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यूपी में किस जाति के सबसे ज्यादा MLA चुने गए और किसके सबसे कम ? सभी दलों का पूरा आंकड़ा देखिए

लखनऊ, 14 मार्च: उत्तर प्रदेश में 18वीं विधानसभा के लिए कुल 403 विधायक विभिन्न जाति और धर्मों से चुने गए हैं। पसंद और नापसंदगी की बात अलग है, लेकिन भारत में कोई भी चुनाव जाति और धर्म से परे नहीं होते। यूपी सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है, इसलिए इस मायने में भी इसका दायरा सबसे विशाल होना स्वाभाविक है। हम यहां हर जाति और किस पार्टी में उनको कितना प्रतिनिधित्व मिला है, उसके पूरे आंकड़े जुटाकर लाए हैं। कई आंकड़े बहुत ही चौंकाने वाले हो सकते हैं। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी गठबंधन से इस मामले समाज के सबसे बड़े तबके को नुमाइंदगी मिली है।

403 सीटों पर विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व

403 सीटों पर विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व

यूपी चुनाव में जीतकर विधानसभा पहुंचे विभिन्न जातियों और धर्मों के विधायकों का अलग-अलग ब्योरा देखने से पहले मोटे तौर पर इसके आंकड़े पर गौर फरमा लीजिए। अगर संप्रदाय के हिसाब से देखें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों के लिए सिख समुदाय से एक विधायक चुना गया है। उसके बाद मुसलमानों की संख्या है, जिनकी तादाद 2017 के मुकाबले 10 बढ़ी है और कुल 34 मुस्लिम विघायक चुने गए हैं। बाकी 368 एमएलए हिंदू हैं। जहां तक मुस्लिम विधायकों की बात है तो सारे के सारे सपा गठबंधन से चुनाव जीते हैं और सिख समुदाय के एकमात्र विधायक बलदेव सिंह औलख बिलासपुर सीट से भाजपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा के सदस्य चुने गए हैं।

पिछड़ी जातियों के सबसे ज्यादा विधायक

पिछड़ी जातियों के सबसे ज्यादा विधायक

अब चुने गए 368 हिंदू विधायकों को उनकी अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से देखें तो इनमें सबसे अधिक तादाद यानि 151 पिछड़ी जातियों के विधायकों की हैं। इनमें बीजेपी गठबंधन से सबसे ज्यादा 90 विधायक बने हैं, सपा गठबंधन के 60 और 1 विधायक कांग्रेस के टिकट पर चुना गया है। इसके बाद 131 विधायक ऊंची जातियों के हैं। इनमें से 117 भाजपा गठबंधन, 11 सपा गठबंधन और 1-1 बीएसपी, कांग्रेस और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के हैं। इसके बाद अनुसूचित जातियों और जनजातियों के विधायकों की संख्या है, जो कि 86 हैं। यहां भी सबसे बड़ी संख्या यानि 65 बीजेपी गठबंधन के पास है, 20 समाजवादी गठबंधन के पास और 1 जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक ) के पास।

दहाई अंकों से कम विधायकों वाली जातियां

दहाई अंकों से कम विधायकों वाली जातियां

अब हम उन जातियों के विधायकों की बात कर रहे हैं, जिनकी संख्या कुल मिलाकर दहाई अंकों का पार नहीं कर सकी है। 1 सिख एमएलए की बात तो हम ऊपर कर ही चुके हैं। इसी तरह बाल्मीकि समाज से भी 1 ही विधायक चुना गया है। इसी तरह कायस्थ-3 और धोबी-4 हैं। ये सभी बीजेपी गठबंधन से जीते हैं। 4 विधायक राजभर समाज से हैं, जिनमें 1 बीजेपी गठबंधन और 3 सपा गठबंधन से चुना जीता है। भूमिहारों की संख्या 5 है। चार बीजेपी गठबंधन से और एक सपा गठबंधन से। गुर्जर विधायकों की संख्या 7 (5 बीजेपी गठबंधन और 2 सपा गठबंधन) है। कलवार, तेली, सोनार जातियों के भी 7 विधायक हैं- 6 भाजपा+ और 1 सपा+ । निषाद, कश्यप और बिंद जाति के विधायकों की संख्या 8 है और इसमें भी बीजेपी गठबंधन भारी पड़ा है और उसके 6 और सपा गठबंधन के 2 विधायक चुने गए हैं। कोरी जाति के 8 विधायक चुने गए हैं और सारे के सारे बीजेपी गठबंधन से जीते हैं।

