क्या है योगी सरकार का वह नया टास्क जिससे UP के 20 शहरों के लाखों लोगों को मिलेगा फायदा

लखनऊ, 19 अगस्त: उत्तर प्रदेश सरकार अगले पांच सालों में 16,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने और 10 लाख घरों वाले 20 शहरों को 'सौर सिटी' के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों की माने तो राज्य सरकार ने इसको लेकर एक मसौदा नीति तैयार की है जिसे कैबिनेट की मंजूरी बहुत जल्द मिलने की संभावना है। सरकार की वर्तमान सौर ऊर्जा नीति की जगह अब प्रस्तावित सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत इन लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ

दरअसल अधिकारियों की माने तो 2017 की नीति में 2022 तक 10,000 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन केवल 3,000 मेगावॉट ही उत्पादन हुआ है। इसे देखते हुए अगले पांच साल में 16,000 मेगावॉट उत्पादन का नया लक्ष्य बड़ा माना जा रहा है। दरअसल यूपी में सौर पार्कों द्वारा 10,000 मेगावाट, रूफटॉप के माध्यम से 4,000 मेगावाट और कृषि सौर पंपों आदि के माध्यम से 2,000 मेगावाट का उत्पादन करने की योजना बनाई गई है।

पांच साल के लिए रखा गया बड़ा लक्ष्य

यूपीनेडा के एक अधिकारी ने बताया कि कि लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन इसे हासिल करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। दरअसल नई प्रस्तावित नीति से राज्य में सौर संयंत्रों और पार्कों की स्थापना में बाधा डालने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।" उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में उपभोक्ताओं, व्यवसायों और डेवलपर्स का समर्थन करने वाले नए तंत्र को शुरू करके लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा।

20 शहरों को सौर सिटी बनाने की प्लानिंग

नई नीति के तहत, 20 शहरों को 'सौर सिटी' के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें पांच साल में राज्य भर में 10 लाख आवासीय घरों को सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन के साथ कवर किया जाएगा। इस योजना में जो शहर शामिल हैं उनमें लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, बरेली, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर, गोरखपुर, नोएडा, फिरोजाबाद, झांसी, मुजफ्फरनगर, मथुरा, अयोध्या, आजमगढ़ और मिर्जापुर हैं।

नगर निगमों को भी इससे जोड़ा जाएगा

अधिकारियों की माने तो इसी तरह, नगर निगम की संपत्तियों को सोलर रूफटॉप्स का उपयोग करके सोलराइज किया जाएगा और सभी सार्वजनिक संस्थानों जैसे हॉस्टल और प्रशिक्षण संस्थानों, पुस्तकालयों आदि को सौर ऊर्जा के माध्यम से अपनी बिजली की आवश्यकता के एक हिस्से को पूरा करने के लिए कहा जाएगा। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई और स्टार्ट-अप के तहत भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

बुंदेलखंड की गैर कृषि योग्य भूमि इसके लिए उपयोगी

यूपीनेडा द्वारा राज्य भर में आंगनबाडी केंद्रों, स्कूलों आदि में ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम जैसे सोलर पावर प्लांट, सोलर स्ट्रीट लाइट और सोलर पीवी पंप की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा। नई प्रस्तावित नीति के मुताबिक बुंदेलखंड में विशाल और बड़े पैमाने पर गैर-कृषि योग्य अनुपयोगी सरकारी एवं निजी भूमि की उपलब्धता है और इससे यूपी को वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के लिए एक अत्यधिक पसंदीदा जगह बनाए जाने में मदद मिलेगी।

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