Uttarakhand का एक और जोशीमठ, उत्तरकाशी के मस्ताड़ी गांव में घरों से फूट रहा पानी, दरारों से दहशत
उत्तरकाशी के मस्ताड़ी गांव में करीब तीन दशकों से भू धंसाव हो रहा है, लेकिन अब घरों में पानी फूटने से लोगो का डर बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव साल 1991 के भूकंप के बाद से ही आपदा का दंश झेल रहा है।
उत्तराखंड के एक और गांव के हालात जोशीमठ जैसे बन गए हैं। जो कि भू धंसाव और दरारों से दहशत में जीने को मजबूर हैं। उत्तरकाशी के मस्ताड़ी गांव में करीब तीन दशकों से भू धंसाव हो रहा है, लेकिन अब घरों में पानी फूटने से लोगो का डर बढ़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव साल 1991 के भूकंप के बाद से ही आपदा का दंश झेल रहा है। कई बार वैज्ञानिक सर्वे कराया गया लेकिन आज तक प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को किसी तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया गया। उत्तरकाशी के जिला मुख्यालय से दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित मस्ताड़ी गांव में भूधंसाव और घरों के अंदर पानी निकलने का सिलसिला बरसात में बढ़ गया है। ऐसे में ग्रामीण रात में जाकर दहशत में जीने को मजबूर हैं।
मस्ताड़ी गांव के पूर्व प्रधान चंदन सिंह राणा ने बताया कि गांव में 70 परिवार बसे हुए हैं। जिनके करीब 270 लोग गांव में रहकर किसी तरह अपना जीवन यापन करते हैं। लेकिन लंबे से पूरा गांव आपदा प्रभावित है। चंदन सिंह राणा का कहना है कि मस्ताड़ी गांव से होकर जा रहे दूसरे गांव की सड़क का हाल में निर्माण हुआ जिसकी वजह से गांव की स्थिति ओर खराब हो गई है। प्रशासन अब भी भू गर्भ रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के पास इंतजार के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
मस्ताड़ी गांव के ग्राम प्रधान सत्यनारायण सेमवाल का कहना है कि गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है। शासन स्तर पर मस्ताड़ी गांव की सुध नहीं ली जा रही है। पहले से आपदा का दंश झेल रहे मस्ताड़ी गांव में घर आंगन से लेकर रास्तों तक में दरारें और अधिक चौड़ी हो गई। ग्रामीणों को अब डर सता रहा है कि उनके घर कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। ग्रामीणों के घरों के अंदर से पानी फूटने लगा है। घरों में दरारें लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे अब मकानों के ढहने का खतरा बना हुआ है।












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