कौन हैं सलीम इकबाल शेरवानी, जिन्होंने स्वामी प्रसाद के बाद दिया अखिलेश यादव को दूसरा बड़ा झटका
Saleem Iqbal Shervani: लोक सभा चुनाव आने वाले हैं और इधर उत्तर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी को आम चुनाव से पहले बड़े झटकों ने झकझोर दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद सलीम इकबाल शेरवानी ने भी अखिलेश का साथ छोड़ दिया है।
पांच बार के सांसद रहे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सलीम इकबाल शेरवानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजे गए त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वे (अखिलेश) पीडीए को महत्व नहीं दे रहे हैं। इससे सवाल उठता है कि अखिलेश भाजपा से कैसे अलग हैं।

कौन हैं सलीम इकबाल शेरवानी?
22 मार्च 1953 को जन्मे सलीम इकबाल शेरवानी एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो अपने करियर के अधिकांश समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में रहे हैं। उन्होंने 8वीं, 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में उत्तर प्रदेश के बदांयू निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
राजीव गांधी के करीबी सहयोगी रहे सलीम ने 1996 से 1997 तक केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री और 1997 से 1998 तक प्रधान मंत्री आई.के. गुजराल के नेतृत्व वाली सरकार में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री का पदभार संभाला था।
शेरवानी इलाहाबाद के एक धनी पठान उद्योगपति परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह न्यौली शुगर फैक्ट्री के मालिक और कृषि इंटर कॉलेज के अध्यक्ष हैं। शेरवानी परिवार का इंदिरा गांधी और उनके पिता से गहरा नाता है। राजीव गांधी के पास जब वो संवेदना व्यक्त करने गए थे, तब राजीव ने जोर देकर कहा कि वह चुनाव लड़ें।
आखिरकार उनके लिए बदायूं निर्वाचन क्षेत्र की पहचान की गई और उन्होंने वहां कई चुनाव जीते। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सलीम शेरवानी कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।
हालांकि, 2009 में उत्तर प्रदेश में भारतीय आम चुनाव में, मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव को समायोजित करने के लिए समाजवादी पार्टी ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया। इसके बाद शेरवानी फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए।
साल 2020 में एक बार फिर सलीम ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली। 2024 लोक सभा से पहले सपा को बड़ा झटका देते हुए शेरवानी ने एक बार फिर सपा को बाय-बाय कह दिया है।












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