China Spy: LinkedIn से जासूसी कर रहे चीनी जासूस, दिमाग हिला देगी चीनियों की तरकीब! कैसे फूटा भांडा?

China Spy: ब्रिटेन की घरेलू खुफिया और सुरक्षा एजेंसी MI5 ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। एजेंसी का दावा है कि चीनी जासूस (Chinese Spies) ब्रिटेन के सरकारी अधिकारियों, सैन्य कर्मचारियों और सेंसटिव इन्फोर्मेशन तक पहुंच रखने वाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसके लिए वे लोकप्रिय जॉब वेबसाइट्स और प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मकसद गोपनीय और सेंसटिव जानकारी हासिल करना बताया गया है।

Five Eyes देशों ने मिलकर जारी किया अलर्ट

इस मामले को लेकर Five Eyes गठबंधन के देशों- ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड ने एक साझा बुलेटिन जारी किया है। इस चेतावनी में कहा गया है कि चीनी सैन्य खुफिया एजेंसियां ऑनलाइन भर्ती (Online Recruitment) की एक "आक्रामक" रणनीति अपना रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी एजेंट खुद को निजी कंपनियों, रिसर्च संस्थानों (Think Tanks) या मानव संसाधन (HR) फर्मों के कर्मचारी बताकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। उनका असली उद्देश्य नौकरी देना नहीं बल्कि सेंसटिव जानकारी जुटाना है।

LinkedIn, Indeed और Upwork का हो रहा इस्तेमाल

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, ये एजेंट LinkedIn, Indeed और Upwork जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर नकली नौकरी के विज्ञापन (Fake Jobs)के पोस्ट कर रहे हैं। इनमें विदेशी नीति (Foreign Policy), Defence Analyst और सुरक्षा मामलों से जुड़े पदों के नाम शामिल होते हैं। ये नौकरियां वास्तव में मौजूद नहीं होतीं। इनका मकसद सिर्फ ऐसे लोगों को अपनी तरफ खींचना करना होता है जिनके पास सरकार, सेना या सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है।

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चीन ने आरोपों को पूरी तरह खारिज किया

ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों के आरोपों के बाद चीन ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। चीन का कहना है कि उस पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और उसकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।

आखिर नौकरी के बहाने जासूसी कैसे की जाती है?

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि इन Hiring Operations के मेन टारगेट कैंडिडेट से ऐसी जानकारी निकलवाना है जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। खास तौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता है जिनके पास डायरेक्ट या इन-डायरेक्ट रूप से सरकारी या सैन्य जानकारी तक पहुंच होती है। एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि भले ही किसी व्यक्ति के पास गोपनीय दस्तावेज न हों, लेकिन अगर उसे सरकारी नीतियों, सैन्य रणनीतियों या सुरक्षा योजनाओं की जानकारी है, तो वह भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकता है।

Five Eyes एजेंसियों ने क्या कहा?

ऑस्ट्रेलिया की ASIO, कनाडा की CSIS, अमेरिका की FBI, ब्रिटेन की MI5 और न्यूजीलैंड की NZSIS द्वारा जारी दस्तावेज में कहा गया है कि चीन की सैन्य खुफिया एजेंसियां लगातार नए तरीकों से Five Eyes देशों के सरकारी कर्मचारियों, सैन्य अधिकारियों और सेंसटिव जानकारी रखने वाले लोगों को निशाना बना रही हैं। दस्तावेज के मुताबिक, खुफिया अधिकारी या उनके सहयोगी खुद को कंसल्टेंसी कंपनियों, थिंक टैंक या HR एजेंसियों का कर्मचारी बताकर ऑनलाइन नौकरी के विज्ञापन डालते हैं। इनमें विदेशी नीति विशेषज्ञ, डिफेंस एनालिस्ट और इसी तरह के अन्य पद शामिल होते हैं।

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सफल कैंडिडेट पर बढ़ाया जाता है दबाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि जब कोई कैंडिडेट भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ता है, तो उस पर धीरे-धीरे दबाव बनाया जाता है कि वह कुछ "गैर-सार्वजनिक" यानी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने वाली जानकारी साझा करे। एजेंसियों के मुताबिक, इस जानकारी का फायदा चीन की जिनपिंग सरकार को पहुंच सकता है। उनका दावा है कि चीन सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक खुफिया जानकारी हासिल करना चाहता है ताकि उसे रणनीतिक और सामरिक बढ़त मिल सके।

कैंडिडेट की प्रोफाइल कैसे चुनी जाती है?

