नीतीश कुमार को साथ लेकर UP में कुर्मी बाहुल्य 15 लोकसभा सीटों पर पैठ बनाएगी सपा ?
लखनऊ, 24 सितंबर: बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने फिलहाल भले ही यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है लेकिन समाजवादी सूत्रों की माने तो पार्टी 2024 में होने वाले आम चुनाव से पहले जनता दल (युनाइटेड) के साथ मिलकर कुर्मी बाहुल्य सीटों पर अभियान चलाने पर विचार कर रही है। सूत्रों की माने तो कम से कम 15 लोकसभा सीटें चिन्हित की गई हैं जहां कुर्मी वोटरों का निर्णायक असर होता है। हालांकि सपा का एक धड़ा नीतीश के साथ मिलकर चुनाव में जाने की प्लानिंग का विरोध कर रहा है। इस खेमे के नेता अपने अपने तर्क दे रहे हैं। हालांकि अभी इस पर अंतिम निर्णय सपा चीफ अखिलेश यादव को ही लेना है।

जेडीयू की संयुक्त रैलियों की मांग पर क्या करेगी सपा
सपा सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने यूपी में कुर्मी बहुल इलाकों में संयुक्त रैलियां करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे समाजवादी पार्टी को इस गैर-यादव ओबीसी जाति आधार को अपने पक्ष में करने में मदद मिल सके। हालांकि समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही है क्योंकि लोकसभा चुनाव में अभी समय बाकी है। हालांकि उन्होंने कहा कि सपा विपक्षी एकता की आवश्यकता में विश्वास करती है।

सपा का एक धड़ा कर रहा है इस रणनीति का विरोध
बिहार में जनता दल (यूनाइटेड)-राष्ट्रीय जनता दल की सरकार बनने के बाद लखनऊ में शुरुआती उत्साह ने संदेह को जन्म दिया है। नीतीश कुमार के आठवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद इस बार महागठबंधन सरकार के मुखिया पर, "यूपी बिहार-गयी मोदी सरकार" के नारों वाले पोस्टर यहां सपा के राज्य मुख्यालय पर लगे थे। सूत्रों ने कहा कि समाजवादी पार्टी का एक वर्ग जद (यू) की विस्तारवादी योजनाओं का कड़ा विरोध कर रहा था।

23 लोकसभा सीटों पर सपा को मिली थी विधानसभा चुनाव में बढ़त
उत्तर प्रदेश में अपना आधार बढ़ाने की जद (यू) की योजना का विरोध करते हुए, समाजवादी पार्टी के एक नेता ने कहा, "2022 यूपी विधानसभा परिणामों के अनुसार, हम 24 लोकसभा सीटों पर आगे हैं। भाजपा दोहरी सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है। केंद्र सरकार के खिलाफ और व्यक्तिगत सांसदों के खिलाफ। हम इस पर आसानी से निर्माण कर सकते हैं; हम आसानी से अपने टैली को 35 सीटों तक बढ़ा सकते हैं। ऐसे में हम उस पार्टी के साथ मिलकर क्यों काम करें जिसका उत्तर प्रदेश में कोई चुनावी आधार नहीं है?

विधानसभा चुनाव में सपा ने निकाली थी किसान नौजवान पटेल यात्रा
दरअसल 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से, भाजपा ने सफलतापूर्वक गहरी पैठ बनाई है और गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग ब्लॉक को अपने खेमे में रखने में कामयाब रही है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान, समाजवादी पार्टी ने गैर-यादव ओबीसी तक पहुंचने के लिए तेजी से अभियान चलाया था। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल के नेतृत्व वाली किसान नौजवान पटेल यात्रा ने कुर्मी वोट बैंक के साधने का प्रयास किया था लेकिन चुनाव में इसका कोई खास फायदा नहीं मिला था।

UP की 15 लोकसभा सीटों पर कुर्मी समाज का असर
यूपी में कुर्मी आबादी पूर्वी और मध्य यूपी में केंद्रित है। यह समुदाय राज्य की कुल आबादी का 4.7 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है और ये कम से कम कम से कम 15 लोकसभा सीटों पर परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं। इसको देखते हुए समाजवादी पार्टी और जदयू ने एक साथ मिलकर कुर्मी बाहुल्य इलाकों में अभियान चलाने का फैसला किया है। बदले में जद (यू) उम्मीद कर रहा है कि इस तरह की रैलियों के आयोजन से नीतीश कुमार को बड़ी भूमिका निभाने में मदद मिलेगी। हालांकि, नीतीश कुमार ने दोहराया है कि जहां वह विपक्षी एकता की दिशा में काम करेंगे, वहीं संयुक्त विपक्ष का नेतृत्व करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है।












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