हरक सिंह रावत के प्रकरण में आ सकता है नया मोड़, बड़ा कदम उठाने के मूड में भाजपा

हरक सिंह से भाजपा नेताओं ने किया संपर्क

देहरादून, 21 जनवरी। 5 दिन तक कांग्रेस के बुलावे का इंतजार करते रहे उत्तराखंड के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत के राजनीतिक भविष्य को लेकर अब भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हरक सिंह रावत ने अभी पूरी तरह से अपने पत्ते तो नहीं खोले हैं, लेकिन भाजपा से निष्कासित होने के बाद हरक सिंह के पास कांग्रेस ज्वाइन करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इधर हरक सिंह रावत के भाजपा के सीनियर नेताओं से संपर्क होने की खबरों ने एक बार फिर भाजपा में वापसी की अटकलें तेज कर दी हैं।

हरक को लेकर भाजपा बंटी दो गुटों में

हरक को लेकर भाजपा बंटी दो गुटों में

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के दिल्ली पहुंचने से पहले ही भाजपा से निष्कासन होना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा हरक सिंह रावत को पार्टी से बाहर निकालने पर दो गुटों में बंटी है। एक गुट कार्रवाई को सही बता रहा है तो दूसरे का तर्क है कि अगर हरक सिंह रावत को कांग्रेस ज्वाइन करनी होती तो 5 ​दिन तक वे दिल्ली में नहीं रुकते। इतना ही नहीं हरक सिंह रावत के समर्थक ये भी दावा कर रहे हैं कि हरक सिंह ने बर्खास्तगी के बाद सब जगह एक ही बयान दिया कि वे भाजपा के सीनियर नेताओं से मिलने ही दिल्ली आए थे। लेकिन भाजपा ने पहले ही बाहर कर दिया। हरक सिंह समर्थकों के इस दावे में भाजपा को कहीं न कहीं मजबूती दिखती है। ऐसे में भाजपा का नेतृत्व एक बार हरक सिंह को मौका दे सकता है।

हरक सिंह से भाजपा नेताओं ने किया संपर्क

हरक सिंह से भाजपा नेताओं ने किया संपर्क

सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक से हरक सिंह की बातचीत हुई। हालांकि हरक सिंह रावत ने सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ ही बातचीत होने का दावा किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में हरक सिंह रावत की राजनीति का एक नया कदम भी देखने को मिल सकता है। हरक सिंह जिन सीटों पर प्रबल दावेदार माने जा रहे थे,उन दोनों सीटों पर भाजपा ने अब तक दावेदार घोषित नहीं किए है। डोईवाला और कोटद्वार सीट पर भाजपा अब भी टिकट फाइनल नहीं कर पाई है। भाजपा के सूत्रों का दावा है कि डोईवाला हरक सिंह के​ लिए सबसे मजबूत विकल्प हो सकता है। कोटद्वार से हरक सिंह पहले ही किनारा कर चुके हैं। हालांकि ये दावे सिर्फ सत्ता के गलियारों में हो किए जा रहे हैं। लेकिन ये बात तय है कि भाजपा का ऐसा खेमा जो कि कांग्रेसी गोत्र का माना जाता है वे सभी हरक सिंह के इस तरह पैदल किए जाने को सही नहीं मान रहे हैं।

कांग्रेस भी दो खेमों में बंटी

कांग्रेस भी दो खेमों में बंटी

हरक सिंह उत्तराखंड राजनीति के कद्दावर नेता हैं। जिनको गढ़वाल का शेर भी कहा जाता है। लेकिन फिलहाल हरक सिंह दिल्ली में कांग्रेस और भाजपा के बीच मंझधार में फंसे हुए हैं। इधर कांग्रेस में हरीश रावत खेमे के अलावा कोटद्वार, लैंसडाउन, केदारनाथ समेत कई विधानसभा सीटों पर हरक सिंह का विरोध हो रहा है। जिससे हरक सिंह को कांग्रेस में शामिल कराना बड़ा चेलेंज साबित हो सकता है। हरीश रावत का पहले ही दिन से हरक सिंह को पार्टी में लाने को लेकर रुख साफ नहीं रहा है। मीडिया के सामने भले ही हरीश रावत ने हरक सिंह के आने को लेकर किसी तरह का विरोध न किया हो, लेकिन हाईकमान के सामने हरीश रावत ने खुलकर विरोध किया है। हरक सिंह प्रकरण को लेकर कांग्रेस भी दो गुटों में बंटी हुई नजर आई है पहला हरीश रावत और दूसरा प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह। हरक सिंह को लेकर गणेश गोदियाल और प्रीतम सिंह एकमत होकर चाहते थे कि वे कांग्रेस ज्वाइन करें।

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