5 वजहें, जिनके लिए पूर्व सीएम हरीश रावत ने कर दी अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत!
पूर्व सीएम हरीश रावत ने पार्टी और संगठन के खिलाफ की सोशल मीडिया में बगावत
देहरादून, 23 दिसंबरा उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व सीएम हरीश रावत के सोशल मीडिया में डाले गए पोस्ट के बाद बवाल हो गया है। हरीश रावत ने अपने हाईकमान और संगठन दोनों के खिलाफ खुलकर नाराजगी जता दी है। इससे कांग्रेस की कलह खुलकर सामने आ गई है। हरीश रावत के पार्टी के खिलाफ बगावत के सुर बढ़ते देख हाईकमान ने उत्तराखंड के बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया है। ऐसे में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है कि हरीश रावत की नाराजगी के प्रमुख कारण क्या हैं। जो कि 5 बिंदुओं में समझे जा सकते हैं।

सीएम का प्रत्याशी घोषित न करना
उत्तराखंड में 2022 का चुनाव हरीश रावत का अंतिम चुनाव माना जा रहा है। ऐसे में हरीश रावत अपनी लोकप्रियता को देखते हुए अपने नाम को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करवाने में जुटे हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले कर्नल अजय कोठियाल को सीएम प्रत्याशी घोषित कर एक नई पहल शुरू कर दी। इसके बाद भाजपा ने भी सीएम पुष्कर सिंह धामी को अपना चेहरा घोषित कर दिया। लेकिन अब तक कांग्रेस खुलकर किसी नाम पर सहमति नहीं जता रही है। कांग्रेस प्रभारी देवेन्द्र यादव हमेशा सामूहिक नेतृत्व पर ही चुनाव लड़ने की बात करता आ रहा है। जिसके पीछे कांग्रेस का इतिहास कारण माना जा रहा है। कांग्रेस ने अभी तक किसी राज्य में चुनाव से पहले सीएम प्रत्याशी तय नहीं किया।

टिकट बंटवारे में दखल
पूर्व सीएम हरीश रावत को कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड में चुनाव अभियान की कमान सौंपी हुई है। ऐसे में हरीश रावत टिकट बंटवारे में अपनी दखल रखना चाह रहे हैं। जिसमें वे अपने तरीके से टिकट बंटवारे का फॉर्मूला चाहते हैं। लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी जिस तरह हर जिले में लाकर दावेदारों की लिस्ट तैयार कर अपनी रिपोर्ट बना रही है। साथ ही प्रभारी देवेन्द्र यादव ने पूरी रणनीति अपने हाथ में ले रखी है। उससे हरीश रावत को अपनी पॉजिशन खतरे में लग रही है।

प्रभारी से टकराव, प्रीतम से प्रभारी की नजदीकियां
हरीश रावत और प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव के बीच की बॉडिंग को लेकर पहले ही दिन से सवाल उठते आ रहे हैं। इसके बाद देवेन्द्र यादव ने उत्तराखंड के हर जिले में पहुंचकर कार्यकर्ताओं का फीडबैक भी लेकर अपने दांव खेलने शुरू कर दिए हैं। उससे हरीश रावत देवेन्द्र यादव नाराज दिख रहे हैं। साथ ही राहुल गांधी की रैली में देवेन्द्र यादव का हरीश रावत समर्थकों को मंच पर जगह न देना और पूरे कार्यक्रम को अपने हाथों में लेना हरीश रावत के गले नहीं उतरा है। साथ ही प्रभारी देवेन्द्र यादव की नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह से भी नजदीकियां हरदा के टेंशन का कारण हैं।

जिला स्तर पर हरदा को खासा तवज्जो नहीं
हरीश रावत इन दिनों पूरे प्रदेश में घूम रहे हैं, लेकिन कई जिला संगठनों ने हरीश रावत के कार्यक्रमों में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जिससे हरीश रावत की नाराजगी हैं। खुद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल मानते हैं कि संगठन में कहीं-कहीं इस तरह की शिकायत आई है, जिसे दूर किया जाएगा। हरीश रावत की नाराजगी ऐसे नेताओं से भी है, जो हरदा से दूरी बनाए हुए हैं।

प्रीतम गुट का हावी होना
जब से प्रीतम सिंह को प्रदेश अध्यक्ष से हटाकर नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। प्रीतम और हरीश रावत खेमा दो गुटो में बंटा हुआ है। लेकिन चुनाव से पहले प्रीतम खेमा खासा एक्टिव है। इस गुट में हरीश रावत के पुराने करीबी और हरीश रावत से नाराज बड़े नेता भी शामिल हो गए हैं। इतना ही नहीं पुराने कांग्रेसियों की कांग्रेस पार्टी में एंट्री के पीछे प्रीतम सिंह को ही माना जा रहा है। ऐसे में हरीश रावत को यह डर है कि प्रीतम गुट मजबूत होकर चुनाव के बाद उन पर हावी हो सकता है। जिससे उनके सीएम बनने का सपना टूट सकता है।












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