उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने पढ़ाई छोड़ क्यों पकड़ी आंदोलन की राह? जानिए

2019 और 2020 बैच के छात्रोंं का आंदोलन शुरू

देहरादून, 31 अगस्त। उत्‍तराखंड में मेडिकल के छात्रों ने पढ़ाई छोड़ आंदोलन की राह पकड़ ली है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिलने के बाद भी छात्रों का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा लगने लगा है। इसका कारण है साढ़ेे 4 साल में 18 लाख रुपए फीस जमा करना। ऐसे में छात्रों ने मेडिकल कॉलेज के कैंपस में ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार से दूसरे राज्यों की तर्ज पर सरकारी मेडिकल कॉलेज की फीस लेने की मांग की है।

350 students of 2019 and 2020 batch of Medical College open a front against the state government for reducing the fees.

दो बैच के छात्रों ने शुरू किया प्रदर्शन
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के 2019 और 2020 बैच के 350 छात्रों ने फीस कम कराने को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रों का कहना है पूरे भारत में करीब 247 मेडिकल कॉलेज हैं। लेकिन उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेज में दूसरे राज्यों से कई गुना है। छात्रों की मांग है कि उत्तराखंड सरकार को दूसरे किसी भी राज्य की फीस के बराबर फीस लेनी चाहिए। छात्रों ने बताया कि उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य यूपी में एमबीबीएस की 36 हजार सालाना फीस है। जबकि हिमाचल में 60 हजार और राजस्‍थान में 40 हजार फीस है। जबकि वे 4.26 लाख रुपए सालाना फीस भर रहे हैं। उत्तराखंड में पहले मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सिस्टम था जिसके तहत अगर कोई छात्र फीस नहीं भर सकता था तो वह कुछ साल अपनी सेवाएं पहाड़ी क्षेत्रों में दे सकता था। जो बॉन्ड नहीं भरते थे वे छात्र पहले 2 लाख अतिरिक्त फीस देते थे। छात्रों का कहना है कि बांड व्यवस्था के तहत फीस 50 हजार रुपये सालाना थी। इसके बाद 2013 से बॉन्ड न भरने वालों की फीस 4 लाख कर दी गई।

वर्ष 2019 से बॉन्ड खत्म
वर्ष 2019 में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को छोड़कर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज और सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में बॉन्ड सिस्टम खत्म हो गया। इसके बाद से पहले साल 4.26 लाख रुपए सालाना फीस और दूसरे साल 4.11 लाख फीस जमा करनी पड़ रही है। इस तरह से उत्तराखंड में सरकारी कॉलेज से डॉक्टर बनने के लिए भी 18 लाख रुपए छात्रों को भरना पड़ रहा है। जो कि छात्रों को पूरी कर पाना मुश्किल हो रहा है। छात्रों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, आयुष मंत्री डा. हरक सिंह रावत, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी समेत कई अधिकारियों व नेताओं से मिलकर अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन हर कोई आश्वासन देने की बात ही कर रहे हैं। छात्रों के विरोध को लेकर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना ने बताया कि जब छात्रों ने कॉलेज में एडमिशन लिया था तो कॉलेज में नॉन बॉन्ड वाली सीट को लेकर पूरी जानकारी दे दी गई थी। छात्रों को प्रवेश के समय ही सारी शर्तें बता दी गई थी, ऐसे में विरोध करना सही नहीं है।

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