सुवेंदु के PA का कत्ल और 'Glock 43X' का कनेक्शन, क्या है इस पिस्तौल की खासियत? अंडरवर्ल्ड की पहली पसंद!

Chandranath Rath Glock 43X Pistol: पश्चिम बंगाल की राजनीति में गोलियों की गूंज नई नहीं है, लेकिन सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या ने एक ऐसी 'किलर मशीन' को चर्चा में ला दिया है, जिसे दुनिया भर के निशानेबाज और सुरक्षा एजेंसियां अपना सबसे भरोसेमंद हथियार मानती हैं। हम बात कर रहे हैं ऑस्ट्रिया में बनी ग्लोक 43X (Glock 43X) पिस्तौल की।

यह वही कॉम्पैक्ट 9mm पिस्तौल है जिसे दुनिया की कई सुरक्षा एजेंसियां इस्तेमाल करती हैं। लेकिन अब यही हथियार भारत में गैंग नेटवर्क, ड्रोन स्मगलिंग और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग से जुड़े मामलों में भी दिखाई देने लगा है।

Glock 43X

छोटा आकार, तेज फायरिंग और आसानी से छिप जाने की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है। यही वजह है कि चंद्रनाथ रथ हत्याकांड के बाद लोग जानना चाहते हैं कि आखिर Glock 43X है क्या और यह भारत तक कैसे पहुंचती है। आखिर क्या है इस पिस्तौल की खासियत? क्यों भारत के अवैध बाजारों में इसकी कीमत लाखों में है और कैसे ये सरहद पार से अपराधियों के हाथों तक पहुंच रही है? आइए समझते हैं।

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क्या है ग्लॉक 43X और किसने इसे बनाया? (What is Glock 43X and who manufactured it?)

ग्लोक 43X कोई साधारण हथियार नहीं है। यह दुनिया की मशहूर हथियार निर्माता कंपनी ग्लोक (Glock Ges.m.b.H.) का एक आधुनिक शाहकार है। ऑस्ट्रिया की यह कंपनी अपनी सटीक मारक क्षमता और टिकाऊपन के लिए जानी जाती है। ग्लॉक 43X को विशेष रूप से 9mm लूगर (9x19mm) कैलिबर के लिए डिजाइन किया गया है।

इस पिस्तौल का मुख्य प्लांट ऑस्ट्रिया के ड्यूश वाग्राम शहर में है, हालांकि अमेरिका में भी इसकी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। यह एक 'कॉम्पैक्ट' श्रेणी की पिस्तौल है, जिसका मतलब है कि इसे छुपाकर रखना बहुत आसान है। यही वजह है कि इसे 'कंसील्ड कैरी' (Concealed Carry) के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन हथियार माना जाता है।

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क्यों इतनी चर्चित है यह पिस्तौल?

Glock 43X दुनिया की सबसे लोकप्रिय कॉम्पैक्ट पिस्तौलों में गिनी जाती है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत है:

  • हल्का वजन
  • तेजी से फायरिंग
  • कम रीकॉइल
  • आसानी से छिप जाने वाला डिजाइन
  • हाई रिलायबिलिटी

यही कारण है कि इसे सुरक्षा एजेंसियों से लेकर अपराधी नेटवर्क तक अलग-अलग लोग इस्तेमाल करते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि Glock पिस्तौलें खराब मौसम, धूल और लगातार इस्तेमाल में भी काफी भरोसेमंद मानी जाती हैं।

कितनी है इसकी क्षमता? (Glock 43X Specifications)

Glock 43X में सामान्य तौर पर 10 राउंड की मैगजीन आती है। हालांकि एक्सटेंडेड मैगजीन लगाकर इसकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

इसके कुछ प्रमुख फीचर्स इस तरह हैं:

  • कैलिबर: 9x19mm
  • मैगजीन क्षमता: 10 राउंड
  • वजन: लगभग 465 ग्राम
  • बैरल लंबाई: करीब 3.4 इंच
  • कुल लंबाई: करीब 6.5 इंच

विशेषज्ञों के मुताबिक इसका प्रभावी निशाना 50 मीटर तक माना जाता है, हालांकि बेहद नजदीकी दूरी पर यह ज्यादा घातक साबित होती है।

कैसे काम करती है Glock 43X?

यह एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल है। यानी ट्रिगर दबाने पर एक गोली फायर होती है और अगली गोली अपने आप चैम्बर में आ जाती है। इसमें कंपनी का मशहूर "Safe Action System" दिया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि इसमें पारंपरिक थंब सेफ्टी नहीं होती। इसके बजाय ट्रिगर आधारित सुरक्षा सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है। यानी हथियार तब तक फायर नहीं होता जब तक ट्रिगर पूरी तरह दबाया न जाए। यही डिजाइन इसे तेज प्रतिक्रिया वाले ऑपरेशन में लोकप्रिय बनाता है।

Glock 43X का एक MOS वर्जन भी आता है। MOS यानी Modular Optic System। इस मॉडल में Red Dot Sight जैसे आधुनिक ऑप्टिकल सिस्टम लगाए जा सकते हैं। इससे कम रोशनी या तेज ऑपरेशन में निशाना ज्यादा सटीक हो जाता है। यही वजह है कि MOS मॉडल सामान्य वर्जन से ज्यादा महंगा माना जाता है।

आखिर अपराधियों की पहली पसंद क्यों बनी ये पिस्तौल?