कुल 15 जाट विधायक चुने गए, बीजेपी से ज्यादा

कुल 15 जाट विधायक चुने गए, बीजेपी से ज्यादा

अब हम दहाई अंकों को पार करने वाली जातियों का ब्योरा दे रहे हैं। कई अन्य पिछड़ी जातियां जिनका जिक्र ऊपर नहीं हुआ है, उनके विधायकों की संख्या 10 है। इनमें 7 बीजेपी गठबंधन और 3 सपा गठबंधन से जीते हैं। इसी तरह से अन्य एससी/एसटी जातियों के विधायकों की संख्या 12 है। 11 बीजेपी गठबंधन से और सिर्फ 1 सपा गठबंधन से चुनाव जीता है। मौर्य, कुशवाहा, शाक्य, सैनी विधायकों की संख्या इसबार 14 है। इनमें भी भाजपा और उसके सहयोगी बहुत ज्यादा भारी पड़े हैं और 14 में से 12 इन्हीं के टिकटों पर जीते हैं। सपा गठबंधन के टिकट पर जीतने वालों की संख्या सिर्फ 2 है। इस चुनाव में जाटों का बहुत जिक्र हो रहा था। तरह-तरह के नरेटिव तैयार किए गए थे। इसबार कुल 15 जाट विधायक चुनाव जीते हैं और बीजेपी गठबंधन से 8 जाट एमएलए बने हैं। जबकि, आरएलडी और सपा गठबंधन यहां भी पिछड़ गई है और उसके सिर्फ 7 जाट उम्मीदवार चुनाव जीते हैं।

27 यादव और 29 जाटव विधायक बने

27 यादव और 29 जाटव विधायक बने

यूपी चुनाव में जीतने वाले लोध विधायकों की संख्या इसबार 18 है। इनमें भाजपा गठबंधन से 15 और सपा गठबंधन से 3 को जीत मिली है। बनिया/ खत्री समाज से कुल 22 लोग चुने गए हैं और इनमें से 21 बीजेपी गठबंधन से जीते हैं और सपा गठबंधन से सिर्फ 1 को सफलता मिली है। लेकिन, जब बारी यादव समाज की आती है तो कहानी पूरी तरह से पलटी हुई नजर आती है। कुल 27 यादव विधायक चुने गए हैं, जिसमें से 24 सपा गठबंधन से और सिर्फ 3 बीजेपी गठबंधन से जीते हैं। पासी समाज से जीतने वालों की तादाद भी 27 ही है। 18 बीजेपी गठबंधन से, 8 सपा गठबंधन से और 1 जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) से चुनाव जीता है। इस चुनाव में मायावती का कद जरूर कम हुआ है, लेकिन कुल 29 जाटव विधायक चुने गए हैं। इसमें भी बीजेपी गठबंधन का पलड़ा भारी है और इससे 19 एमएलए चुने गए हैं और सपा गठबंधन से सिर्फ 10 विधायक।

सबसे ज्यादा 52 ब्राह्मण विधायक चुने गए

सबसे ज्यादा 52 ब्राह्मण विधायक चुने गए

कुर्मी/सैंथवार जाति के कुल 41 विधायक बने हैं, जिसमें भाजपा गठबंधन से 27 और सपा गठबंधन से 13 और 1 कांग्रेस से चुने गए हैं। इस बार के चुनाव कुल 49 राजपूत उम्मीदवारों को कामयाबी मिली है। इनमें से 43 भाजपा गठबंधन से, सिर्फ 4 सपा गठबंधन से, 1 जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) और 1 बीएसपी के टिकट पर जीते हैं। लेकिन सबसे अधिक इसबार ब्राह्मण विधायक चुने गए हैं, जिनकी संख्या 52 है। इनमें भी सबसे ज्यादा 46 भाजपा गठबंधन से, 5 सपा गठबंधन से और 1 कांग्रेस के टिकट पर जीते हैं। आंकड़ों से यह साफ हो जा रहा है कि मुसलमान, यादव और राजभर को छोड़कर सभी तबकों में बीजेपी गठबंधन का ही बोलबाला रहा है।

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