बागेश्वर उपचुनाव: राखी के सहारे नैया पार लगाने की कोशिश, जानिए महिला वोटरों पर क्यों है सबकी नजर
उत्तराखंड के बागेश्वर में उपचुनाव के बीच चुनाव प्रचार प्रसार के बीच रक्षाबंधन पर्व भी दिग्गजों ने बागेश्वर में मनाया।
उत्तराखंड के बागेश्वर में उपचुनाव जीतने लिए भाजपा, कांग्रेस हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। 5 सितंबर को बागेश्वर में मतदान होगा। उससे पहले दोनों सियासी दल के दिग्गज बागेश्वर में डेरा डाले हुए हैं। इस बीच चुनाव प्रचार प्रसार के बीच रक्षाबंधन पर्व भी दिग्गजों ने बागेश्वर में मनाया।

रक्षाबंधन के मौके पर दिग्गजों ने प्रचार प्रसार भी किया और महिलाओं से राखी भी बंधवाई। जिसे सियासी चश्मे से भी देखा जा रहा है। भाजपा के प्रभारी सौरभ बहुगुणा बागेश्वर में डेरा डाले हुए हैं उन्होंने गरुड़ में प्रचार प्रसार के बीच महिलाओं के साथ रक्षाबंधन पर्व को मनाया जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत ने बागेश्वर के मंगल पैलेस विकास भवन रोड में धूमधाम से रक्षाबंधन पर्व को मनाया। जहां पर सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर हरीश रावत को राखी बांधी।
बागेश्वर चुनाव में महिलाओं की भी अहम भूमिका है। इस चुनाव मेंं भाजपा ने महिला प्रत्याशी पार्वती दास को मैदान में उतारा है। ऐसे में भाजपा की नजर महिला वोट बैंक पर ही है। साथ ही कांग्रेस भी हर हाल में महिला वोट को अपने पाले में खींचने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। हरीश रावत के रक्षाबंधन पर्व को इस तरह धूमधाम से मनाने के पीछे की सियासत को महिला वोट बैंक से जोड़ा जा रहा है।
वोटर के आंकड़ों की बात करें तो बागेश्वर उप चुनाव में 118225 मतदाता हैं। इनमें 60,045 पुरुष और 58,180 महिला मतदाता हैं। सर्विस मतदाताओं की संख्या 2207 है। जिनमें 57 महिला मतदाता हैं। इस तरह से बागेश्वर में महिला वोटर को निर्णायक माना जा रहा है। जो कि लगभग पुरुष वोटर के बराबर ही हैं। महिला और पुरुष वोटर में ज्यादा अंतर नहीं है।
इस लिहाज से बागेश्वर चुनाव में महिला वोटर जीत का अंतर और चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस लिहाज से भाजपा, कांग्रेस बागेश्वर में महिला वोटरों को अपने पाले में करने के लिए हर तरह से कोशिश में जुटा है। चुनाव में हमें महिलाओं को ही विश्वास वोटर माना जाता है। जिनका रुख हमेशा जीत हार को तय करता है।












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