रिजल्ट से पहले भाजपा, कांग्रेस के प्रभारी देहरादून में डालेंगे डेरा, प्रत्याशियों और दूसरे विकल्प पर सबकी नजर
भाजपा और कांग्रेस के प्रभारी देहरादून पहुंचेंगे
देहरादून, 4 मार्च। देवभूमि में हुए दंगल का अब परिणाम आने वाला है। ऐसे में सियासी दलों की धड़कनें बढ़ रही हैं। जिसमें सबसे बड़ा टारगेट अब सियासी दलों का अपने-अपने विधायकों को अपने साथ मजबूती से खड़ा रखने का है। जिस तरह का उत्तराखंड का इतिहास रहा है, और यहां चुनाव में दलबदल का खेल सबसे ज्यादा खेला जाता रहा है। ऐसे में अब भाजपा और कांंग्रेस अपने-अपने प्रत्याशियों के घेराबंदी में जुट गई है। इसके लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रभारी भी परिणाम से पहले देहरादून पहुंच रहे हैं। जरुरत पड़ी तो विधायकों को रेस्क्यू भी करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

सरकार बनाने का जिम्मा संभालेंगे प्रभारी
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव और भाजपा के चुनाव प्रभारी प्रह्रलाद जोशी देहरादून पहुंचने वाले हैं। जो कि सरकार बनाने के लिए हर प्रयास करने में जुट जाएंगे। कैमरे के सामने भले ही नेता अपनी-अपनी सरकार के पूर्ण बहुमत का दावा कर रहे हैं। लेकिन कैमरा हटते ही इस बात को मानने से इनकार नहीं कर रहे हैं कि जनादेश चौंकाने वाले हो सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस के लिए इस बार के चुनाव परिणाम लोकसभा के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में दोनों दलों के सीनियर नेता उत्तराखंड के रिजल्ट पर फोकस कर रहे हैं, जो भी सरकार बनाएंगे, उनके लिए लोकसभा चुनाव का रास्ता बनना तय है। भाजपा किसी भी सूरत में उत्तराखंड की कुर्सी खोना नहीं चाहती है। मोदी के 2024 मिशन पर इससे असर पड़ना तय है। वहीं कांग्रेस के लिए ये चुनाव संजीवनी साबित हो सकता है। सरकार बनने पर कांग्रेस केन्द्र में अपना दोबारा सत्ता पाने का एक कदम मान सकती है। ऐसे में दोनों दल हर कीमत पर सरकार बनाने के प्रयास में जुट गए है। भाजपा में पुराने दिग्गज रमेश पोखरियाल निशंक और कांग्रेस में हरीश रावत के हाथ में सरकार बनाने की चाबी हो सकती है। निशंक और रावत दोनों की राजनीति एक ही पटरी पर चलती हुई मानी जाती है। ऐसे में परिणाम आने के बाद दोनों की भूमिका खासा अहम मानी जा रही है। जो कि जोड़ तोड़ के भी बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं।
दूसरों पर दलों की नजर
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो इशारे इशारे में इस बात को स्वीकार कर लिया कि सरकार बनाने के लिए निर्दलीय और दूसरे दलों की जरुरत पड़ सकती है। हरीश रावत ने ऐसे सभी दलों को एकजुट होने की बात की है। जिससे साफ है कि हरीश रावत भी अंदरखाने इस बात को मानते हैं कि सरकार बनाने के लिए किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाला है। जिससे त्रिशंकु विधानसभा होने के आसार भी लगने लगे हैं। परिणाम से पहले अब भाजपा, कांग्रेस सरकार बनाने की जुगत में जुट गए हैं। इसके लिए निर्दलीय, बसपा और यूकेडी तीसरे विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं। चुनाव तक खुद को तीसरा विकल्प मान रही आम आदमी पार्टी का वोटिंग के बाद कुछ खास रूझान देखने को नहीं मिल रहा है। आप के सीएम फेस कर्नल अजय कोठियाल की अपनी ही सीट फंसी हुई मानी जा रही है। जिससे ये चुनाव परिणाम प्रदेश की राजनीति का भविष्य भी तय करेंगे।












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