फर्जी मुठभेड़ 2002: SC की फटकार पर UP सरकार ने अब कहा- न्याय दिलाने में लापरवाही के लिए 9 पुलिसकर्मी जिम्मेदार
बुलंदशहर, 5 नवंबर। 2002 में बुलंदशहर जिले में सिकंदराबाद में पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में बीटेक छात्र प्रदीप कुमार को मार डाला था। इस केस को अब 19 साल हो गए हैं लेकिन केस में कार्रवाई और कार्यवाही दोनों में लापरवाही की वजह से यह मामला सालों खिंचता चला गया और आरोपी पुलिसकर्मी कानून के शिकंजे से बचते रहे। इस मामले में फरार रिटायर्ड सीओ रणधीर सिंह ने इसी साल अक्टूबर के पहले सप्ताह में कोर्ट के सामने सरेंडर किया। अब तक आठ आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हो चुकी है जिनमें से चार जमानत पर जेल से बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में हुई सुनवाई में योगी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी जिसके बाद फरार आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई तेज हुई। अब इस मामले में योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा है कि इस मामले की न्यायिक प्रकिया में देरी और लेटलतीफी के लिए नौ पुलिसकर्मियों को जांच में प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाया गया है।

सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी योगी सरकार को फटकार
साल 2002 में हुए इस फर्जी मुठभेड़ के 19 साल बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने और न्याय मिलने में हुई इतनी देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए सात लाख रुपए अंतरिम जुर्माना लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकारी मशीनरी ने आरोपी पुलिसकर्मियों का बचाव किया और कार्रवाई में जानबूझकर लापरवाही बरती जिस वजह से इस फर्जी मुठभेड़ मामले में न्याय मिलने में इतने साल लग रहे हैं। योगी सरकार ने अब इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर कहा है कि सितंबर में हुई प्रारंभिक जांच में नौ पुलिसकर्मियों को इस देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया गया है। उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, साथ ही इसकी जांच में तीन महीने लग सकते हैं।

2022 के फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में होगी अगली सुनवाई
कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच के लिए योगी सरकार ने तीन महीने का समय मांगा है जिसको देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की अगली तारीख 2022 में फरवरी के पहले सप्ताह में रखी है। सुप्रीम कोर्ट से योगी सरकार ने कहा है कि कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले इन नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। साथ ही यह भी कहा कि अदालत के आदेशों का पालन कर इस मामले में त्वरित कार्यवाही कर न्याय को सुनिश्चित करने का हरसंभव प्रयास प्रदेश सरकार कर रही है। योगी सरकार ने यह भी कहा कि फर्जी मुठभेड़ मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत में कार्यवाही चल रही है। आरोपी पुलिसकर्मियों में जो रिटायर्ड हैं उनकी पेंशन रोकी गई है, जो सेवा में हैं उनके वेतन भी रोके गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जल्द से जल्द सुनवाई हो पूरी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया तेज करने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से कहा है कि आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाय, साथ ही किसी भी पक्ष के लिए अनावश्यक स्थगन की कार्यवाही न हो। 2002 में बुलंदशहर में फर्जी मुठभेड़ में मारे गए बीटेक छात्र प्रदीप कुमार के पिता यशपाल सिंह ने इस मामले में न्याय मिलने में लग रही सालों की देरी पर सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसको गंभीर मामला करार दिया था।












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