Dehradun:Kabul House 19 बीघा में फैले करोड़ों की संपत्ति का भारत-पाकिस्तान बंटवारे से कनेक्शन,जानिए पूरी कहानी

Dehradun Kabul House उत्तराखंड के देहरादून में ईसी रोड पर काबुल हाउस की करोड़ों की संपत्ति है। काबुल के तत्कालीन राजा मोहम्मद याकूब खान ने देहरादून के 15 बी ई सी रोड पर अपना महल बनाया था। याकूब खान काबुल से आकर देहरादून बसे थे।

Dehradun Kabul House Property worth crores spread over 19 bighas connection India-Pakistan partition, know the whole story.

तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उनको यहां बनाने के लिए कुछ जमीन दी थी, जहां उन्होंने अपना महल बनाया था। बताया जाता है कि आजादी के बाद याकूब खान वो यहां से दूसरे देश चले गए थे लेकिन उनके वंशजों का कहना है कि वो कहीं नहीं गए आज भी उनके वंशज यहीं मौजूद हैं।

देहरादून के ईसी रोड के पास करनपुर पुलिस चौकी के पीछे वाली भूमि जो पूर्व काबूल के अमीर (राजा) याकूब साहब की सम्पत्ति थी, जो 1876 में बिट्रिश सरकार की तरफ से दी गयी थी। यह भूमि याकूब के वारिसों के नाम दर्ज चली आ रही थी। सन 1947 में बटवारे में याकूब के वारिसान पाकिस्तान चले गये थे. जिसके बाद इनका हिस्सा कस्टूडियन सम्पति (शत्रु संपति) घोषित हुआ।

वर्ष 2000 में साहिद और खालिद पुत्रगण तथाकथित अब्दुल रज्जाक, निवासी ढोलीखाल, जनपद सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) ने इस भूमि को (अब्दुल रजाक की खेवट-47) अपने नाम अंकित करवाया उसके बाद इन दोनो ने इस भूमि की पावर ऑफ अटोनीं मौहमद आरिफ खान पुत्र शफात अली खान निवासी शामली (उत्तर प्रदेश) को दी।

इस भूमि पर विवाद होने के उपरान्त कब्जाधाकरियो की याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ताओ को अपना पक्ष जिलाधिकारी देहरादून/असिस्टेन्ट कस्टूडियन के समक्ष रखने के लिए आदेशित किया और सम्पति पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था।

लेकिन विपक्षीगण मौहमद आरिफ खान पुत्र शफात अली खान निवासी शामली (उत्तर प्रदेश), भगवती प्रसाद उनियाल पुत्र रामकिशन उनियाल आदि ने कटूरचित दस्तावेज मुख्तयारनामाआम, विक्रय पत्र आदि तैयार कर इस भूमि को करीब 30 लोगो को सन 2017 में बेच दिया। खरीदने वालो नें इसके बाद भूमि पर कब्जा कर निर्माण किये।

वर्ष 2018 में इस्लामुद्दीन अंसारी द्वारा इस जमीन के बाबत शिकायत जिलाधिकारी देहरादून को दी थी, जिलाधिकारी देहरादून द्वारा जाँच कराकर 2019 में उक्त प्रकरण में अपर जिलाधिकारी न्यायालय देहरादून द्वारा दिनांक 20.11.2021 को शाहिद, खालिद की विरासत खारिज कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2017 में करायी गयी सभी रजिस्ट्रीयां स्वतः निरस्त हो गयी थी, लेकिन कब्जा धारको ने भूमि से अपना कब्जा नहीं हटाया।

इस विवाद का मामला देहरादून के डीएम कोर्ट में चल रहा था ये मामला पिछले 40 वर्षों से चल रहा था, जिसपर पिछले कुछ दिनों प​हले डीएम देहरादून ने आदेश जारी करते हुए सब को इस जमीन से बेदखल किया था और जमीन खाली करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने दलबल के साथ मौके पर पहुंच कर सभी अतिक्रमणकारियों को घरों से बाहर निकाला। यहां लगभग 16 परिवार रहते हैं जिनकी संख्या 200 से 300 की थी। 19 बीघा में फैले इस इलाके में तब से कुछ परिवार रह रहे थे।

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