माथे पर चंदन, शब्दों में दुर्गा स्तुति: जानिए कांग्रेस और प्रियंका गांधी में क्यों दिख रही बदलाव की छटपटाहट ?
लखनऊ, 11 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बदलवा की छटपटाहट साफतौर पर देखी जा सकती है। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी जब से यूपी में सक्रिय हुई हैं तब से वह सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चलने की कोशिश कर रही हैं। प्रियंका की इस सियासत पर गौर करें तो वो कभी प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगातीं दिख जाती हैं तो कभी शंकराचार्य से आशीर्वाद लेती प्रियंका की तस्वीरें वायरल होती हैं। प्रियंका ने वाराणसी में न्याय रैली के दौरान संबोधन से पहले वो मां दुर्गे के श्लोक का उच्चारण करती नजर आती हैं। क्या सब कुछ अनायास है या प्रियंका को कांग्रेस पार्टी हिंदुत्व का झंडाबरदार बनाने की नई प्लानिंग कर रही है? इस सवाल का जवाब इतना आसान नहीं है जितना हम समझ रहे हैं। क्योंकि कांग्रेस के ऊपर ऐसे आरोप इसके पहले भी लगते रहे हैं।
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राहुल गांधी भी एक बार देश भर में मंदिरों की यात्रा कर रहे थे तो यही कहा गया कि कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर आ गई। हालांकि कांग्रेस को राहुल की इन धार्मिक यात्राओं का कितना फायदा मिला यह आज भी बहस का विषय बना हुआ है। इसी क्रम में अब यूपी में प्रियंका गांधी ने यूपी में अपना मोर्चा संभाल लिया है। लखीमपुर खीरी घटना की पृष्ठभूमि में कांग्रेस और प्रियंका के राजनीतिक प्रयासों के मजबूत हस्तक्षेप की व्यापक रूप से रिपोर्ट की गई थी, एक "भक्त हिंदू महिला" के रूप में गांधी के नए अवतार पर भी ध्यान दिया गया है। नेता, जिन्हें पहले कभी-कभार ही मंदिरों में जाते देखा गया है, अब अपने भाषण की शुरुआत अपने भाषण की शुरुआत चंदन के साथ दुर्गा स्तुति के पाठ से कर रही हैं, जैसे उन्होंने रविवार को वाराणसी की एक रैली में की थी।
ममता बनर्जी की तर्ज पर छवि बदलने की कोशिश में प्रियंका
भाजपा से मुकाबले के लिए कांग्रेस में छवि बदलने की छटपटाहट दिखाई दे रही है। जिस तरह पश्चिम बंगाल में सम्पन्न हुए चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देवी मंदिरों में जाकर चंडी पाठ कर बीजेपी को उसी की भाषा में जवाब देकर अपनी जीत सुनिश्चित की, ठीक उसी तरह प्रियंका भी अब चुनाव से पहले सधे हुए कदमों के साथ आगे बढ़ रही हैं। राजनीतिक मामलों के जानकार बताते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी 1971 में बांग्लादेश कीआजादी में प्रमुख भूमिका निभाकर उग्र राष्ट्रवाद का संकेत दिया था। बैंकों के राष्ट्रीयकरण के कदमने ने उनकी इस भावना को और प्रबल करने का काम किया था।

मंदिरों का चक्कर इंदिरा भी लगाती थीं
ऐसा नहीं है कि प्रियंका आज मंदिर के चक्कर लगाकर कोई नया काम कर हरी हैं। उनकी दादी इंदिरा गांधी भी मंदिरों के चक्कर लगाया करती थीं। वह नियमित तौर पर हिन्दू मंदिरों में जाकर विपक्ष के हिन्दू प्रतीकों की राजनीति को काफी कम कर देती थीं। लेकिन 80 के दश में पूर्व पीएम प्रधानमंत्री राजीव गांधी शाहबानों केस को लेकर जिस तरह से कानून बनाया, उससे संघ को जन जन तक यह बात पहुंचाने में मदद मिली कि कांगेस का एजेंडा मुस्लिम तुष्टीकरण का है।
चुनावी रणनीति का ही हिस्सा है दुर्गा स्तुति का पाठ
अगले साल होने वाले चुनाव से पहले प्रियंका का यह अवतार देखकर राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं। विश्लेषकों का हालांकि कहना है कि यह सबकुछ चुनावी एजेंडे के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और वरिष्ठ समाजशास्त्री आनंद शंकर कहते हैँ कि,
'' कांग्रेस का यह बदला हुआ स्वरूप अगली चुनाव की रणनीति या यूं कह लीजीए कि भविष्य में कांग्रेस इसी लाइन पर आगे बढ़ेगी। क्योंकि विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही लोकसभा चुनाव भी होंगे। यह रणनीति काफी दीर्घकालिक है क्योंकि कांग्रेस के रणनीतिकारों को भी इस बात का एहसास हो गया है कि बिना हिन्दुत्व को साधे सत्ता में वापसी मुमकिन नहीं है। इसलिए इस तरह की चीजें आने वाले समय में अभी और दिखाई देंगी।''

