विशेष सत्र: सपा विधायक रागिनी सोनकर का छलका दर्द कहा- 'सहयोगी भी महिलाओं को गंभीरता से नहीं लेते'
लखनऊ, 23 सितंबर। गुरुवार का दिन विधानसभा में ऐतिहासिक था क्योंकि यहां पर महिलाओं के लिए विशेष सत्र रखा गया था, जिसमें पक्ष और विपक्ष की महिला विधायकों ने खुलकर अपनी बात रखी। सभी की ओर से भाजपा के इस कदम की काफी सराहना की गई है। तो वहीं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने महिलाओं के योगदान की तारीफ करते हुए कहा कि 'उन्हें भी खुलकर बोलने, प्रश्न पूछने और अपनी बात कहने की पूरी आजादी है। आज जिस तरह से सदन में महिलाओं ने अपनी बात रखी है उसकी जितनी तारीफ की जाए वो कम ही है। इस चर्चा को आज पूरे देश ने देखा है, निश्चित तौर पर इसके अच्छे परिणाम हमें देखने को मिलेंगे।'

सपा विधायक रागिनी सोनकर का छलका दर्द
जहां पक्ष ने महिलाओं के विशेष सत्र की तारीफ की, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की ओर से भी इस कदम को सही और अहम बताया गया है तो वहीं सत्र में बोलते हुए समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर का दर्द भी छलक उठा, पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर और पहली बार विधायक बनीं रागिनी सोनकर ने कहा कि 'निर्वाचित प्रतिनिधि होने के बावजूद, महिला विधायकों को पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके सहयोगी और अधिकारी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते हैं।'

'हम आपके आगे या पीछे नहीं चलना चाहते'
मछलीशहर की विधायक ने कहा कि 'ऐसा माना जाता है कि अगर महिलाएं आगे आएंगी तो पुरुष पीछे हो जाएंगे। हम आपके आगे या पीछे नहीं चलना चाहते। हम लोग तो चाहते हैं कि हम आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलें।' आपको बता दें कि रागिनी सोनकर ने दिल्ली एम्स से एमबीबीएस की और आरजी मेडिकल कॉलेज कोलकाता से एमडी किया है।

दिल्ली एम्स में नेत्र विभाग में काम करती थीं रागिनी
विधायक बनने से पहले वो दिल्ली एम्स में नेत्र विभाग में काम करती थीं। उनके पति डॉ. संदीप भी स्किन स्पेशलिस्ट हैं। तो वहीं उन्हें राजनीति अपने पिता कैलाश सोनकर से विरासत में मिली है, जो कि वाराणसी की अजगरा सीट से विधायक हैं।

'... सत्र का एक दिन केवल इसके लिए पर्याप्त नहीं '
जहां रागिनी सोनकर ने ये बात कही, वहीं दूसरी ओर सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि ' महिलाओं से जुड़ी समस्याएं इतनी ज्यादा हैं कि सत्र का एक दिन केवल इसके लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।'

38 महिला विधायकों ने चर्चा में हिस्सा लिया
आपको बता दें कि विधानसभा की विशेष चर्चा में विभिन्न दलों की महिला विधायकों ने भाग लिया, जिसमें बीजेपी की 24, सपा की 10, अपनादल (एस) की तीन और कांग्रेस की एक समेत कुल 38 महिला विधायकों ने चर्चा में हिस्सा लिया और अपने विचार सदन में रखे।
25 करोड़ आबादी तक पहुंचेगी आवाज
सतीश महाना ने कहा कि 'आजादी के 75 वर्षों के बाद आधी आबादी की आवाज इस सदन के माध्यम से 25 करोड़ आबादी तक पहुंचेगी और जल्द ही हमें इसके सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे।'












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