जब शिवपाल यादव की चिट्ठी से परेशान हो गए थे अखिलेश, जानिए क्या था लेटर में ?
इलाहाबाद। सपा नेता शिवपाल यादव पिछले कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी से अनदेखी झेल रहे थे। अब उन्होंने कहा है कि सपा में जो उपेक्षित महसूस कर रहे हैं वह मेरे पास आ जाएं। उन्होंने छोटे-छोटे दलों को जोड़ने की बात कही है। इन सब के बीच दोनों नेता से जुड़ा किस्सा है जब शिवपाल की एक चिट्ठी ने अखिलेश को परेशान कर दिया था।

बात पिछले विधानसभा चुनाव के पहले की है। जब समाजवादी पार्टी का परिवारिक कुनबा उथल-पुथल के दौर से गुजरने लगा था। उस वक्त शिवपाल यादव ने इलाहाबाद के तत्कालीन जिला अध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव को एक खत भेजा था और उस खत में पार्टी के अंदर शुरू होने वाली गुटबाजी का संकेत दे दिया था। उस खत में शिवपाल ने पार्टी के सभी विधायक व विधान परिषद सदस्यों और सभी जिम्मेदार पदाधिकारिओं को निर्देश जारी किया था कि वह शनिवार व रविवार को जनता के समक्ष जाएंगे और जनसुनवाई करेंगे।
उस समय अखिलेश अपनी टीम तैयार कर रहे थे और विधायकों और संगठन के लोगों से इन्हीं दो दिनों में विशेष तौर पर उनकी मुलाकात होती थी। साथ ही उन्हीं लोगों को टिकट देने की प्लानिंग चल रही थी जो अखिलेश के करीबी थे। ऐसे में शिवपाल यादव की चिठ्ठी से अखिलेश परेशान हो गए थे और यह लगभग तय हो गया था कि अब पार्टी में दरार और आगे तेजी के साथ बढ़ेगा। यहां से अब यह भी साफ हो गया था कि अखिलेश भले ही बढ़त बनाए हो लेकिन संगठन पर सारा जोर और पार्टी की कमान शिवपाल के ही पास है।
शिवपाल सब कुछ अपनी चिट्ठी को लेकर सिर्फ इतना कहते नजर आए कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाना चाहिए और उनकी समस्या का निदान होना चाहिए। अगर जनता के समक्ष समस्या रहेगी और जनता संतुष्ट नहीं रहेगी तो उसका नुकसान उठाना पड़ेगा। उनके द्वारा दिया गया निर्देश पार्टी के हित में है। हालांकि लगातार बढ़ती दूरियों का क्रम अपने अंतिम पड़ाव को पार कर गया है और साइड लाइन कर दिए गए शिवपाल यादव ने अपनी नई पार्टी बना ली है।












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