Mamata Banerjee 15 साल बाद CM पद से हटाई गईं, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा, अब क्या होगा?
West Bengal Governor dissolved the Assembly: पश्चिम बंगाल में 4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित हुआ जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने 200 से अधिक सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की। इस चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा ना देने पर अड़ी हुई थीं। वहीं बुधवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा उलटफेर देखा गया।
बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि के निर्देश पर पश्चिम बंगाल विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया।कोलकाता गजट में प्रकाशित इस अधिसूचना के बाद, ममता बनर्जी की पंद्रह साल पुरानी सरकार संवैधानिक रूप से खत्म हो गई है और अब वह मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रहेंगी।

यह निर्णय विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के तुरंत बाद आया, जब राज्यपाल ने पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया। जिसके बाद, पश्चिम बंगाल में 15 सालों से चला आ रहा ममता बनर्जी के सत्ता का अंत हो गया है।
क्यों राज्यपाल ने उठाया ये कदम?
याद रहे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक अपना इस्तीफा प्रस्तुत नहीं किया है।। सामान्य प्रक्रिया के तहत, एक वर्तमान मुख्यमंत्री विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने या बहुमत खोने पर इस्तीफा देते हैं। हालांकि, इस मामले में, बनर्जी के औपचारिक रूप से पद छोड़ने से पहले ही विधानसभा भंग कर दी गई है।
राज्यपाल में संवैधिानिक प्रकिया के तहत भंग की विधानसभा
ध्यान रहे यह फैसला सीधे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। राज्य सरकार की औपचारिक अधिसूचना में यह विघटन संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत बताया गया। ताकि नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो सके।संविधान का अनुच्छेद 172 कहता है कि विधानसभा का कार्यकाल सामान्यतः 5 साल होता है, लेकिन इसे पहले भी भंग किया जा सकता है। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने एक आदेश जारी किया है, जिसके अनुसार राज्य विधानसभा 7 मई से भंग मानी जाएगी।
पश्चिम बंगाल में अब आगे क्या होगा?
इसके बाद विधानसभा का कार्यकाल तुरंत समाप्त माना जाता है। विधानसभा चुनाव 2026 में बहुमत (206 सीटें) मिलने के बाद bjp के नेता को राज्यपाल सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे और मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे। बंगाल में नई सरकार के शपथ लेने तक, राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करेंगे और नौकरशाही की मदद से प्रशासन चलाएंगे।
ध्यान रहे अगर किसी चुनाव में पार्टी को बहुमत नहीं मिलता तो सरकार बनाने का दावा करने वाली पार्टी को गठबंधन के साथ मिलकर बहुमत परीक्षण (floor test) से गुजरना होता है। अगर कोई भी दल बहुमत साबित नहीं कर पाए, तो राष्ट्रपति शासन (President's Rule) लगाया जा सकता है लेकिन बंगाल में ऐसी स्थिति नहीं है।













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