अपराधी और शूटर इस पिस्तौल के दीवाने क्यों हैं, इसके पीछे कई तकनीकी कारण हैं...

हल्का वजन और छोटा आकार: इस पिस्तौल का वजन बिना मैगजीन के महज 465 ग्राम के आसपास होता है। इसकी पकड़ (Grip) बहुत स्लिम होती है, जिससे इसे पॉकेट या कमर में छुपाकर ले जाना बेहद आसान हो जाता है।

सेफ एक्शन सिस्टम: इसमें पारंपरिक पिस्तौलों की तरह बाहरी 'थंब सेफ्टी' नहीं होती। इसमें कंपनी का पेटेंट 'सेफ एक्शन' ट्रिगर सिस्टम होता है, जिससे हथियार गिरने पर भी अचानक नहीं चलता, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह तुरंत फायर के लिए तैयार रहता है।

फायरिंग कैपेसिटी: इसमें डिफॉल्ट रूप से 10 राउंड की मैगजीन आती है। हालांकि, कस्टमाइजेशन के जरिए इसकी क्षमता को 15 से 20 राउंड तक बढ़ाया जा सकता है।

मॉडर्न फीचर्स: इसके MOS (Modular Optic System) वर्जन में आप ऊपर से 'रेड डॉट साइट' लगा सकते हैं, जिससे रात के अंधेरे में भी अचूक निशाना लगाया जा सकता है।

भारत में ग्लॉक 43X की कीमत और 'ब्लैक मार्केट' का खेल

अगर आप अमेरिका या यूरोप में हैं, तो यह पिस्तौल आपके लिए महज 450 से 500 डॉलर (करीब 38,000 से 42,000 रुपये) की होगी। लेकिन भारत में कहानी पूरी तरह बदल जाती है:

लीगल मार्केट: भारत में विदेशी हथियारों के आयात पर बहुत कड़े प्रतिबंध हैं। आम नागरिक इसे सीधे शोरूम से नहीं खरीद सकते।

अवैध बाजार: भारत के अंडरवर्ल्ड और गैंगस्टरों के बीच ग्लॉक 43X एक 'स्टेटस सिंबल' है। अवैध बाजार में इसकी कीमत 2.5 लाख से लेकर 8 लाख रुपये तक वसूली जाती है।

तस्करी का जरिया: सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से ड्रोन तस्करी के जरिए पाकिस्तान और अन्य रास्तों से ये पिस्तौलें पंजाब और हरियाणा के रास्ते भारत में दाखिल हो रही हैं।

क्या भारत में इसे खरीदना कानूनी तौर पर मुमकिन है?

भारत के हथियार कानून (Arms Act) दुनिया में सबसे सख्त माने जाते हैं। आम नागरिकों के लिए विदेशी पिस्तौल खरीदना लगभग नामुमकिन है। केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही इसकी अनुमति मिलती है:

निशानेबाज (Shooters): नेशनल लेवल के जाने-माने शूटरों को ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धा के लिए विदेशी हथियार आयात करने की छूट मिलती है।

विशेष लाइसेंस: बहुत ही दुर्लभ मामलों में, जहां जान का खतरा अत्यधिक हो, गृह मंत्रालय की अनुमति से 'रेस्ट्रिक्टेड बोर' के हथियारों का लाइसेंस दिया जा सकता है।

सुरक्षा एजेंसियां: भारत की कई स्पेशल फोर्स (जैसे NSG और SPG) ग्लॉक के विभिन्न मॉडल्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन आम जनता के लिए यह 'नो-गो जोन' है।

ग्लॉक 43X से जुड़ी खतरनाक हकीकत और सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने एक बार फिर खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लॉक 43X का इस्तेमाल यह साबित करता है कि हमलावर पेशेवर 'कॉन्ट्रैक्ट किलर्स' थे। इस पिस्तौल की रीकॉयल (झटका) बहुत कम होती है, जिससे एक नौसिखिया भी तेजी से सटीक फायरिंग कर सकता है।

पंजाब और हरियाणा में हाल ही में हुई कई बरामदगियों ने यह खुलासा किया है कि अंतरराष्ट्रीय गैंग्स अब देसी कट्टों की जगह इन विदेशी 'स्मार्ट गन्स' को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये पिस्तौलें पॉलीमर फ्रेम से बनी होती हैं, जो इन्हें हल्का और जंग-मुक्त रखती हैं, जिससे ये सालों-साल बिना किसी खराबी के काम करती हैं।

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