UP कांग्रेस की कमान संभालने के लिए तैयार नहीं कोई नेता ?, जानिए कैसे बढ़ीं प्रियंका गांधी की मुश्किलें

लखनऊ, 03 अगस्त : उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव सम्पन्न हुए चार महीने बीत चुके हैं। चुनाव में मिली करारी हार के बाद ही तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उस इस्तीफे के बाद ऐसी अटकलें थी कि अगले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) को नया बॉस मिल जाएगा लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी नया अध्यक्ष नहीं मिल पाया है। कांग्रेस की सूत्रों की माने तो पार्टी की हालत को देखते हुए यूपी के नेता अध्यक्ष की कुर्सी संभालने से किनारा कर रहे हैं जिससे Uttar Pradesh प्रभारी प्रियंका गांधी की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।

कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में फैल रही निराशा

कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में फैल रही निराशा

यूपी कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता उम्मीद कर रहे थे कि पार्टी नेतृत्व 13-15 मई के दौरान उदयपुर में आयोजित "कांग्रेस चिंतन शिविर" से पहले एक नया राज्य प्रमुख नियुक्त करेगा, ताकि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) का प्रतिनिधित्व किया जा सके और यूपी में पार्टी को नई शुरूआत हो सके। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। इसके बाद नेताओं को उम्मीद थी कि प्रियंका अपनी लखनऊ यात्रा के दौरान नए प्रमुख की घोषणा करेंगी, लेकिन वो भी नहीं हुआ। चार महीने बाद भी अध्यक्ष के न आने से कांग्रेस नेताओं में निराशा फैलती जा रही है।

दूसरी पार्टियों के मुकाबले पीछे होती जा रही कांग्रेस

दूसरी पार्टियों के मुकाबले पीछे होती जा रही कांग्रेस

पार्टी के एक नेता ने कहा कि, " हर कोई जानता है कि अध्यक्ष की नियुक्ति प्रियंका जी के मुहर के बाद ही होनी है। लेकिन जब एक तरफ जहां दूसरी पार्टियां नगर निंग चुनावों और यहां तक ​​कि 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर चुकी हैं, ऐसे में हमारे पास राज्य इकाई का प्रमुख का न होना चिंता की बात है। इससे चुनावी तैयारियों पर असर पड़ रहा है। हमें डर है कि यूपी में चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी को फिर से खड़ा करने और कार्यकर्ताओं को मोबलाइज करने में हम पीछे होते जा रहे हैं।''

नए अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस में चल रहा है मंथन

नए अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस में चल रहा है मंथन

उन्होंने कहा कि हालांकि विभिन्न कारणों से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) के नए प्रमुख के चयन में देरी हो रही है, जिसमें जाति के अलावा अन्य फैक्टर भी शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या यूपी जैसे विशाल राज्य को केवल एक अध्यक्ष को सौंपा जाना चाहिए या यदि इसे विभिन्न नेताओं के नेतृत्व में चार क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है। हालांकि प्रियंका ने भी अपने एक बयान में कहा था कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व यूपी में चार अध्यक्षों की थ्योरी की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।

ज्यादातर नेता प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं

ज्यादातर नेता प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं

पार्टी के एक दिग्गज ने दावा किया कि उनसे भी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए संपर्क किया गया था। कांग्रेस के इस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि, "कई वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) की कमान एक युवा नेता को दी जाए। दरअसल पार्टी को दोबारा खड़ा करना एक कठिन काम है और मौजूदा परिस्थितियों में काम करना मुश्किल है। इसलिए ज्यादातर लोग इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। "

नए अध्यक्ष के दावेदारों में ये नाम शामिल

नए अध्यक्ष के दावेदारों में ये नाम शामिल

पार्टी सूत्रों ने कहा कि अध्यक्ष बनने के प्रमुख संभावितों में वरिष्ठ दलित नेता पी एल पुनिया हैं। वह छत्तीसगढ़ के प्रभारी हैं। एक अन्य प्रमुख उम्मीदवार दलित नेता बृजलाल खाबरी हैं। इन्होंने पैसे के लिए टिकटों की बिक्री का आरोप लगाते हुए 2016 में बसपा छोड़ दी थी। बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। खाबरी वर्तमान में बिहार के सचिव प्रभारी होने के अलावा कांग्रेस के एससी विभाग के उपाध्यक्ष हैं। अन्य संभावितों में पार्टी के ओबीसी चेहरा वीरेंद्र चौधरी भी शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व सांसद राजेश मिश्रा और प्रमोद तिवारी शामिल हैं, जिन्हें पार्टी ने हाल ही में दूसरे राज्य से राज्यसभा के लिए नामित किया है।

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