Kavach System: रेल दुर्घटनाओं को रोकने वाला क्या है कवच सिस्टम? जानिए कैसे करता है काम
Dibrugarh Gonda Train Accident: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में गुरुवार 18 जुलाई की दोपहर बड़ा रेल हादसा हो गया। यहां चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के 4 डिब्बे गोंडा-मनकापुर सेक्शन में पटरी से उतर गए। इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस हादसे पर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दुख जताया है। हालांकि, इस हादसे के बाद अब यह सवाल उठा रहा है कि आखिर क्यों एक्सीडेंट से बचाने वाले कवच सिस्टम ने काम क्यों नहीं किया। जानिए क्या है रेलवे का कवच सिस्टम? कैसे करता है काम...

क्या है रेलवे का कवच सिस्टम
रेलवे का 'कवच' सिस्टम स्वदेशी तकनीक है, जिसे रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए साल 2002 में डिजाइन किया गया था। लेकिन, कवच सिस्टम पर काम करने की शुरूआत साल 2012 में हुई थी। वहीं, इसका पहला परीक्षण 2016 में हुआ था। इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है। खबर के मुताबिक, साल 2023 तक कवच सिस्टम दक्षिण-मध्य रेलवे में यह 1098 किलोमीटर के रूट और 65 लोकोमोटिव में लगाया जा चुका है।
कैसे करता है काम
जानकारी के मुताबिक, रेलवे का यह कवच सिस्टम एक तरह की डिवाइस है जो ट्रेन के इंजन के अलावा रेलवे के रूट पर भी लगाई जाती है। इससे दो ट्रेनों के एक ही ट्रैक पर एक-दूसरे के करीब आने पर ट्रेन सिग्नल, इंडिकेटर और अलार्म के ज़रिए ट्रेन के पायलट को इसकी सूचना मिल जाती है।
ट्रेन के पायलट को अलर्ट देता है कवच सिस्टम
अगर ट्रेन का ड्राइवर सिग्नल को तोड़कर आगे निकल जाता है तो कवज सिस्टम अपने आप एक्टिव हो जाता है। एक्टिवेट होने के तुरंत बाद ही कवच सिस्टम ट्रेन के पायलट को अलर्ट करता है और ब्रेक को नियंत्रित करता है। अगर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता चलता है, तो यह टक्कर को रोकने के लिए पहली ट्रेन को रोक देता है।
सरल शब्दों में कहे तो यदि एक ही ट्रैक पर दो रेलगाड़ियां आपस में टकरा रही हों तो कवच सक्रिय होकर दोनों रेलगाड़ियों को रोक देता है और दुर्घटना टालता है। वर्तमान में भारत में कई रेल मार्गों पर कवच प्रणाली नहीं है। जलपाईगुड़ी के रूट पर भी कर सिस्टम इंस्टॉल नहीं है।












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