अंकिता हत्याकांड: पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल, अंकिता के पिता और स्टाफ के बयानों से संदेह के दायरे में
अंकिता हत्याकांड: पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल
देहरादून, 29 सितंबर। अंकिता हत्याकांड में एसआईटी जांच जारी है। रिजॉर्ट से अहम साक्ष्य जुटाने के साथ ही टीम इस प्रकरण से जुड़े लोगों के बयान दर्ज कर रही है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में अब तक सबसे अहम और संदिग्ध पटवारी की भूमिका नजर आ रही है। पटवारी को लेकर अंकिता के पिता भी गंभीर आरोप लगा चुके हैं। घटना के दिन ही पटवारी का छुट्टी पर जाना और आरोपी पुलकित से संबंधों को लेकर भी लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में एसआईटी पर भी इस प्रकरण से जुड़े अहम कड़ियों को जोड़ने और उनके खुलासे का दबाव बना हुआ है।

रिजॉर्ट में पटवारी वैभव प्रताप का आना जाना लगा रहता
अंकिता हत्याकांड में पुलिस की जांच में आए दिन कई चुनौतियां सामने आ रही है। टीम के लिए सबसे अहम रिजॉर्ट में होने वाली गतिविधियां मानी जा रही है। इस बीच मीडिया के जरिए ये बात भी सामने आई है कि रिजॉर्ट में पटवारी वैभव प्रताप का आना जाना लगा रहता था। साथ ही रिजॉर्ट के मालिक और अंकिता मर्डर के आरोपी पुलकित के साथ पटवारी का उठना बैठना था।

घटना के दिन अचानक छुट्टी लेकर चले जाना कई सवाल खड़े कर रहा
ऐसे में पटवारी वैभव का घटना के दिन अचानक छुट्टी लेकर चले जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। अंकिता के पिता ने भी आरोप लगाया है कि जब वे अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट राजस्व पुलिस को लिखाने गए तो उस समय पटवारी वैभव काम पर थे। लेकिन अगले दिन पता चला कि पटवारी छुट्टी पर चले गए हैं। छुट्टी पर जाने की वजह पिता के बीमार होना बताया गया। लेकिन इस बीच पटवारी से किसी तरह का संपर्क भी नहीं हो पाया। जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं। रिजॉर्ट में काम कर चुकी महिला स्टाफ भी मीडिया को बयान दे चुकी है कि जब उन्होंने रिजॉर्ट छोड़ने से पहले कंप्लेन करना चाहा तो पटवारी ने उन्हें डराया।

पुलिस पटवारी को भी इस केस में आरोपी मान सकती है
इस तरह अंकिता हत्याकांड में एसआईटी के लिए पटवारी के बयान और भूमिका अहम मानी जा रही है। ऐसे में ये माना जा रहा है कि पुलिस पटवारी को भी इस केस में आरोपी मान सकती है। जिन पर अपराध छिपाने और साक्ष्य मिटाने का आरोप लग रहा है।

24 सितंबर को एसआईटी गठित, तब से लगातार जांच
उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश को झगझोर कर रख देने वाले अंकिता हत्याकांड में अब तक आए दिन खुलासे हो रहे हैं। सबसे पहले 18 सितंबर को अंकिता लापता हुई। 23 सितंबर को पुलिस ने हत्या मानते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया, जिसमें भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित, उसके साथी सौरभ और अंकित को गिरफ्तार किया था।
अंकिता का शव 24 सितंबर को चीला बैराज के पास मिला था। 24 सितंबर को ही मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। तब से लगातार जांच की जा रही है।

मुख्य सचिव को तीन सप्ताह में व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश करने के निर्देश
अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद उत्तराखंड में राजस्व पुलिस की व्यवस्था समाप्त करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की। मामले में मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को तीन सप्ताह में व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने शपथ पत्र में यह भी बताने को कहा है कि वर्ष 2018 में इसी संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का क्या हुआ, उक्त आदेश में राज्य में छह महीने के भीतर राजस्व पुलिस व्यवस्था समाप्त कर अपराधों की विवेचना सिविल पुलिस को सौंपने को कहा गया था।












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