Uttarakhand BJP में चल रही खींचतान को खत्म करने के लिए हाईकमान ने निकाला ये फॉर्मूला,नए साल में खुलेगा पिटारा

Uttarakhand नए साल में सरकार में दायित्वधारी बनाने की तैयारी

उत्तराखंड में सत्ताधारी भाजपा में लंबे समय से चल रही खींचतान पर अब हाईकमान ने बीच का फॉर्मूला निकाला है। नए साल से पहले धामी सरकार 40 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को दायित्वधारी बनाकर मामला शांत कराने का होमवर्क पूरा कर चुकी है। प्रदेश संगठन के प्रस्ताव पर हाईकमान ने इसकी मंजूरी दे दी है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस पर फाइनल मुहर लगाएंगे। जो कि दिसंबर अंत तक सामने आ सकती है।

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दायित्वधारी बनाकर सरकार में विभिन्न निगमों, बोर्डों में एडजस्ट करने पर विचार

भाजपा संगठन में अंदरखाने इस को लेकर चर्चा तेज है। भाजपा में बीते दिनों से पूर्व सीएम समेत कई बार पार्टी के दिग्गज नेताओं के बयानबाजी से अपनी ही सरकार को मुश्किल में डालने का काम किया है। जिससे भाजपा सरकार की किरकिरी भी हुई। इतना ही नहीं मामला दिल्ली तक भी पहुंचा। हाईकमान ने भी इन बयानों को गंभीरता से लेते हुए सीनियर नेताओं को पार्टी के प्लेटफॉर्म में अपनी बात रखने का आदेश दिया। इस बीच पार्टी के नेताओं की सरकार से नाराजगी और अपने चेहेतों को फिट करने की बात भी अंदरखाने होती रही। जिस पर हाईकमान ने प्रदेश संगठन की मांग पर बीच का फॉर्मला तैयार किया। जिसके तहत पार्टी के सीनियर कर्मठ नेताओं को दायित्वधारी बनाकर सरकार में विभिन्न निगमों, बोर्डों में एडजस्ट करने पर विचार किया गया। जिसको हाईकमान की और से हामी भर दी गई। अब दिसंबर अंत तक सीएम धामी की और से लिस्ट जारी करने की बात सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि प्रदेश संगठन की और से 50 से ज्यादा नाम सौंपे जा चुके हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस बात के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि पहले चरण में 40 से ज्यादा दायित्व बांटे जा सकते हैं। जिसमें कई वे नाम भी शामिल हैं जिनके विधानसभा चुनाव में टिकट काटे गए थे। इस तरह से संतुलन बिठाने की कोशिश की जाएगी। जिससे निकाय चुनावों और लोकसभा चुनावों तक पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखा जा सके।

धामी-2 में कार्यकर्ताओं को दायित्व देकर खुश करने की कवायद

सरकार आने पर राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को विभिन्न निगमों, परिषद और समितियों में दायित्व देकर उन्हें खुश करने की को​शिश करते हैं। ​पूर्व में त्रिवेंद्र सरकार ने पूर्ण बहुमत की सरकार आने के बाद भी साढ़े 4 साल में दायित्वधारियों को नजर अंदाज किया। कार्यकर्ताओं को दायित्व बांटे भी तो कम समय के लिए। पिछली सरकार में सीएम के 3 चेहरे बदले गए, कैबिनेट मंत्रियों को रिपीट किया गया, लेकिन दायित्वधारियों को दोबारा जिम्मेदारी नहीं मिली। जिसकी नाराजगी भाजपा के अंदरखाने साफ देखी गई। उत्तराखंड में भाजपा के ही पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में तकरीबन चार साल के कार्यकाल में करीब 120 दायित्वधारी बनाए गए। लेकिन बाद में तीरथ सिंह रावत और धामी के पहले कार्यकाल में कार्यकर्ता दायित्व का इंतजार करते रह गए। लेकिन धामी-2 में अब एक बार कार्यकर्ताओं को दायित्व देकर खुश करने की कवायद शुरू हो गई है।

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