मल्हनी सीट को लेकर क्या है बीजेपी का गेम प्लान, जानिए बाहुबली धनंजय सिंह को किसने दिलाया टिकट
लखनऊ, 17 फरवरी: उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले की मल्हनी सीट पर सियासी समीकरण पिछले कुछ दिनों के भीतर काफी तेजी से बदला है। बीजेपी और जेडीयू के बीच यूं तो यूपी में चुनावी गठबंधन नहीं हुआ है लेकिन मल्हनी से धनंजय सिंह को उम्मीदवार बनाने के पीछे बीजेपी की सोची समझी रणनीति काम कर रही है। कुछ दिनों पहले यूपी पुलिस की हिट लिस्ट में 25000 रुपए के इनामी बदमाश रहे धनंजय के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो गई हैं। बताया जा रहा है कि वह बीजेपी से टिकट मांग रहे थे लेकिन उनकी आपराधिक छवि आड़े आ रही थी इसलिए उनके लिए बीजेपी ने नया रास्ता खोज निकाला और केंद्र में सहयोगी पार्टी जेडीयू से टिकट दिलवा दिया। दरअसल बीजेपी धनंजय सिंह के सहारे मल्हनी सीट का इतिहास बदलना चाहती है। बीजेपी को पता है उसके पास ऐसा कोई उम्मीदवार नहीं है जो मल्हनी में धनंजय सिंह का विकल्प बन सके। लिहाजा बीजेपी ने अब काफी सधी हुई चाल चली है जिससे सपा को आसानी से पटकनी दे सकती है।

मल्हनी में धनंजय सिंह का प्रभाव आज भी बरकरार
पूर्वांचल के बाहुबलियों में शुमार पूर्व सांसद धनंजय सिंह इस बार निर्दलीय नहीं, बल्कि जदयू पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। इस बार उनका चुनाव चिन्ह तीर होगा। दो बार निर्वाचित विधायक और एक बार सांसद रह चुके बाहुबली धनंजय सिंह भले ही कई महीनों से राजनीतिक मंच से गायब हैं, लेकिन उनका प्रभाव आज भी बरकरार है। इसके चलते जदयू से टिकट मिल गया है।
अजीत सिंह हत्याकांड में आरोपी हैं धनंजय सिंह
दरअसल, लखनऊ के चर्चित अजीत सिंह हत्याकांड में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह का भी नाम शामिल है। इस मामले में पुलिस ने धनंजय सिंह पर 25 हजार रुपये का इनाम भी रखा है। कुर्की का आदेश पहले ही किया जा चुका है। लेकिन जौनपुर से लेकर और भी कई जगह उनकी कई तस्वीरें और वीडियो खुलेआम वायरल हो चुके हैं. कभी धनंजय सिंह लोगों के साथ क्रिकेट खेलते नजर आए तो कभी शादी समारोह और अन्य उद्घाटन समारोह में।
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बाहुबली धनंजय सिंह का आज भी है असर
धनंजय सिंह का अभी भी मल्हनी में प्रभाव है। दरअसल, मल्हानी विधानसभा पहले रारी थी। यहां से कांग्रेस, लोक दल, जनता दल या समाजवादी के लोगों का प्रतिनिधित्व किया गया। सूत्र बताते हैं कि यह क्षेत्र मुख्य रूप से यादवों और मुसलमानों के लिए एक मजबूत सीट माना जाता था। 2002 के चुनावों में, निर्दलीय धनंजय सिंह ने अप्रत्याशित रूप से चुनाव जीता, सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। 2007 में निर्दलीय जीते। 2009 में सांसद चुने गए। उपचुनाव में उनके पिता यहां से विधायक चुने गए।
मोदी लहर में भी पारसनाथ यादव ने चटाई धूल
धनंजय सिंह ने 2007 का चुनाव भाजपा की सहयोगी जदयू से लड़ा था। 2012 में भी वह टिकट लेना चाहता था, लेकिन नहीं मिला। उनकी पत्नी ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बसपा से पाणिनी सिंह आए, लेकिन तीसरे नंबर पर रहे, जबकि धनंजय दूसरे नंबर पर रहे। 2017 में जब धनंजय सिंह ने बीजेपी की आंधी में निर्दलीय चुनाव लड़ा था। पारस यादव सपा से हारे हालांकि इस चुनाव में वह दूसरे नंबर पर रहे थे। सरकार का प्रचंड बहुमत, मोदी के साथ मुख्यमंत्री योगी की लहर, पूरी कैबिनेट, पूरे राज्य के नेता मल्हानी में जमे रहे, लेकिन धनंजय सिंह को स्वतंत्र रूप से ऐतिहासिक 70 हजार वोट मिले। हालांकि इस बार उन्हें करीब 4,000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
6 जुलाई को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 25 हजार के इनामी धनंजय सिंह को 6 जुलाई 2021 को भगोड़ा घोषित किया था। जिसके बाद पुलिस ने उसके घर पर 82 का नोटिस भी चस्पा किया था। धनंजय सिंह पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह हत्याकांड में आरोपी है। अदालत ने प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली धनंजय की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने धनंजय को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था, लेकिन धनंजय सिंह अभी तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं। इनामी अपराधी होने के बाद भी योगी आदित्यनाथ की सरकार में धनंजय सिंह विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे रहे। वह जौनपुर में कभी क्रिकेट खेलते तो कभी किसी शोरूम का उद्घाटन करते हुए देखे गए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने धनंजय सिंह का क्रिकेट खेलते हुए वीडियो ट्वीट किया और उसके खुलेआम घूमने पर सवाल उठाए।












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