Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

उत्तराखंड चारधाम यात्रा के शीतकालीन प्रवास पर पहुंच रहे श्रद्धालु, जानिए कहां है शीतकालीन गद्दी

बदरीनाथ धाम के शीतकालीन पूजा स्थल पांडुकेश्वर में 75 श्रद्धालु,आदिगुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल जोशीमठ में 978 तीर्थयात्री पहुंचे,केदारनाथ धाम के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर 11641 तीर्थयात्री पहुंचे।

char dham yatra winter devotees Gaddi places worshiping Baba Kedar Badrinath 12500 devotees visited Pandukeshwar Omkareshwar temples

उत्तराखंड के चारों धामों के शीतकाल में कपाट बंद हो जाते हैं। इस दौरान शीतकालीन गद्दीस्थल पर पूजा अर्चना की जाती है। सरकार के प्रयास से अब तक इस बार चारधाम शीतकालीन यात्रा में श्रद्धालु बाबा केदार और बदरीनाथ की पूजा अर्चना के लिए गद्दी स्थलों पर पहुंच रहे हैं। चारधामों के कपाट बंद होने के बाद पांडुकेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिर में अब तक 12500 अधिक श्रद्धालुओं ने बदरी-केदार की पूजा अर्चना कर दर्शन किए।

ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में 11641 तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे

मंदिर समिति के अनुसार बदरीनाथ धाम के शीतकालीन पूजा स्थल योग ध्यान बदरी पांडुकेश्वर में 75 श्रद्धालु और आदिगुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल जोशीमठ में 978 तीर्थयात्री पहुंचे। इसके अलावा केदारनाथ धाम व द्वितीय केदार मद्महेश्वर के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में 14 दिसंबर तक कुल 11641 तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे।

शीतकालीन पूजा स्थलों में श्रद्धालुओं की कुल संख्या साढ़े बारह हजार से अधिक

बदरीनाथ व केदारनाथ धाम के शीतकालीन पूजा स्थलों में श्रद्धालुओं की कुल संख्या साढ़े बारह हजार से अधिक पहुंच गई है। यमुनोत्री मंदिर समिति से मिली जानकारी के अनुसार 26 अक्तूबर को यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद अब तक शीतकालीन गद्दीस्थल खरसाली और गंगोत्री मंदिर का शीतकालीन स्थल मुखबा में भी श्रद्धालु पूजा पाठ के लिए आ रहे हैं।

शीतकाल में चारोंधाम के कपाट बंद हो जाते हैं

उत्तराखंड में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ चार विश्व प्रसिद्ध धाम हैं। चारों धामों में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जो कि हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक हैं। ग्रीष्मकाल में ही चारों धाम की यात्रा का संचालन होता है। जिसमें गंगोत्री धाम में मां गंगा, यमुनोत्री में मां यमुना, केदारनाथ में बाबा केदार और बद्रीनाथ में बदरी विशाल के दर्शन होते हैं। शीतकाल में चारोंधाम के कपाट बंद हो जाते हैं। इस दौरान मां गंगा उत्तरकाशी जिले के मुखवा गांव और यमुना मां खरसाली में विराजमान होती हैं। बाबा केदार रूद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ और भगवान बदरी विशाल पांडुकेश्वर जोशीमठ चमोली में आ जाते हैं। जहां 6 माह शीतकाल में पूजा अर्चना होती है। यहां पर भी श्रद्धालु शीतकाल में भी इन स्थानों पर होने वाली पूजा-अर्चना में शामिल हो सकते हैं।

शीतकाल प्रवास के लिए डोली ले जाई जाती

राज्य सरकार लगातार शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने में जुटी है। शीतकाल प्रवास के दौरान तीर्थ पुरोहित शीतकाल गद्दी की पूजा अर्चना करते हैं। चारों धामों में मौसम प्रतिकूल होने के कारण सुरक्षाकर्मी और साधु संत रहते हैं। शीतकाल प्रवास के लिए जो डोली ले जाई जाती है। उसमें चल विग्रह स्वरूप होता है। जिसका अर्थ है कि भगवान की मुख्य मूर्ति मंदिर परिसर में ही होती हे। कपाट बंद होने के साथ ही भगवान की मूर्ति चल विग्रह स्वरूप में शीतकाल के लिए ले जाई जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार इस दौरान धामों में नारद जी खुद पूजा अर्चना करते हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+