प्रियंका ने रखा है नवरात्रि का उपवास
पिछले कुछ दिनों में, उन्होंने गांधी परिवार को "हिन्दु भक्त" के रूप में पेश करने का प्रयास किया है। 7 अक्टूबर को, जब वह लखीमपुर हिंसा में पीड़ितों के परिवारों से मिलने जा रही थीं, तो उनका पहला पड़ाव मारी माता मंदिर के बाहरी इलाके में था। और जैसे ही उनके कर्मचारियों ने मीडिया के साथ तस्वीरें साझा कीं, एक संदेश भी दिया गया कि वह नवरात्रि के पहले दिन उपवास कर रही थीं।
वाराणसी में, प्रियंका ने न केवल काशी विश्वनाथ और दुर्गा मंदिर की यात्रा की, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि मीडिया में उसका पूरा कवरेज भी मिले। भले ही मंदिर का दौरा पहले से ही गांधी द्वारा एक प्रयास की रणनीति हो - जैसा कि गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी के साथ देखा गया था। आश्चर्य तब हुआ जब प्रियंका ने दुर्गा स्तुति के साथ 'किसान न्याय' रैली में अपना संबोधन शुरू किया। इससे वो एक नए कलेवर में नजर आईं।

प्रियंका के नए अवतार से मिलेगी कांग्रेस को संजीवनी ?
हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है और पार्टी सभी धर्मों के सद्भाव में दृढ़ विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि वाराणसी की रैली सभी चार प्रमुख धर्मों - हिंदू धर्म, इस्लाम, सिख धर्म और ईसाई धर्म के उपदेशों के साथ शुरू हुई। कुछ महीने पहले प्रयागराज में संगम में प्रसिद्ध डुबकी लगाने के बाद प्रियंका के नए अवतार को उत्तर प्रदेश में बड़ी उत्सुकता से देखा जा रहा है।
बीजेपी ने प्रियंका के अवतार पर चुटकी लेते हुए कहा है कि उनके अवतार से कोई फायदा नहीं मिलेगा। बीजेपी के प्रवक्ता अवनीश त्यागी कहते हैं कि,
'' ये कांग्रेस का नया आडंबर है। जनता इनकी हकीकत पहले ही जान चुकी है। मंदिरों में जाना और माथे पर तिलक लगाने की नौटंकी ये परिवार तो पहले भी करता रहा है। यदि ये सच्चे मायने में यदि अपने आपको हिन्दुओं की चिंता करने वाले मानते हैं तो इनको कश्मीर में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को भी देखना चाहिए। वहां जाकर उनके आंसू पोछने चाहिए लेकिन इनको केवल वोट की राजनीति करनी है और कुछ नहीं''
बीजेपी की हिन्दुत्व की परिभाषा अलग है
इससे पहले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद से जब पूछा गया कि पार्टी "भाजपा के हिंदुत्व" का मुकाबला कैसे करेगी, तो उन्होंने कहा कि, "यह एक हिंदू बहुल राष्ट्र है। उत्तर प्रदेश एक हिंदू बहुल राज्य है। उनकी पार्टी का हिंदू धर्म को लेकर एक अलग सोच है। हमारा हिंदू धर्म अभियान है कि हिंदू धर्म समावेशी है, हिंदू धर्म धर्मनिरपेक्ष है। और, इसलिए हिंदू धर्म इस्लाम सहित अन्य धर्मों के साथ हाथ मिलाना चाहता है। वे कहते हैं कि हिंदू धर्म अकेला है। हम कहते हैं कि हिंदू धर्म अन्य धर्मों के साथ है। मुझे विश्वास है कि राज्य के लोग हमारे पक्ष में फैसला करेंगे।"













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