Dehradun: विधानसभा से बर्खास्त 228 कर्मियों ने आंदोलन के साथ उपवास के जरिए शुरू किया विरोध, जानिए पूरा मामला
विधानसभा से बर्खास्त 228 कार्मिकों का करीब दो हफ्ते से विरोध जारी है। न्यू ईयर के पहले दिन आंदोलनकारियों ने सांकेतिक रूप से गले में फंदा बांधकर अनोखे अंदाज में विरोध किया।विरोध के तौर पर उपवास करना शुरू कर दिया है।

उत्तराखंड में विधानसभा से बर्खास्त 228 कर्मियों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। आंदोलनकारियों ने विरोध के तौर पर उपवास करना शुरू कर दिया है। इसके बाद 4 जनवरी से आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है।
करीब दो हफ्ते से विधानसभा से बर्खास्त 228 कार्मिकों का विरोध जारी
विधानसभा से बर्खास्त 228 कार्मिकों का आंदोलन जारी है। करीब दो हफ्ते से कार्मिकों का विरोध जारी है। न्यू ईयर के पहले दिन आंदोलनकारियों ने सांकेतिक रूप से गले में फंदा बांधकर अनोखे अंदाज में विरोध किया। इससे पहले 31 दिसंबर को कर्मियों ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को पत्र लिखकर न्याय न मिलने की स्थिति में इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। पत्र में अवगत कराया कि राज्य गठन के समय से ही विधानसभा सचिवालय में सभी भर्तियां एक प्रक्रिया के तहत हुई हैं, लेकिन भर्तियों को अवैध बताकर विधानसभा की ओर से वर्ष 2016 से 2021 में नियुक्त 228 कर्मचारियों को बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई। वर्ष 2000 से 2015 तक नियुक्त कर्मचारी नियमित होने से उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हटाए गए कार्मिकों में कई विकलांग, विधवा होने के साथ ही कई ओवरएज हो चुके हैं, जिससे उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। धरना प्रदर्शन के दौरान बर्खास्त कर्मियों के बच्चों की ओर से न्यू ईयर पर बनाए गए शुभकामनाएं ग्रीटिंग कार्ड विधानसभा अध्यक्ष को पोस्ट किए। सोमवार से कार्मिकों का आंदोलन तेज हो गया है। आज से उपवास और 4 जनवरी से आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान कर दिया है।
विधानसभा में बैकडोर से भर्तियों का मामला
विधानसभा में बैकडोर से भर्तियों का मामला सामने आने के बाद स्पीकर ऋतु खंडूड़ी भूषण ने 3 सितंबर 2022 को पूर्व आईएएस अधिकारी डीके कोटिया की अध्यक्षता में तीन सदस्य विशेषज्ञ जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति ने राज्य गठन से 2021 तक तदर्थ आधार पर की गईं नियुक्तियों की जांच कर 20 दिन के भीतर 22 सितंबर 2022 को विधानसभा अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंप दी थी। समिति ने जांच में पाया कि तदर्थ आधार पर नियुक्तियां नियम विरुद्ध की गई हैं। समिति की रिपोर्ट पर विधानसभा अध्यक्ष ने 23 सितंबर को तत्काल प्रभाव से 2016 से 2021 तक की गईं कुल 228 नियुक्तियां को रद्द कर कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद कर्मचारी हाईकोर्ट गए तो वहां भी उन्हें निराशा मिली। वहीं, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी।
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