Mamata की ऐतिहासिक हार, Bengal में हाहाकार! BJP के सुवेंदु के PA का मर्डर-2 बम धमाके, 72 घंटे की Timeline
Bengal Violence Two Bomb Blast: पश्चिम बंगाल में 4 मई 2026 को BJP ने 206 सीटें अपने पाले में घसीटकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पहली बार बंगाल सत्ता के दरवाजे BJP के लिए खुले। उधर, ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया। चुनावी नतीजों के महज 72 घंटे बाद राज्य में हिंसा का सिलसिला शुरू हो गया। 6 मई की रात सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मध्यमग्राम में पॉइंट ब्लैंक गोली मारकर हत्या कर दी गई। 7 मई को एक ही दिन में दो बम धमाके हो हुए।
पहले पनिहाटी में RG कार पीड़िता की मां (नई BJP MLA रत्ना देवनाथ) के घर के पास बम ब्लास्ट। फिर शाम को हावड़ा के शिबपुर में BJP अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ नेता मनोज खान को निशाना बनाकर 5-7 देसी बमों का हमला। पूरे इलाके में दहशत, दुकानों में तोड़फोड़, घायल और अफरा-तफरी। खास बात यह कि 8 मई को बीजेपी की अहम बैठक, बंगाल में होने वाली है। अटकलें यह है कि बंगाल के पर्यवेक्षक बनाए गए गृहमंत्री अमित शाह भी पहुंचने वाले हैं। इस बीच बंगाल में हिंसा ने दस्तक दे दी है। आइए जानते हैं कब-कब क्या हुआ?

Bengal Violence 72 Hours Timeline: बंगाल के पिछले 72 घंटे, 'पोस्ट-पोल वेंजेंस'
- 4 मई 2026 को BJP की 206 सीटों वाली भारी जीत दर्ज की। ममता ने सीएम की कुर्सी से इस्तीफे से इनकार किया।
- 6 मई रात करीब 10:30 बजे (मध्यमग्राम, नॉर्थ 24 परगना): सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ अपनी कार में घर लौट रहे थे। मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने कार रोकी और 8-10 राउंड गोलियां चलाईं। रथ को पॉइंट ब्लैंक रेंज में मारा गया। अस्पताल ले जाते वक्त मौत। BJP ने इसे 'टारगेटेड पॉलिटिकल असासिनेशन' बताया।
- 7 मई दोपहर (पनिहाटी): RG कार रेप-मर्डर पीड़िता की मां के आवास के पास बम विस्फोट। 5 BJP कार्यकर्ता घायल। इलाका BJP के नए MLA रत्ना देवनाथ का है।
- 7 मई शाम (शिबपुर, हावड़ा): झुग्गी-झोपड़ियों में 5-7 देसी बम फटे। BJP अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ नेता मनोज खान को निशाना बनाया गया। तेज धमाकों से ईंटें-मलबा उड़ा, लोग भागे। दुकानों में तोड़फोड़। गोलीबारी की भी खबर। 2 BJP कार्यकर्ता घायल। पुलिस ने TMC काउंसलर के पति शमीम अहमद (पहले NIA गिरफ्तारी) को मुख्य आरोपी बताया। सेक्शन 144 लागू, भारी पुलिस-RAF तैनात।
BJP ने सीधे TMC पर आरोप लगाया है कि हार के बाद 'रिवेंज हिंसा' चल रही है। TMC ने इनकार किया और कहा कि BJP कार्यकर्ता भी उसके 3 कार्यकर्ताओं की हत्या में शामिल हैं। अब तक 400 से ज्यादा गिरफ्तारियां, SIT गठित, सेंट्रल फोर्सेस बढ़ाए गए।
बंगाल की हिंसा सिर्फ 'पोस्ट-पोल' नहीं, बल्कि सत्ता हस्तांतरण का सबसे काला अध्याय
पश्चिम बंगाल में हर चुनाव के बाद हिंसा की परंपरा पुरानी है। 2021 में भी TMC की जीत के बाद BJP कार्यकर्ताओं पर हमले हुए थे। लेकिन इस बार स्थिति उलट है, BJP ने 206 सीटें जीतकर 15 साल बाद TMC का राज खत्म किया। ममता बनर्जी की पार्टी मात्र 81 सीटों पर सिमट गई। यह 'पोरिबर्तन' (परिवर्तन) था, लेकिन TMC कैडर इसे 'हार' के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे।
राजनीतिक गणित और रणनीति क्या?
सुवेंदु अधिकारी (नंदीग्राम से जीते) BJP के सबसे बड़े चेहरे हैं। उनके PA की हत्या को 'संदेश' माना जा रहा है, 'हम अभी भी सड़क पर हावी हैं'। शिबपुर हमला अल्पसंख्यक वोट बैंक में BJP की बढ़ती पकड़ को तोड़ने की कोशिश लगता है। पनिहाटी ब्लास्ट RG कार मामले (जो TMC के खिलाफ बड़ा मुद्दा बना) से जुड़ा होने से भावनात्मक रूप से और संवेदनशील है।
TMC vs BJP का जुबानी युद्ध:
- BJP: 'TMC हार स्वीकार नहीं कर पा रही, केंद्र हस्तक्षेप करे।'
- TMC: 'BJP विजय उत्सव में हम पर हमला कर रही है।'
वास्तविकता यह है कि बंगाल में कैडर-बेस्ड पॉलिटिक्स और 'टोल-टैक्स-हिंसा' की संस्कृति गहरी जड़ें जमाए हुए है। 2011 से TMC सत्ता में थी, अब सत्ता जा रही है, तो पुराने तरीके से 'इंटिमिडेशन' का खेल शुरू हो गया। 9 मई को BJP का शपथ ग्रहण समारोह (ब्रिगेड परेड ग्राउंड) है। उससे पहले हिंसा बढ़ाना नई सरकार को कमजोर दिखाने की रणनीति हो सकती है।
कानून-व्यवस्था का सवाल:
ममता सरकार के आखिरी दिनों में पुलिस पर 'TMC के एजेंट' होने के आरोप लगते रहे। अब केंद्र (अमित शाह) और नई BJP सरकार को सख्ती दिखानी होगी। CRPF की तैनाती बढ़ाई जा चुकी है। अगर हिंसा नहीं रुकी तो राष्ट्रपति शासन या बड़े स्तर पर CBI-NIA जांच की मांग जोर पकड़ सकती है।
4 मई की BJP की जीत बंगाल के लिए 'नई सुबह' थी, लेकिन 6-7 मई की हिंसा ने साबित कर दिया कि पुरानी राजनीति अभी जिंदा है। सुवेंदु अधिकारी की टीम और नई BJP सरकार के लिए यह पहला टेस्ट है, क्या वे 'पोरिबर्तन' को शांतिपूर्ण तरीके से लागू कर पाएंगे या TMC की 'रिवेंज पॉलिटिक्स' उन्हें घेर लेगी?
72 घंटे में हत्या और दो बम धमाके सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि बंगाल की सत्ता हस्तांतरण की सबसे बड़ी चुनौती हैं। पुलिस जांच चल रही है। पूरा राज्य और देश 9 मई के शपथ ग्रहण तक नजर रखे हुए है। बंगाल जल रहा है, क्या नई सरकार इसे बुझा पाएगी?













Click it and Unblock the Notifications