहास में 2021 का साल राज्य सरकार के एक ऐसे फैसले के लिए भी याद किया जाएगा, जब सरकार ने चारों धामों को देवस्थानम बोर्ड प्रबंधन अधिनियम के अंदर लाकर 51 मंदिरों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की कोशिश की, लेकिन तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन और दवाब के कारण सरकार को एक साल के अंदर ही अधिनियम को निरस्त करना पड़ा। जिस वजह से भाजपा सरकार को कई मायनों में किरकिरी का भी सामना करना पड़ा है। चुनावी साल में भाजपा सरकार का ये फैसला डेमेज कंट्रोल माना जा रहा है।
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2019 में तत्कालीन त्रिवेंद्र रावत की सरकार ने बनाया था बोर्ड
2019 में तत्कालीन त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व वाली सरकार ने उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम-2019 के तहत एक देवस्थानम बोर्ड का गठन किया। जिसमें चार धामों के अलावा 51 मंदिरों का प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया। त्रिवेंद्र रावत का दावा था कि सरकार के प्रबंधन को हाथों में लेने से विकास कार्यों में तेजी आएगी और मंदिर प्रबंधन देश के बड़े मंदिरों की तरह बेहतर होगा। लेकिन स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने देवस्थानम बोर्ड का पहले दिन से विरोध शुरू कर दिया। पुरोहितों का आरोप था कि सरकार ने बिना स्थानीय तीर्थ पुरोहितों से संवाद के बोर्ड का गठन किया, साथ ही पुरोहितों का हकहकूक छिनने का डर भी सता रहा था। 10 दिसंबर 2019 को चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम विधानसभा में पारित हुआ। तब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तर्क दिया कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम समेत 51 मंदिर बोर्ड के अधीन आने से यात्री सुविधाओं का नए तरीके से विकास किया जाएगा। इसके लिए तिरुपति बालाजी और बैष्णो देवी मंदिर श्राइन बोर्ड का भी हवाला दिया गया। कि जिस प्रकार इन मंदिरों में सरकार विकास कर रही है, वैसे ही उत्तराखंड में 51 मंदिरों में नया इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास का रोडमैप तैयार होगा।
धामी के सीएम बनते ही शुरू हुई पहल
त्रिवेंद्र रावत के हटने के बाद तीरथ सिंह रावत ने भी देवस्थानम बोर्ड को लेकर विचार करने की बात की, लेकिन 4 महिनें में ही उनकी सरकार चली गई। पुष्कर सिंह धामी के सीएम बनते ही देवस्थानम बोर्ड का मुद्दा गर्माने लगा। चुनावी साल में तीर्थ पुरोहितों का दवाब सरकार को समझ में आने लगा तो पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा के दिग्गज नेता मनोहर कांत ध्यानी के नेतृत्व में हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट गठित की। कमेटी ने 2 माह में ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इसके बाद उच्च स्तरीय कैबिनेट उपसमिति ने रिपोर्ट का अध्ययन किया और रिपोर्ट को आधार बनाकर 30 नवंबर को देवस्थानम बोर्ड को भंग करने को लेकर सीएम ने बयान जारी किया। इसके बाद 10 दिसंबर को विधानसभा सत्र में देवस्थानम विधेयक को निरस्त कर बोर्ड को भंग कर दिया गया। इस तरह 2019 के शीतकालीन सत्र में बोर्ड बनाया गया और 2021 के शीतकालीन सत्र में बोर्ड को भंग कर दिया।
कब-कब क्या हुआ
- 27 नवम्बर 2019 को उत्तराखंड चार धाम बोर्ड विधेयक 2019 को मंजूरी
- 5 दिसंबर 2019 में सदन से विधेयक हुआ पास
- 14 जनवरी 2020 को देवस्थानम विधेयक को राजभवन ने मंजूरी दी।
- 24 फरवरी 2020 को देवस्थानम बोर्ड का सीईओ नियुक्त हुआ।
- 24 फरवरी 2020 से देवस्थानम बोर्ड का पुरोहितों ने विरोध शुरू किया।
- 11 सितंबर 2021 को पुष्कर धामी ने सीएम बनने के बाद विवाद खत्म करने का आश्वासन दिया।
- 30 अक्टूबर 2021 तक विवाद निपटाने का आश्वासन दिया गया।
- 30 नवंबर 2021 को सीएम ने देवस्थानम बोर्ड भंग करने का बयान जारी किया।
- 10 दिसंबर 2021 को विधानसभा में विधेयक को निरस्त करने का विधयेक पास हुआ।












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