HC: यमुना एक्सप्रेस-वे जमीन अधिग्रहण रद्द, दो महीने में मुआवजा देने या जमीन वापस करने का आदेश
यमुना एक्सप्रेस वे के लिए इस गांव की कुल 9,73,747 हेक्टेयर जमीन को अर्जेंसी क्लॉज में अधिग्रहण किया गया। चूंकि ये भूमि अध्रिग्रहण सुनियोजित विकास के लिए की गई थी, जिससे किसानों को लाभ मिलता है।
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेस-वे जमीन अधिग्रहण पर बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने 9,73,747 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 60 दिनों में किसानों को या तो मुआवजा दे दिया जाए या फिर उनकी जमीन वापस कर दी जाए। इस फैसले से किसानों को जहां बड़ी राहत मिली है। वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी को बड़ा झटका दिया गया है। गौरतलब है कि चांदपुर गांव की 9,73,747 हेक्टेयर जमीन को यमुना एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित किया गया था। लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। जिसके विरुद्ध किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए चांदपुर गांव की जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया।

2013 के कानून के तहत देना होगा मुआवजा
यूपी के गौतमबुद्ध नगर में चांदपुर गांव पड़ता है। यमुना एक्सप्रेस वे के लिए इस गांव की कुल 9,73,747 हेक्टेयर जमीन को अर्जेंसी क्लॉज में अधिग्रहण किया गया। चूंकि ये भूमि अध्रिग्रहण सुनियोजित विकास के लिए की गई थी, जिससे किसानों को लाभ मिलता है। लेकिन अथॉरिटी ने मुआवजे के लिए अपनी मनमानी की और किसानों को बगैर संतुष्ट किए ही जमीन अधिग्रहण कर ली गई। लेकिन अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2013 के नए कानून के तहत मुआवजे के भुगतान का आदेश दिया है।

किसानों को मिलेगा लाभ
किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जब याचिका दाखिल की थी तभी ये तय हो गया था कि हाईकोर्ट किसानों के हित में फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित की खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की तो जमीन अधिग्रहण में मुआवजे की प्रक्रिया को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि 60 दिन के भीतर जमीन और उस पर हुए निर्माण का मूल्यांकन किया जाए और 2013 के कानून के तहत किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जाए। जिन किसानों को नए कानून के तहत मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता तो उनकी जमीन वापस की जाए।












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