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UP News: बदायूं में मंदिर और मजार में पहुंचे शिवपाल यादव, X पर लिखे- 'कैसे कह दूं कि मुलाकात नहीं होती...'

UP News: लोकसभा चुनाव 2024 का ऐलान किसी भी समय हो सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टी अपने अपने स्तर से पार्टी और प्रत्याशी को चुनाव जीताने की तैयारी में लगी हुई हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी द्वारा बदायूं से प्रत्याशी बनाए गए शिवपाल यादव भी प्रचार करने निकल गए हैं।

गुरुवार से बदायूं में उन्होंने जनसंपर्क यात्रा शुरू कर दी है। इसे लेकर सोशल साइट X पर उन्होंने कई फोटो भी शेर की। गुरुवार को बदायूं पहुंचे शिवपाल यादव मंदिर और मजार पर भी पहुंचे इसके अलावा जिले के समाजवादी पार्टी के नेताओं से मुलाकात करने के साथ ही जनसंपर्क यात्रा भी निकले।

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बदायूं निकलने से पहले उन्होंने X पर लिखा था कि "आज से बदायूं लोकसभा क्षेत्र में जनसम्पर्क हेतु यात्रा पर हूं। मेरा इस क्षेत्र से दशकों पुराना आत्मीय रिश्ता है। मन में बदायूं से जुड़े ढेरों किस्से और यादें हैं।" इसके अलावा उन्‍होंने "शकील बदायूनी साहब के शब्दों में... कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है, रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है।"

दरअसल, समाजवादी पार्टी द्वारा 22 फरवरी को ही बदायूं सीट से शिवपाल यादव को उम्मीदवार घोषित किया गया था। हालांकि उसके बाद वे बदायूं में चुनाव प्रचार करने नहीं पहुंचे थे। ऐसे में पार्टी में असमंजस की स्थिति बताई जा रही थी। हालांकि स्वास्थ्य ठीक ना होने का हवाला पार्टी द्वारा दिया जा रहा था।

उनका कार्यक्रम भी दो बर्तन हुआ लेकिन बाद में कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया। समाजवादी पार्टी के साथ ही बदायूं में भी यह चर्चा होने लगी थी कि बदायूं में शिवपाल यादव की जगह किसी दूसरे को टिकट दिया जा सकता है। हालांकि गुरुवार को शिवपाल यादव ने खुद ही इसे स्पष्ट कर दिया।

1996 से सपा के कब्जे में रही यह सीट
बदायूं लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी की सीट रही है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के नेता सलीम इकबाल शेरवानी (जो अब पार्टी छोड़ चुके हैं) 1996 से 2004 तक सांसद रहे। इसके अलावा 2009 और 2014 में समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव लोकसभा चुनाव जीते थे।

हालांकि साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की। अब इस बार इस सीट पर भी लड़ाई रोचक होने वाली है। क्योंकि एक तरफ जहां यह समाजवादी का गढ़ माना जाता है वहीं दूसरी तरफ सपा के नेता सलीम इकबाल शेरवानी पार्टी से दूरी बना चुके हैं। इसका फायदा दूसरे दलों को भी मिल सकता है।

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