भाजपा ने कुछ बागियों पर दिखाया नरम रुख, चुनाव बाद बागी और निर्दलीय के हाथ में रह सकती है सत्ता की चाबी

नाराज बागियों को पार्टी अभी भी मनाने में जुटी

देहरादून, 4 फरवरी। उत्तराखंड में भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज बागियों को लेकर पार्टी अभी भी मनाने में जुटी है। हालांकि पार्टी ने 6 बागियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, लेकिन 5 से ज्यादा बागियों को लेकर अभी भी भाजपा नरम रुख अपना रही है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि जिन बागियों को अभी पार्टी ने बाहर नहीं किया है, उनसे पार्टी को अभी भी चुनाव में नुकसान न पहुंचाने की उम्मीद है। इतना ही नहीं भाजपा के बड़े नेता अभी इन बागियों के संपर्क में हैं। पार्टी चुनाव बाद समीकरणों पर भी फोकस कर रही है। जिनके जीतने की संभावना हो सकती है, पार्टी उन्हें भी चुनाव बाद अपना सकती है। जिस तरह के चुनावी सर्वे सामने आ रहे हैं, उसमें निर्दलीय के भरोसे सरकार बनने की उम्मीद भी जगी है। ऐसे में भाजपा हो या कांग्रेस दोनों अपनी विचारधारा के प्रत्याशियों से अभी बिगाड़ना नहीं चाहेगी। इसके लिए पार्टी के बड़े नेता अभी से समीकरण बिठाने में जुटे हैं। इसके साथ ही जो बागी भाजपा के प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में डटे हैं, वे अगर चुनाव में प्रचार-प्रसार में कमजोर रहेंगे तो उसका भी फायदा पार्टी को हो सकता है। ऐसे में नुकसान की कम ही उम्मीद है।

BJP has shown a soft stand on some rebels, the key to power may remain in the hands of the rebels and independents after the elections

कुछ बाहर, कुछ अभी संपर्क में
भाजपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे 6 लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए 6 वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर यह कार्यवाही की गई है। जिन सदस्यो पर कार्यवाही की गई है उनमे टीका प्रसाद मैखुरी कर्ण प्रयाग, महावीर सिंह रागंड़ धनौल्टी, जितेंद्र नेगी डोईवाला, धीरेन्द्र चौहान कोटद्वार, मनोज शाह भीमताल तथा राजकुमार ठुकराल रुद्र्पुर है। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब जो बागी भाजपा के चुनाव मैदान में हैं जिन पर पार्टी ने कार्रवाई नहीं कि है उनमें वीर सिंह पंवार (धर्मपुर) दिनेश रावत (देहरादून कैंट) दर्शनलाल (घनसाली) कमलेश भट्ट (चकराता) मनोज कोली (यमुनोत्री) अजय तिवारी (किच्छा) पवन चौहान (लालकुंआ) नितिन शर्मा (रुड़की) शामिल हैं। ऐसे में पार्टी अपनी दूसरी रणनीति पर भी विचार कर रही है।
वुर्चअल से ज्यादा डोर टू डोर से ही फायदा
कोविड के चलते वर्चुअल प्रचार में जुटे सियासी दल अब मतदान की तारीख नजर आते ही पूरा जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से अब अपने स्टार प्रचारकों की फौज को उत्तराखंड में उतार दिया गया है। साथ ही वर्चुअल प्रचार में जुटे हैं। शुरूआत में वर्चुअल प्रचार में तेजी दिखा रहे भाजपा का वर्चुअल प्रचार इन दिनों धीमा हो गया है। जबकि कांग्रेस ने अपने बड़े नेताओं को मैदान में उतारकर वर्चुअल में पूरा जोर लगा दिया है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितयों के हिसाब से वर्चुअल का ज्यादा लाभ होता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में भाजपा हो या कांग्रेस डोर टू डोर कैंपेन में ही ज्यादा लाभ मिलता नजर आ रहा है। भाजपा भी अपने बड़े नेताओं को जमीनी प्रचार पर फोकस कर रही है। इससे ज्यादा फायदा चुनाव में नजर आता हुआ दिख रहा है। उत्तराखंड में इन दिनों बारिश और बर्फबारी जमकर हो रही है। ऐसे में वर्चुअल प्रचार मुश्किल हो रहा है। बारिश और बर्फबारी के कारण पहाड़ों में बिजली और इंटरनेट की समस्या रहती है। जिस कारण पार्टी कार्यकर्ताओं को अब जमीनी प्रचार पर ही फोकस करना पड़ रहा है।

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