रामपुर के नवाब की संपत्ति क्यों जब्त करवाना चाहते हैं आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ? जानिए

लखनऊ, 30 जनवरी: रामपुर जिले में इस बार विधानसभा चुनाव का मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। स्वार सीट पर बीजेपी की सहयोगी पार्टी ने एक मुस्लिम उम्मीदवार हैदर अली खान को उतारा है, जो रामपुर नवाब के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। जबकि, समाजवादी पार्टी ने पिछली बार वहां से जीत दर्ज करने वाले को ही टिकट दिया है, जो पार्टी के भरोसेमंद सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम हैं। लिहाजा इस बार स्वार सीट पर लड़ाई कांटे की होती दिख रही है। एक तरफ आजम खान परिवार का राजनीतिक वर्चस्व है तो दूसरी ओर भी सियासी तौर पर काफी ताकतवर और संपत्तिशाली शख्स मैदान में है। इस स्थिति में सपा प्रत्याशी ने कह दिया है कि रामपुर नवाबों की संपत्ति जब्त करके उसे सरकारी संपत्ति घोषित किया जाना चाहिए और जल्द ही वह इसको लेकर अभियान भी चलाएंगे।

रामपुर नवाब की संपत्ति जब्त करवाना चाहते हैं अब्दुल्ला आजम

रामपुर नवाब की संपत्ति जब्त करवाना चाहते हैं अब्दुल्ला आजम

समाजवादी पार्टी नेता आजम खान के बेटे और स्वार विधानसभा सीट से पार्टी उम्मीदवार अब्दुल्ला आजम रामपुर नवाब की संपत्ति जब्त करवाना चाहते हैं और इसको लेकर जल्द ही वह आंदोलन भी शुरू करेंगे। अब्दुल्ला हाल ही में जमानत पर जेल से छूटकर निकले हैं और उससे पहले फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मसले पर उनकी विधायकी छिन चुकी है। 2017 में वह इसी सीट से चुने गए थे। स्वार सीट पर रामपुर के नवाब खानदान के सदस्य हैदर अली खान चुनाव मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने टिकट दिया है। दरअसल, आजम खान और रामपुर के नवाब के परिवार 1980 के दशक से ही एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं।

हैदर अली खान कौन है- अब्दुल्ला आजम

हैदर अली खान कौन है- अब्दुल्ला आजम

न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में जब अब्दुल्ला आजम से उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और अपना दल (सोनेलाल) उम्मीदवार हैदर अली खान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब में कहा कि 'हैदर अली खान कौन है......मैं उन्हें नहीं पहचानता।' जब उनसे बीजेपी की ओर से सपा को पाकिस्तान की हिमायती 'जिन्नावादी' और 'तमंचावादी' कहे जाने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बीजेपी पहले लखीमपुर खीरी में मारे गए किसानों के परिवार को न्याय दिलाए। फर्जी प्रमाण पत्र की वजह से विधायकी छिने जाने पर उनकी अभी भी सफाई है कि 'न तो मेरा जन्म प्रमाण पत्र और ना ही पासपोर्ट फर्जी था। बल्कि, मुझे तो आशंका है कि बीजेपी मेरा नामांकन ही रद्द करवा सकती है।'

परिवार को फंसाने का आरोप लगाया

परिवार को फंसाने का आरोप लगाया

अपने जेल के दिनों को उन्होंने बुरा सपना बताया और कहा कि इससे बहुत ही ज्यादा सबक मिली है। उनका आरोप है कि उनके परिवार को जानबूझकर फंसाया गया है और उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की गई है। उनके मुताबिक 'सिर्फ जेल में बिताए दो साल ही नहीं, बल्कि पिछले पांच साल ने मुझे बहुत कुछ सिखा दिया है।' 'यह बहुत ही बुरा सपना था।' अब्दुल्ला 2017 में स्वार से जीते थे, लेकिन 2019 में फर्जी सर्टिफिकेट में सदस्यता जाने के बाद, वे और उनके पिता आजम खान और मां तंजीन फातिमा ने इसके अलावा कुछ और मामलों में फरवरी, 2020 में सरेंडर कर दिया था और सीतापुर जेल भेज दिए गए थे।

'अंग्रेजों की वफादारी के चलते मिली संपत्ति जब्त हो'

'अंग्रेजों की वफादारी के चलते मिली संपत्ति जब्त हो'

अब सपा उम्मीदवार अब्दुल्ला आजम का कहना है कि रामपुर के नवाबों को जो संपत्ति मिली हुई है, वह 'अंग्रेजों की वफादारी' के चलते मिली है, इसलिए इसे जब्त किया जाना चाहिए और जल्द ही इस संबंध में आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'रामपुर नवाब के परिवार के लोग अंग्रेजों के प्रति वफादार थे, इसी वजह से उन्हें अवॉर्ड और खिताब दिए गए थे। ऐसे लोगों की भारत में कई जगह नहीं है।' उनका कहना है कि 'उन्हें जो संपत्ति देश को धोखा देने के लिए दी गई, उसे जब्त किया जाना चाहिए। रामपुर में इसके लिए एक आंदोलन चलाया जाएगा, ताकि इसे सरकारी संपत्ति बनाया जा सके।'

23 महीनों से जेल में आजम खान

23 महीनों से जेल में आजम खान

अब्दुल्ला के पिता आजम रामपुर से सपा सांसद हैं और उनके खिलाफ 100 से ज्यादा केस दर्ज हैं। वे पिछले 23 महीनों से जेल की सलाखों के पीछे हैं। सांसद होते हुए भी अखिलेश यादव ने उन्हें रामपुर शहर से इस बार उम्मीदवार बनाया है। जबकि, दिसंबर, 2020 में जेल से बाहर आईं आजम की पत्नी तंजीन फातिमा अभी रामपुर शहर से विधायक हैं।

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