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चुनाव से पहले क्या कार्यकर्ताओं में जोश भर पाएंगे मुलायम सिंह, इनके तजुर्बे का कितना लाभ उठा पाएगी पार्टी

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लखनऊ, 15 सितंबर: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी अब चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में जोश भरने में जुट गए हैं। सपा के सूत्रों के अनुसार मुलायम सिंह अक्सर पार्टी कार्यालय पा रहे हैं और युवाओं को चुनावी रणनीति का टिप्स भी बता रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुलायम सिंह ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वो चुनाव प्रचार के लिए भी उतर सकते हैं। क्या मुलायम की यह पाठशाला नेताओं और कार्यकर्ताओं में नया जोश भर पाएगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो मुलायम सिंह के अनुभव का लाभ पार्टी को मिल सकता है। बशर्तें उनकी कही गई बातों पर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अमल करें।

मुलायम सिंह यादव

बुढ़ापे में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे मुलायम सिंह
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले, समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव बुढ़ापे के बावजूद पार्टी के मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 81 वर्षीय अनुभवी राजनेता पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए लखनऊ में समाजवादी मुख्यालय में घंटों बिता रहे हैं। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं से कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह 2022 के यूपी चुनाव के लिए प्रचार करने से नहीं कतराएंगे। संसद के मानसून सत्र के पूरा होने के बाद से, सपा के मुखिया सपा कार्यकर्ताओं को अगले साल के लिए चुनाव के लिए तैयार करने के लिए "राजनीतिक पाठशाला" सजा रहे हैं।

राज्य में एक बार फिर सपा की सरकार बनाने के लिए पार्टी को बड़े पैमाने पर पलटवार करना होगा। मुलायम सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि,''समाजवादी पार्टी को अगले साल उत्तर प्रदेश में सरकार बनानी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में युवा अहम भूमिका निभाएंगे।''

मुलायम सिंह

पार्टी के पदाधिकारी कहते हैं कि,

'' मुलायम सिंह जी अक्सर पार्टी कार्यालय आ रहे हैं। वो अपने पुराने दिनों के किस्से सुनाकर युवाओं को उसी तरह पार्टी को खड़ा करने और फील्ड में जाकर परिश्रम करने की सलाह दे रहे हैं। उनके साथ बैठकर उनके अनुभव को जानने और समझने का मौका नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिल रहा है।''

मुलायम के करीबियों को पार्टी से जोड़ने में जुटे अखिलेश

हालांकि 2017 के चुनाव से पहले ही सीएम मुलायम सिंह और अखिलेश पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी की बागडोर को लेकर तीखे विवाद में शामिल थे, लेकिन दोनों ने समय के साथ अपने तरीके बदल लिए। अखिलेश यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनके पिता के साथियों को पार्टी में शामिल किया जाए। मुलायम सिंह की करीबी रहे अंबिका चौधरी पिछले हफ्ते अखिलेश की मौजूदगी में पार्टी में लौटी थीं। उन्होंने इस साल जून में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) छोड़ दी थी। इससे पहले पूर्वांचल के नेता नारद राय भी सपा में शामिल हो गए थे। एक समय ऐसा था जब ये नेता सपा को छोड़कर चले गए थे। इसी तरह बाकी नेताओं को भी वापस लाने का प्लान अखिलेश यादव तैयार कर रहे हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर मणिकांत उपाध्याय कहते हैं कि,

'' इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुलायम सिंह के पास राजनीति का एक लंबा तजुर्बा है। उनके उस अनुभव का लाभ पार्टी को उठाना चाहिए। यदि वो कार्यालय में आकर अपना अनुभव साझा कर रहे हैं और युवआों को चुनावी मंत्र दे रहे हैं तो यह अच्छी बात है। वह हमेशा ही जमीनी पकड़ वाले नेता रहे हैं। राजनीति के दांव पेंच में उनका कोई सानी नहीं है। कई मौके पर उन्होंने पार्टी को संकट से उबारने का काम किया है। हां यह जरूर है कि अगले चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा यह कह पाना मुश्किल है। सपा को उनके समय के पुराने नेताओं को आगे लाना चाहिए ताकि उनके अनुभव का लाभ भी पार्टी को मिल सके।''

मुलायम

छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतर सकती है सपा

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2022 की शुरुआत में होने वाला है। समाजवादी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पीछे छोड़ते हुए वापसी करना चाहती है। पिछले विधानसभा चुनाव के विपरीत, जहां सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, पार्टी अध्यक्ष और मुलायम के बेटे अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि वे आगामी चुनाव छोटे दलों के साथ ही गठबंधन करेंगे। 2017 में सपा 224 सीटों के अपने पिछले प्रदर्शन से घटकर सिर्फ 47 सीटों पर रह गई थी। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं।

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English summary
Will Mulayam Singh be able to energize the workers before the assembly elections, will the party be able to take advantage of his experience?
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