बुलेटिन के मुताबिक, नौकरी का पोस्ट करने के बाद एजेंट कैंडिडेट के CV और प्रोफाइल को ध्यान से जांचते हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि किस व्यक्ति के पास जानकारी या प्रभावशाली संपर्क हो सकते हैं। इसके बाद ऑनलाइन इंटरव्यू ऑर्गनाइज किए जाते हैं। इन इंटरव्यू में भर्ती करने वाले लोग अपनी असली पहचान छिपाते हैं और कैंडिडेट से सरकारी कॉन्टेक्ट्स, मिलिट्री मूवमेंट और अन्य सेंसटिव विषयों से जुड़े सवाल पूछते हैं।

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पहले रिपोर्ट लिखवाते हैं, फिर सेंसटिव जानकारी मांगते

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, शुरुआत में कैंडिडेट से चीन की विदेश नीति, रक्षा मामलों या अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे विषयों पर एक नमूना रिपोर्ट (Sample Report) लिखने के लिए कहा जाता है। बाद में बातचीत को धीरे-धीरे अधिक सेंसटिव मुद्दों की ओर मोड़ दिया जाता है। इसके लिए अक्सर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और निजी चैट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है ताकि बातचीत सार्वजनिक निगरानी से दूर रहे।

रिपोर्ट के बदले हजारों डॉलर तक का भुगतान

रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे लोगों को प्रत्येक रिपोर्ट के बदले कुछ सौ डॉलर से लेकर कई हजार डॉलर तक का भुगतान किया जाता है। भुगतान के लिए PayPal, Payoneer, Zelle, Skrill, Wise, Western Union, ई-ट्रांसफर सेवाओं और यहां तक कि Cryptocurrency का भी इस्तेमाल किया जाता है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है?

खुफिया एजेंसियों ने बताया कि कुछ खास पेशों से जुड़े लोग इन ऑपरेशनों का सबसे पहला टारगेट होते हैं। इनमें सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) रखने वाले कर्मचारी शामिल हैं, खासकर वे लोग जो रक्षा, विदेश नीति और खुफिया एजेंसियों से जुड़े विभागों में काम करते हैं। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मी भी निशाने पर हैं, क्योंकि उन्हें क्षेत्रीय मिलिट्री मूवमेंट्स और क्षमताओं की जानकारी होती है।

पत्रकार और शिक्षाविद भी निशाने पर

रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ सरकारी कर्मचारी ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता, शिक्षाविद, पत्रकार, फ्रीलांस लेखक, थिंक टैंक से जुड़े विशेषज्ञ और आर्थिक या सुरक्षा मामलों पर काम करने वाले पेशेवर भी इस जासूसी नेटवर्क के संभावित लक्ष्य हैं। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने या जानबूझकर सेंसटिव जानकारी साझा करता है, तो उस पर जासूसी से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

चीन ने Five Eyes गठबंधन पर पलटवार किया

ब्रिटेन में स्थित चीनी दूतावास ने MI5 की चेतावनी को "पूरी तरह झूठा" और "दुर्भावनापूर्ण आरोप" बताया है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि Five Eyes दुनिया का सबसे बड़ा खुफिया नेटवर्क है और उसके सदस्य देश दुनिया भर में जासूसी गतिविधियां चलाते हैं। उनके मुताबिक, शांति पसंद देशों के लिए वास्तविक खतरा यही गठबंधन है।

ब्रिटेन का जवाब: चीन से संवाद भी जारी रहेगा

ब्रिटेन के सुरक्षा मामलों के मंत्री डैन जार्विस ने कहा कि उनका देश चीन सहित अलग-अलग देशों होने वाली सभी हरकतों का मुकाबला करता रहेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन चीन के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखेगा। उनके मुताबिक, चीन के साथ बातचीत बनाए रखना राष्ट्रीय हित में है क्योंकि इससे ब्रिटेन सीधे उन गतिविधियों को चुनौती दे सकता है जिन्हें वह स्वीकार नहीं करता।

बढ़ता डिजिटल जासूसी का खतरा

यह पूरा मामला दिखाता है कि आज जासूसी सिर्फ गुप्त एजेंटों और फिल्मों तक सीमित नहीं रह गई है। अब नौकरी के विज्ञापन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन इंटरव्यू भी खुफिया गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं।

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MI5 और Five Eyes देशों की चेतावनी इस बात का संकेत है कि डिजिटल दुनिया में नौकरी की तलाश करने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर उन लोगों को, जिनके पास सरकार, रक्षा, विदेश नीति या सेंसटिव संस्थानों से जुड़ी जानकारी तक पहुंच है। ऐसे मामलों में एक आकर्षक जॉब ऑफर भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा जोखिम बन सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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