यूसीसी के साथ ही अब धामी सरकार का भू कानून जल्द, समिति सौंप चुकी है रिपोर्ट, जानिए क्या है सीएम का प्लान

राज्य में सशक्त भू-कानून को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में भू-कानून लागू करने को सरकार पूरी तरह से तैयार और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा।

उत्तराखंड में धामी सरकार अब यूसीसी के साथ ही भू-कानून लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। राज्य में सशक्त भू-कानून को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि राज्य में भू-कानून लागू करने को सरकार पूरी तरह से तैयार और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा।

Along with Uniform Civil Code, land law of pushkar Dhami government soon, committee submitted report

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार के लिए जन-भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भू-कानून के लिए गठित समिति की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस रिपोर्ट को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की भावना के अनुरूप सशक्त भू-कानून राज्य में लागू करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड में भू - कानून के अध्ययन व परीक्षण के लिए गठित समिति सितंबर 2022 में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। समिति निवेश की संभावनाओं और भूमि के अनियंत्रित क्रय - विक्रय के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपनी 23 संस्तुतियां सरकार को दी चुकी है।

धामी सरकार ने भू कानून के अध्ययन के लिए एक कमेटी गठित की। जिसमें अध्यक्ष प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार के अलावा समिति के सदस्य व श्री बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य अजेंद्र अजय, पूर्व आईएएस अधिकारी अरुण ढौंडियाल व डी.एस.गर्व्याल और समिति के पदेन सदस्य सचिव शामिल रहे।

सीएम धामी ने जुलाई 2021 में प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त होने के बाद उसी वर्ष अगस्त माह में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति ने राज्य के हितबद्ध पक्षकारों, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित कर गहन विचार - विमर्श कर लगभग 80 पृष्ठों में अपनी रिपोर्ट तैयार की। इसके अलावा समिति ने सभी जिलाधिकारियों से प्रदेश में अब तक दी गई भूमि क्रय की स्वीकृतियों का विवरण मांग कर उनका परीक्षण भी किया।

समिति ने अपनी संस्तुतियों में ऐसे बिंदुओं को सम्मिलित किया है जिससे राज्य में विकास के लिए निवेश बढ़े और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो। साथ ही भूमि का अनावश्यक दुरूपयोग रोकने की भी अनुशंसा की है। दावा किया गया है समिति ने वर्तमान में प्रदेश में प्रचलित उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) यथा संशोधित और यथा प्रवृत्त में जन भावनाओं के अनुरूप हिमाचल प्रदेश की तरह कतिपय प्रावधानों की संस्तुति की है।

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