AIIMS Rishikesh कार्डियोलाॅजिस्ट मंथन, हार्ट रोगियों के लिए लाभदायक है 'लेफ्ट बंडल ब्रांच पेसिंग', जानिए कैसे
AIIMS Rishikesh Heart Patients एम्स ऋषिकेश में इन दिनों देश भर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और मेडिकल काॅलेजों के काॅर्डियोलाॅजिस्ट गंभीर किस्म के हृदय रोगों के इलाज की नयी तकनीकों से रूबरू हो रहे हैं। मौका है कार्डियोलाॅजिस्ट सोसाईटी ऑफ इन्डिया के तीन दिवसीय सम्मेलन का।
सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा 'लेफ्ट बन्डल ब्रांच पेसिंग' तकनीक पर पर व्यापक चर्चा की गयी। कहा गया कि हृदय रोग में पेस मेकर लगाने की यह तकनीक इलाज में बहुत ही लाभकारी है। यूकेसीएसआई के सम्मेलन में हृदय रोगों के इलाज में नवीनतम तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया।

इस दौरान साईंटिफिक एजेन्डे के तहत विभिन्न सत्रों में कार्डियोलाॅजी की बारीकियों, समस्याओं और उनके सरलतम निदान पर विभिन्न कार्डियोलाॅजिस्ट विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा व्याख्यान दिए गए। द्वितीय वार्षिक सम्मेलन में देश भर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और मेडिकल काॅलेजों के कार्डियोलाॅजिस्ट प्रिएन्टिव कार्डियोलाॅजी, इंटरवेंशनल कार्डियोलाॅजी और एडवांस इन कार्डियोलाॅजी सहित हृदय रोग से संबन्धित विभिन्न रोगों, इलाज की नवीनतम तकनीकोें और आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अनुभव हासिल कर मंथन करेंगे।
सम्मेलन हृदय रोग में इलाज की दृष्टि से विशेष लाभदायक तकनीक 'लेफ्ट बन्डल ब्रांच पेसिंग' को बढ़ावा देने में फोकस रहा। इस बारे में एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलाॅजिस्ट और कार्यक्रम के आयोजन सचिव डाॅ. बरूण कुमार ने बताया कि पेस मेकर की आवश्यकता वाले रोगियों के इलाज में यह तकनीक बहुत लाभकारी है। उन्हेांने बताया कि इस तकनीक से हृदय में पेस मेकर लगाने से हार्ट कमजोर होने की संभावना 10 से 15 प्रतिशत तक कम हो जाती है और यह तकनीक रोगी के लिए सुविधाजनक भी है। मेडिकल के छात्रों को यह तकनीक समझाने के लिए सम्मेलन में लाईव वर्कशाॅप का आयोजन भी किया गया।
कार्डियोलाॅजिस्ट सोसाईटी आफ इन्डिया, उत्तराखण्ड चैप्टर (यू.के.सी.एस.आई.) के राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन देशभर से आए कार्डियोलाॅजिटों ने हृदय रोगों की जटिलताओं और उनके इलाज पर व्यापक चर्चा कर इलाज की आधुनिक व नयी तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने कहा गया कि तेजी से बढ़ रहे हृदय रोगों के प्रति जागरूकता फैलाना और इसके प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। चिंता व्यक्त की गयी कि वर्तमान दौर में युवा वर्ग भी हृदय रोग की चपेट में आने लगे हैं।
सम्मेलन में एक्यूट कोरोनरी सिन्ड्रोम, मास्टेरिंग काॅम्पलेक्स पीसीआई, स्टेंटलेस पीसीआई, क्रोनिक टोटल आक्लूसिओन्स, स्ट्रक्चल हार्ट इंटरवेंशन्स, पेसमेकर एण्ड रेथम तथा पिडियाट्रिक काॅर्डियोलाॅजी जैसे हृदय रोग के कई महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए।
इसके साथ ही कोरोनरी स्ट्रक्चल और पेसिंग एण्ड कोरोनरी जैसे जटिल विषयों पर केस प्रजेन्टेशन सत्र भी आयोजित हुए। देश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और मेडिकल काॅलेजों से आए कार्डियोलाॅजिस्ट विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा पोस्टर प्रजेन्टेशन के माध्यम से हृदय रोगों की जटिलताओं और उनके निदान हेतु विभिन्न तकनीकों की बारीकियों को समझाया गया।
डाॅ. बरूण कुमार (सम्मेलन के आयोजन सचिव और एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलाॅजिस्ट) ने बताया कि हाल की के वर्षों में कार्डियोलाॅजी के क्षेत्र में कई इंटरवेंशनल तकनीकें विकसित हुई है, जो गंभीर रोगों में भी समय पर सही इलाज देकर रोगियों को स्वस्थ कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य हृदय रोग विशेषज्ञों को हृदय रोगों के नवीनतम उपचार तकनीकों से अवगत कराना और अनुभव को साझा करना है।












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