UP: पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर जल्द सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अपील दायर करेगी सरकार?

यूपी में नगर निकाय में आरक्षण का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सूत्रों की माने तो यूपी सरकार आयोग की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी और इसपर जल्द सुनवाई की विशेष अपील भी कर सकती है।

योगी आदित्यनाथ

commission on OBC quota submits report in up: उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर सुगबुगाहट शुरू हो गई है क्योंकि निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर बनाए गए पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट समय से पहले ही सीएम योगी को सौंप दी है। पूरे प्रदेश की निगाहें आयोग की 350 पेज की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। अब सरकार इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। हालांकि सरकार से जुड़े सूत्र बता रहे हैं योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट से समय से पहले इस मामले में सुनवाई को लेकर विशेष अपील कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की अपील कर सकती है यूपी सरकार

सूत्रों ने बताया कि अब आयोग की सिफारिशों के आधार पर, राज्य सरकार अगले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले प्रत्येक शहरी स्थानीय निकाय के लिए पिछड़े वर्गों के लिए आनुपातिक आरक्षण का पता लगाएगी। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार स्थानीय निकाय चुनाव अप्रैल या मई में कराना चाहती है। सरकार अप्रैल में चुनाव कराने को लेकर विशेष अपील सुप्रीम कोर्ट से कर सकती है ताकि इस मामले की समय से पहले सुनवाई हो सके क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 11 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है।

योगी

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    रिपोर्ट में आरक्षण को लेकर पाई गईं कई विसंगतियां

    एक अधिकारी ने कहा कि आयोग का कार्यकाल छह महीने का था, लेकिन उसने तीन महीने से भी कम समय में राज्य के सभी 75 जिलों का दौरा करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक,

    क्षेत्र के दौरे और जनप्रतिनिधियों और जिला अधिकारियों के साथ बैठकों के दौरान, 5 दिसंबर, 2022 को अधिसूचित स्थानीय निकायों के आरक्षण में विसंगतियां पाई गईं। निर्वाचन क्षेत्रों में आरक्षण तय करने के लिए अपनाई गई रोटेशन प्रक्रिया में भी विसंगतियां पाई गई हैं। यह पाया गया है कि कुछ स्थानीय निकाय ऐसे हैं जो 30 वर्षों से अधिक समय से ओबीसी के लिए आरक्षित नहीं हैं। साथ ही, कुछ निर्वाचन क्षेत्र ऐसे भी हैं जो पिछले तीन चुनावों में ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं। रिपोर्ट में इन विसंगतियों का उल्लेख किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई थी रोक

    उल्लेखनीय है कि 4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण दिए बिना शहरी स्थानीय निकाय चुनाव कराने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी थी। 27 दिसंबर के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि ओबीसी को आरक्षण दिए बिना चुनाव कराने से ओबीसी के लिए आरक्षण की संवैधानिक और वैधानिक आवश्यकताओं का उल्लंघन होगा।

    योगी

    दो महीने बाद आयोग ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

    दरअसल , शहरी स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिनिधित्व का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित किए जाने के लगभग दो महीने बाद, पांच सदस्यीय आयोग ने गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी 350 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। आयोग का नेतृत्व न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राम अवतार सिंह ने किया जबकि चार अन्य सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी चोब सिंह वर्मा, महेंद्र कुमार, और पूर्व अतिरिक्त कानून सलाहकार संतोष कुमार विश्वकर्मा और ब्रजेश कुमार सोनी शामिल थे।

    सुप्रीम कोर्ट

    अगले दो दिनों में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    सरकार ने कहा है कि आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक शहरी स्थानीय निकायों के आरक्षण में बदलाव किया जाएगा।' आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा के लिए शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट की एक प्रति उच्चतम न्यायालय को भी सौंपी जाएगी। कैबिनेट की बैठक के बाद नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में सबज्युडिस है और इसपर अगली सुनवाई आगामी 11 अप्रैल को होनी है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट को सरकार की ओर से अगले दो दिन के अंदर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही हम इसमें आगे बढ़ेंगे।

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